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Jharkhand News : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राज्य स्तरीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन, सूखे से निपटने की रणनीति पर मंथन

Megha Sinha
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Jharkhand News : 11 मई को कंटीजेंट प्लान पर हुआ प्रेजेंटेशन, 12 मई को होगी खरीफ कर्मशाला

Jharkhand News : कृषि विभाग, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग की पहल, सभी जिलों के कृषि पदाधिकारियों ने साझा की तैयारियां
Jharkhand News : बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राज्य स्तरीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन, सूखे से निपटने की रणनीति पर मंथन 1

रांची: बिरसा कृषि विश्वविद्यालय में सोमवार को दो दिवसीय राज्य स्तरीय खरीफ कर्मशाला का आयोजन किया गया। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन कृषि निदेशालय, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग द्वारा किया गया। कर्मशाला का मुख्य उद्देश्य आने वाले मानसून और संभावित सूखे की स्थिति को देखते हुए राज्यभर में कृषि तैयारियों की समीक्षा करना तथा किसानों को राहत पहुंचाने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करना रहा।

कार्यक्रम के पहले दिन 11 मई को जिलावार कंटीजेंट प्लान यानी आकस्मिक योजना पर विस्तृत प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किया गया। राज्य के सभी जिलों से पहुंचे कृषि पदाधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में की जा रही तैयारियों, संभावित चुनौतियों और किसानों को राहत पहुंचाने की योजनाओं की जानकारी साझा की। वहीं 12 मई को खरीफ कर्मशाला का मुख्य आयोजन किया जाएगा, जिसमें खरीफ फसलों की तैयारी, बीज वितरण और जल संरक्षण जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा होगी।

सूखे की स्थिति में किसानों को राहत पहुंचाना प्राथमिकता

कर्मशाला को संबोधित करते हुए एससी दुबे ने कहा कि प्राकृतिक आपदा विशेषकर सूखे की स्थिति में किसानों को अधिकतम राहत पहुंचाना सरकार और कृषि विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने कृषि पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि जुलाई के अंतिम सप्ताह तक सभी तैयारियां सुनिश्चित कर ली जाएं ताकि किसी भी आपदा से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।

उन्होंने कहा कि बीज वितरण को प्राथमिकता के आधार पर किया जाए और नर्सरी प्रबंधन पर विशेष फोकस रखा जाए। साथ ही किसानों को इंटरक्रॉपिंग अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए ताकि फसल नुकसान की स्थिति में वैकल्पिक उत्पादन बना रहे। कुलपति ने चेतावनी दी कि यदि सूखे की थोड़ी भी संभावना दिखाई दे तो यूरिया के उपयोग में सावधानी बरती जाए।

उन्होंने सॉइल कंजर्वेशन और रेन वाटर हार्वेस्टिंग को समय की आवश्यकता बताते हुए जल संरक्षण के विभिन्न उपाय अपनाने पर जोर दिया। साथ ही किसानों को बागवानी की ओर प्रेरित करते हुए आम और लीची के पौधे लगाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पानी की कमी होने पर खेत खाली छोड़ने के बजाय खरीफ सब्जियों की खेती की जानी चाहिए।

खेती के साथ पशुपालन पर भी जोर

कुलपति एससी दुबे ने कहा कि यदि झारखंड में किसानों की आय बढ़ानी है तो केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होगा। किसानों को पशुपालन, डेयरी और अन्य कृषि आधारित गतिविधियों की ओर भी प्रोत्साहित करना होगा। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी और प्राकृतिक आपदा की स्थिति में भी उनकी आय प्रभावित नहीं होगी।

उन्होंने कहा कि राज्य में कृषि को टिकाऊ और लाभकारी बनाने के लिए वैज्ञानिक खेती, जल संरक्षण और विविधीकृत कृषि मॉडल को अपनाना बेहद जरूरी है। कृषि वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों को गांव स्तर तक किसानों को जागरूक करने की दिशा में कार्य करना चाहिए।

मानसून को लेकर सभी स्तर पर तैयारी के निर्देश

कार्यक्रम में मौजूद शैलेन्द्र कुमार ने कहा कि कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संभावित सूखे की स्थिति को ध्यान में रखते हुए व्यापक तैयारियां सुनिश्चित की जाएं।

उन्होंने कहा कि कृषि विभाग के सभी प्रभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए ताकि किसी भी प्रकार की प्राकृतिक आपदा का सामना प्रभावी तरीके से किया जा सके। सूखे की स्थिति में वैकल्पिक खेती, जल प्रबंधन और किसानों को समय पर सहायता उपलब्ध कराने के लिए आकस्मिक योजनाओं पर विशेष कार्य किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से 11 और 12 मई को दो दिवसीय खरीफ कर्मशाला आयोजित की जा रही है, जिसमें पहले दिन कंटीजेंट प्लान पर प्रेजेंटेशन दिया गया, जबकि दूसरे दिन खरीफ फसलों की रणनीति और विभागीय योजनाओं पर चर्चा होगी।

जिलों ने साझा की अपनी आकस्मिक योजनाएं

कर्मशाला में विभिन्न जिलों के कृषि पदाधिकारियों ने अपने-अपने जिलों में तैयार की गई आकस्मिक योजनाओं की जानकारी दी। राम शंकर प्रसाद सिंह ने रांची जिले की तैयारियों पर विस्तृत प्रस्तुति देते हुए बताया कि सूखे की स्थिति से निपटने के लिए कंटीजेंट प्लान तैयार कर लिया गया है।

वहीं हरिकेश ने खूंटी जिले में सूखे की संभावित स्थिति से निपटने के लिए बनाई गई योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि किसानों को वैकल्पिक खेती, जल संरक्षण और समय पर बीज उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

इसके अलावा राज्य के अन्य जिलों से आए कृषि पदाधिकारियों ने भी अपने क्षेत्रों में चल रही तैयारियों, किसानों के लिए बनाई गई योजनाओं और मानसून को लेकर विभागीय रणनीतियों की जानकारी दी।

कार्यक्रम में कृषि विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी, विभिन्न जिलों से पहुंचे कृषि अधिकारी, बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारी, कृषि वैज्ञानिक और अन्य संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।