

Jharkhand News : दुबई के बुर्ज खलीफा में होगा ओलचिकी शताब्दी समारोह, झारखंड की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच
Jharkhand News : कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवास में हुई अहम बैठक में ओलचिकी लिपि के 100 वर्ष पूरे होने पर दुबई में अंतरराष्ट्रीय आयोजन के प्रस्ताव पर चर्चा, ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री को ओलचिकी लिपि में अनूदित झारखंड का मानचित्र भेंट किया।

Jharkhand News : झारखंड की आदिवासी भाषा और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की शुरुआत हुई है। आज कांके रोड, रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में मुख्यमंत्री Hemant Soren से Pandit Raghunath Murmu Heritage Trust, रायरंगपुर, ओडिशा के एक प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार मुलाकात की।
बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के समक्ष आगामी 11 एवं 12 अप्रैल 2026 को दुबई के विश्व प्रसिद्ध स्थल Burj Khalifa में आयोजित किए जाने वाले ‘ओलचिकी शताब्दी समारोह’ के प्रस्ताव पर विस्तृत चर्चा की। इस समारोह का उद्देश्य ओलचिकी लिपि के 100 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में वैश्विक स्तर पर उसकी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्ता को रेखांकित करना है।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा ओलचिकी लिपि में अनुवादित झारखंड राज्य का मानचित्र सप्रेम भेंट किया। यह मानचित्र न केवल भाषाई गौरव का प्रतीक है, बल्कि यह दर्शाता है कि राज्य की पारंपरिक लिपि को सरकारी और प्रशासनिक मान्यता की दिशा में भी सार्थक कदम उठाए जा रहे हैं।
बैठक में ट्रस्ट के अध्यक्ष चुन्नियान मुर्मु, ट्रेजरर अंता आलोक बास्के एवं सदस्य डॉ. डुमनी माई मुर्मु उपस्थित थे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को बताया कि ओलचिकी लिपि का आविष्कार महान संताली विद्वान Pandit Raghunath Murmu द्वारा किया गया था। इस लिपि ने संताली भाषा को एक सशक्त लिखित स्वरूप प्रदान किया और आदिवासी समाज को सांस्कृतिक आत्मविश्वास से जोड़ा।

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि झारखंड की पहचान उसकी विविधता और समृद्ध आदिवासी परंपराओं से है। ओलचिकी लिपि केवल एक भाषा का माध्यम नहीं, बल्कि यह समाज की अस्मिता और इतिहास की धरोहर है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सदैव आदिवासी भाषाओं और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध रही है।
दुबई में आयोजित होने वाला यह शताब्दी समारोह न केवल प्रवासी भारतीयों बल्कि वैश्विक समुदाय को भी झारखंड की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराएगा। बुर्ज खलीफा जैसे प्रतिष्ठित स्थल पर कार्यक्रम आयोजित करना अपने आप में ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है। इससे संताली भाषा और ओलचिकी लिपि को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिलने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह आयोजन सफल होता है, तो यह आदिवासी भाषाओं के संरक्षण के लिए एक मॉडल के रूप में स्थापित हो सकता है। साथ ही, इससे पर्यटन, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राज्य की सकारात्मक छवि को भी बल मिलेगा।
यह बैठक झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पटल पर स्थापित करने की दिशा में एक मजबूत कदम के रूप में देखी जा रही है। आने वाले समय में राज्य सरकार और ट्रस्ट के बीच समन्वय से इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक स्वरूप दिए जाने की उम्मीद है।