Markachcho Mango Festival and Fair : मरकच्चो प्रखंड परिसर में आयोजित आम उत्सव मेले में लाभुकों ने बेचे 465 किलोग्राम आम, अधिकारियों ने किसानों को बाजार से जोड़ने और आय बढ़ाने पर दिया जोर
Markachcho Mango Festival and Fair : झारखंड सरकार की बिरसा हरित ग्राम योजना के तहत मरकच्चो प्रखंड में आयोजित आम उत्सव मेले में कुल 465 किलोग्राम आम की बिक्री हुई। मेले का उद्देश्य आम बागवानी से जुड़े लाभुकों को बाजार उपलब्ध कराना और उनकी आय बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना था। अधिकारियों ने किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को जारी रखने की बात कही।

कोडरमा जिले के मरकच्चो प्रखंड में शुक्रवार को झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी बिरसा हरित ग्राम योजना (BHGY) के तहत उत्पादित आमों के विपणन और बागवानी लाभुकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आम उत्सव मेला का भव्य आयोजन किया गया। यह आयोजन न केवल किसानों के लिए अपनी उपज बेचने का अवसर बना, बल्कि उन्हें बाजार से जोड़ने और उनकी आय बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल भी साबित हुआ।
प्रखंड परिसर में आयोजित इस मेले का उद्घाटन प्रखंड विकास पदाधिकारी हुलास महतो, अंचल अधिकारी परमेश्वर कुशवाहा, जेएसएलपीएस के बीपीएम सूरज कुमार तथा सीडीपीओ गीता सोय सहित अन्य अधिकारियों एवं कर्मियों ने संयुक्त रूप से किया। उद्घाटन के दौरान अधिकारियों ने किसानों और लाभुकों को योजना के महत्व तथा इसके माध्यम से मिलने वाले आर्थिक लाभों की जानकारी भी दी।
465 किलोग्राम आम की रिकॉर्ड बिक्री
आम उत्सव मेले में आम बागवानी से जुड़े लाभुकों द्वारा विभिन्न स्टॉल लगाए गए थे। इन स्टॉलों पर बड़ी संख्या में लोगों ने पहुंचकर आमों की खरीदारी की। मेले में कुल 405 किलोग्राम कच्चे आम की बिक्री हुई, जिसे 40 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा गया। वहीं फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी (FPC), मरकच्चो द्वारा 60 किलोग्राम पके आम 50 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचे गए।
इस प्रकार पूरे मेले में कुल 465 किलोग्राम आम की बिक्री दर्ज की गई। यह बिक्री किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बनी और उनके उत्पादों को स्थानीय बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में एक सफल प्रयास माना गया।
अधिकारियों ने बढ़ाया किसानों का उत्साह
मेले के दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचल अधिकारी ने स्वयं आम खरीदकर लाभुक किसानों का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि बिरसा हरित ग्राम योजना ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। योजना के तहत लगाए गए आम के बागान अब किसानों के लिए आय का स्थायी स्रोत बनते जा रहे हैं।
अधिकारियों ने बताया कि लाभुक केवल आम उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बागवानी के साथ-साथ सब्जी एवं अन्य फसलों की खेती कर अपनी आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बना रहे हैं। इससे ग्रामीण परिवारों की आय में निरंतर वृद्धि हो रही है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं।

मनरेगा और जेएसएलपीएस का बेहतर समन्वय बना सफलता की कुंजी
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने मनरेगा और जेएसएलपीएस (झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी) के बीच बेहतर समन्वय की सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों संस्थाओं के संयुक्त प्रयासों के कारण ही आम उत्सव मेला जैसे कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किए जा रहे हैं।
अधिकारियों के अनुसार, किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। उन्हें बाजार से जोड़ना, उचित मूल्य दिलाना और उनकी आय को स्थायी रूप से बढ़ाना भी उतना ही आवश्यक है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ऐसे आयोजनों का विस्तार किया जा रहा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती
बिरसा हरित ग्राम योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में हरित विकास को बढ़ावा देना और किसानों को आत्मनिर्भर बनाना है। योजना के तहत लगाए गए फलदार पौधे अब उत्पादन देने लगे हैं, जिससे किसानों को नियमित आय प्राप्त हो रही है। आम उत्सव मेला जैसे आयोजन इस बात का प्रमाण हैं कि सरकारी योजनाओं का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंच रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसानों को लगातार बाजार उपलब्ध कराया जाए और ऐसे मेले नियमित रूप से आयोजित किए जाएं, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती मिलेगी। इससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।
कई अधिकारी और कर्मी रहे उपस्थित
इस अवसर पर जेएसएलपीएस के बीपीओ दिनेश्वर पासवान, एडमिन संतोष कुमार दास, प्रभात कुमार, अमित कुमार, मनोज कुमार, अमरदीप कुमार, बिरंजू कुमारी, रेशमी कुमारी, भीम कुमार सहित सभी बीआरपी एवं अन्य कर्मी उपस्थित रहे। सभी ने मेले के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और किसानों को बेहतर विपणन व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए सहयोग दिया।
मरकच्चो में आयोजित यह आम उत्सव मेला किसानों की मेहनत, सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और विभागों के समन्वित प्रयासों का एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया है। आने वाले समय में ऐसे आयोजन किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल सकते हैं।

