CBSE Results : सरकारी नौकरी में रहते हुए छठे प्रयास में पाई सफलता, कोडरमा और झारखंड का बढ़ाया मान
CBSE Results : झारखंड के कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया निवासी अंशुमान कुमार सिंह ने यूपीएससी की भारतीय वन सेवा (IFS) परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल कर पूरे राज्य को गौरवान्वित किया है। साधारण परिवार से आने वाले अंशुमान ने पांच बार असफलता मिलने के बावजूद हार नहीं मानी और छठे प्रयास में यह बड़ी सफलता हासिल की। वर्तमान में भारतीय तटरक्षक बल में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर कार्यरत अंशुमान की सफलता मेहनत, संघर्ष और परिवार के समर्थन की प्रेरणादायक कहानी बन गई है।

झारखंड के कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने पूरे जिले और राज्य का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। झुमरी तिलैया निवासी अंशुमान कुमार सिंह ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा आयोजित भारतीय वन सेवा यानी IFS परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल कर इतिहास रच दिया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई है।
जैसे ही परीक्षा परिणाम घोषित हुआ, परिवार, रिश्तेदारों और शहरवासियों के बीच उत्साह का माहौल बन गया। अंशुमान जब अपने घर पहुंचे तो स्थानीय लोगों ने फूल-मालाओं और मिठाइयों के साथ उनका भव्य स्वागत किया। हर कोई इस युवा अधिकारी की मेहनत और संघर्ष की सराहना करता नजर आया।
साधारण परिवार से निकलकर हासिल की बड़ी सफलता
अंशुमान कुमार सिंह का जीवन संघर्ष और मेहनत की मिसाल है। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, कोडरमा से पूरी की। इसके बाद इंटरमीडिएट की पढ़ाई ग्रिजली स्कूल से की। पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे अंशुमान वर्ष 2011 में 12वीं के जिला टॉपर भी रह चुके हैं।
शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने वर्ष 2015 में भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) में असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में सेवा शुरू की। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने यूपीएससी की तैयारी जारी रखी। कठिन ड्यूटी और सीमित समय के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाया और आखिरकार छठे प्रयास में देशभर में दूसरा स्थान हासिल कर लिया।
पांच बार असफलता के बाद भी नहीं मानी हार
यूपीएससी और IFS जैसी परीक्षाओं को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में गिना जाता है। लाखों उम्मीदवार हर साल इस परीक्षा में शामिल होते हैं, लेकिन सफलता कुछ ही लोगों को मिल पाती है। अंशुमान को भी लगातार पांच बार असफलता का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।
उन्होंने अपनी असफलताओं को कमजोरी नहीं बल्कि सीख के रूप में लिया। हर प्रयास के साथ उन्होंने अपनी तैयारी को और बेहतर बनाया। यही वजह रही कि छठे प्रयास में उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 2 हासिल कर यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।
पिता के निधन के बाद बढ़ी जिम्मेदारियां
अंशुमान की जिंदगी में सबसे कठिन समय वर्ष 2019 में आया, जब उनके पिता का निधन हो गया। उनके पिता पेशे से शिक्षक थे और कोचिंग चलाकर बच्चों को पढ़ाते थे। पिता के जाने के बाद परिवार की जिम्मेदारियां अचानक बढ़ गईं।
हालांकि इस कठिन दौर में उनकी मां सुनीता देवी ने परिवार को संभाला और बच्चों का मनोबल टूटने नहीं दिया। उन्होंने हर परिस्थिति में अपने बेटों को आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। अंशुमान की मां ने बताया कि उनके पिता की हमेशा इच्छा थी कि उनका बेटा सिविल सर्विस में जाकर देश की सेवा करे। बेटे की इस सफलता से आज उनका सपना पूरा हो गया है।
पत्नी और भाई का मिला पूरा सहयोग
अंशुमान की सफलता के पीछे उनके छोटे भाई हिमांशु और पत्नी शांभवी सिंह का भी बड़ा योगदान रहा। परिवार ने हर मुश्किल समय में उनका साथ दिया। जब कभी तैयारी के दौरान तनाव या निराशा का माहौल बना, तब परिवार ने उन्हें हिम्मत दी और आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
अंशुमान ने भी अपनी सफलता का श्रेय अपने परिवार को दिया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में परिवार का समर्थन ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बना।
युवाओं के लिए प्रेरणा बने अंशुमान
आज अंशुमान कुमार सिंह की सफलता लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि मेहनत, धैर्य और निरंतर प्रयास से किसी भी मुकाम को हासिल किया जा सकता है।
कोडरमा जैसे छोटे शहर से निकलकर देशभर में दूसरा स्थान हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। उनकी यह सफलता उन युवाओं को नई उम्मीद देती है, जो असफलताओं के कारण अपने सपनों को छोड़ देते हैं। अंशुमान की कहानी बताती है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो सफलता जरूर मिलती है।

