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Jharkhand News : विधायक कल्पना सोरेन ने लिज्जत पापड़ मॉडल को बताया महिला सशक्तिकरण की मिसाल

Megha Sinha

Jharkhand News : लिज्जत पापड़ मॉडल को बताया महिला सशक्तिकरण की मिसाल, हस्तशिल्प और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में लागू करने की अपील

Jharkhand News : गांडेय की विधायक कल्पना सोरेन ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने को लेकर एक महत्वपूर्ण संदेश साझा किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए अपने विचारोत्तेजक पोस्ट में उन्होंने “संघे शक्ति कलियुगे” की अवधारणा को सामने रखते हुए प्रसिद्ध महिला सहकारी संस्था श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि यह संस्था केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि महिलाओं की सामूहिक शक्ति, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का जीवंत प्रतीक है।

दरअसल, महिला विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल महाराष्ट्र दौरे पर महिला उद्यम और स्वरोजगार से जुड़े प्रयासों का निरीक्षण करने पहुंचा है। इस दौरान विभिन्न महिला सहकारी मॉडलों और कुटीर उद्योगों का अध्ययन किया जा रहा है। इसी क्रम में कल्पना सोरेन ने लिज्जत पापड़ मॉडल की सफलता को ग्रामीण भारत के लिए प्रेरणादायक बताया।

उन्होंने कहा कि लिज्जत पापड़ ने वर्षों से लाखों महिलाओं को रोजगार, सम्मान और आर्थिक स्वतंत्रता प्रदान की है। इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि महिलाएं अपने घरों या स्थानीय स्तर पर रहकर काम कर सकती हैं। इससे वे पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ आर्थिक रूप से भी मजबूत बनती हैं। उन्होंने इसे “डिस्ट्रिब्यूटेड प्रोडक्शन” यानी विकेन्द्रित उत्पादन प्रणाली का सफल उदाहरण बताया।

कल्पना सोरेन के अनुसार, विकेन्द्रित उत्पादन प्रणाली ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में बेहद कारगर साबित हो सकती है। गांवों में मौजूद पारंपरिक कौशल, स्थानीय संसाधनों और घरेलू श्रम शक्ति का सही उपयोग करके बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि महिलाओं को संगठित कर स्थानीय स्तर पर उत्पादन कार्य से जोड़ा जाए, तो इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और पलायन की समस्या भी कम होगी।

विधायक ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि लिज्जत पापड़ जैसे सहकारी मॉडल को केवल खाद्य उत्पादों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि इस व्यवस्था को हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण, बांस एवं लकड़ी आधारित उत्पाद, सिलाई-कढ़ाई और अन्य लघु उद्योगों में भी लागू किया जाना चाहिए। इससे ग्रामीण महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे और उनकी आय में वृद्धि होगी।

उन्होंने कहा कि आज के समय में आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा को मजबूत बनाने के लिए गृह एवं कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। गांवों में छोटे-छोटे उत्पादन केंद्र स्थापित कर स्थानीय महिलाओं को प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं, तो इससे न केवल परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी बल्कि ग्रामीण समाज में सामाजिक बदलाव भी देखने को मिलेगा।

कल्पना सोरेन ने सरकार, स्वयंसेवी संस्थाओं और निजी क्षेत्र से मिलकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि सभी संस्थाएं समन्वित प्रयास करें, तो ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी और सम्मानजनक रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकते हैं। उन्होंने महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और बाजार उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

उनका यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में लोग उनके विचारों का समर्थन कर रहे हैं और महिला सशक्तिकरण को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। कई सामाजिक संगठनों और महिला समूहों ने भी उनके विचारों को सकारात्मक पहल बताते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम करार दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विकेन्द्रित उत्पादन प्रणाली को योजनाबद्ध तरीके से लागू किया जाए, तो यह ग्रामीण भारत की तस्वीर बदल सकती है। इससे महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ेगी, स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा और आत्मनिर्भरता की दिशा में देश को नई गति मिलेगी।