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Dr. Bhimrao Ambedkar Jayanti
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Dr. Bhimrao Ambedkar Jayanti : रांची में राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने दी श्रद्धांजलि

Megha Sinha
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Dr. Bhimrao Ambedkar Jayanti : रांची के अंबेडकर चौक, डोरंडा में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर को दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, लोकतंत्र और सामाजिक न्याय पर जोर

Dr. Bhimrao Ambedkar Jayanti : झारखंड की राजधानी रांची में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के अवसर पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार और मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अंबेडकर चौक, डोरंडा में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान लोकतंत्र, सामाजिक न्याय और समानता के मूल्यों को याद किया गया।
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Dr. Bhimrao Ambedkar Jayanti : रांची: भारत के संविधान निर्माता और भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर पूरे देश के साथ-साथ झारखंड की राजधानी रांची में भी श्रद्धा और सम्मान के साथ उन्हें याद किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार एवं मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने अंबेडकर चौक, डोरंडा स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

सुबह से ही अंबेडकर चौक पर लोगों की भीड़ जुटने लगी थी। विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों और आम नागरिकों ने डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें याद किया। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह से श्रद्धा और सम्मान से भरा हुआ था।

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इस अवसर पर मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि डॉ. अंबेडकर की जयंती केवल एक स्मरण दिवस नहीं, बल्कि यह देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि “भारत जैसे विशाल लोकतंत्र में डॉ. अंबेडकर का योगदान अतुलनीय है। उनके द्वारा निर्मित संविधान आज भी देश की एकता और अखंडता का आधार है।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि डॉ. अंबेडकर ने समाज के सबसे कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने सामाजिक न्याय, समानता और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए जो संघर्ष किया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे डॉ. अंबेडकर के विचारों और आदर्शों को अपने जीवन में अपनाएं।

राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने भी इस अवसर पर कहा कि डॉ. अंबेडकर का जीवन संघर्ष, शिक्षा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि हमें उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज में समानता और भाईचारे की भावना को मजबूत करना चाहिए।

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कार्यक्रम के दौरान प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके।

इस मौके पर कई सामाजिक संगठनों ने रैली और जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए। लोगों ने “जय भीम” के नारों के साथ डॉ. अंबेडकर के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। युवाओं में खासा उत्साह देखने को मिला, जिन्होंने उनके विचारों को डिजिटल माध्यमों से भी साझा किया।

डॉ. अंबेडकर का जीवन केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं, बल्कि यह एक आंदोलन है, जिसने भारत को सामाजिक समानता और न्याय की दिशा में आगे बढ़ाया। उन्होंने शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बताया और समाज के हर वर्ग को शिक्षित और जागरूक होने का संदेश दिया।

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आज के दौर में जब समाज कई तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब डॉ. अंबेडकर के विचार और भी प्रासंगिक हो जाते हैं। उनके द्वारा दिए गए सिद्धांत—स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व—आज भी देश के लिए मार्गदर्शक हैं।

रांची में आयोजित यह कार्यक्रम न केवल श्रद्धांजलि का अवसर था, बल्कि यह एक संदेश भी था कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए हमें डॉ. अंबेडकर के विचारों को अपनाना होगा।