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Jharkhand News : चुनाव तक चुप्पी, चुनाव बाद त्याग का उपदेश! मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों पर उठे बड़े सवाल

Megha Sinha

Jharkhand News : ‘विश्वगुरु’ के दावों से लेकर जनता को त्याग की सलाह तक, विपक्ष ने मोदी सरकार को घेरा

Jharkhand News : महंगाई, बेरोज़गारी, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और विदेश नीति को लेकर केंद्र सरकार पर विपक्ष का तीखा हमला

देश की राजनीति में एक बार फिर आर्थिक मुद्दों को लेकर घमासान तेज हो गया है। प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा हाल के संबोधनों में पेट्रोल बचाने, सोना खरीदने से बचने, विदेश यात्राएं कम करने, विदेशी सामानों का उपयोग छोड़ने और वर्क फ्रॉम होम अपनाने जैसी सलाहों के बाद विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव खत्म होते ही अब सरकार जनता को “त्याग” का पाठ पढ़ा रही है, जबकि चुनाव से पहले वास्तविक आर्थिक स्थिति को छिपाया गया।

विपक्ष का कहना है कि देश की जनता पहले से ही महंगाई और बेरोज़गारी की मार झेल रही है। ऐसे समय में सरकार द्वारा खर्च कम करने और जीवनशैली में कटौती की सलाह देना इस बात का संकेत है कि देश की आर्थिक स्थिति गंभीर संकट में है। विपक्ष ने सवाल उठाया कि यदि वैश्विक युद्ध, आर्थिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता पहले से मौजूद थी, तो चुनावों के दौरान जनता को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पांच राज्यों के चुनावों के कारण सरकार ने कठिन आर्थिक सच्चाइयों को सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने दिया। लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद अब आम लोगों को “कम खर्च करो, कम घूमो और कम खरीदो” जैसी सलाह दी जा रही है। विपक्ष का आरोप है कि यह जनता के साथ राजनीतिक छल है।

विपक्षी दलों ने सरकार की विदेश नीति को भी निशाने पर लिया है। उनका कहना है कि जिन देशों को कभी भारत का सबसे करीबी मित्र बताया जाता था, वही देश अब भारत से दूरी बनाते दिखाई दे रहे हैं। विपक्ष का आरोप है कि अमेरिका के दबाव में भारत की नीतियां प्रभावित हो रही हैं और इसका सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई, गिरता रुपया और लगातार बढ़ते पेट्रोल-डीजल के दाम इसका उदाहरण बताए जा रहे हैं।

सरकार के “विश्वगुरु”, “न्यू इंडिया” और “5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी” जैसे नारों पर भी विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि बड़े-बड़े दावों के बावजूद आज आम आदमी की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। खाने-पीने की वस्तुओं से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन तक हर क्षेत्र में महंगाई बढ़ती जा रही है। युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सीमित होते जा रहे हैं और मध्यम वर्ग पर टैक्स का बोझ लगातार बढ़ रहा है।

विपक्ष ने यह भी कहा कि सरकार एक ओर जनता को विदेश यात्राएं और डेस्टिनेशन वेडिंग रोकने की सलाह दे रही है, जबकि दूसरी ओर प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री लगातार विदेश दौरों पर जाते दिखाई देते हैं। सवाल उठाया जा रहा है कि यदि ऑनलाइन मीटिंग और वर्क फ्रॉम होम इतने प्रभावी हैं, तो सरकार खुद इस मॉडल को पूरी तरह क्यों नहीं अपनाती।

राजनीतिक गलियारों में यह बयान भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि पिछले कुछ वर्षों में जनता से कभी थाली बजाने, कभी मोमबत्ती जलाने और कभी खाने-पीने की चीजों में कटौती करने की अपील की गई। अब एक बार फिर लोगों से कम खर्च करने और सीमित जीवनशैली अपनाने की सलाह दी जा रही है। विपक्ष का कहना है कि यदि 12 वर्षों के शासन के बाद भी सरकार के पास समाधान के नाम पर सिर्फ “त्याग” ही बचा है, तो विकास के दावों पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।

Jharkhand Mukti Morcha ने भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि देश की जनता अब भाषण नहीं बल्कि जवाब चाहती है। पार्टी का कहना है कि जनता टैक्स भी दे, महंगाई भी सहे, बेरोज़गारी भी झेले और अंत में उपदेश भी सुने, यह लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।

हालांकि केंद्र सरकार की ओर से अभी तक इन आरोपों पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार लगातार यह दावा करती रही है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और वैश्विक संकटों के बावजूद देश मजबूत स्थिति में खड़ा है। लेकिन विपक्ष का कहना है कि जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।

आने वाले दिनों में महंगाई, बेरोज़गारी और आर्थिक नीतियों को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। ऐसे में यह मुद्दा संसद से लेकर सड़क तक बड़ा राजनीतिक विषय बन सकता है।