Skip to content

Kodarma News: प्रेम विवाह से आहत पिता ने जीवित बेटी का कराया प्रतीकात्मक श्राद्ध, राजदह धाम में किया पिंडदान

Megha Sinha

Kodarma News : 20 जून को तय थी शादी, 12 जून को प्रेमी संग घर छोड़कर चली गई युवती; पिता के अनोखे कदम ने पूरे इलाके में छेड़ी सामाजिक बहस

Kodarma News : कोडरमा के डोमचांच में प्रेम विवाह के बाद पिता ने जीवित बेटी का प्रतीकात्मक श्राद्ध और पिंडदान कराया। 20 जून को शादी तय थी, लेकिन युवती 12 जून को प्रेमी के साथ चली गई। घटना के बाद इलाके में सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों को लेकर बहस तेज हो गई है।

झारखंड के कोडरमा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पूरे इलाके में चर्चा और बहस का माहौल पैदा कर दिया है। एक ओर जहां युवती ने अपनी पसंद के युवक के साथ प्रेम विवाह कर अपनी जिंदगी का नया अध्याय शुरू किया, वहीं दूसरी ओर इस फैसले से आहत पिता ने जीवित बेटी का प्रतीकात्मक श्राद्ध और पिंडदान कराकर समाज के सामने अपनी पीड़ा व्यक्त की। यह घटना सिर्फ एक परिवार की व्यक्तिगत कहानी नहीं है, बल्कि बदलते सामाजिक परिवेश और पारंपरिक पारिवारिक मूल्यों के बीच बढ़ते टकराव को भी उजागर करती है।

20 जून को होनी थी शादी, 12 जून को घर छोड़ गई बेटी

जानकारी के अनुसार मामला कोडरमा जिले के डोमचांच थाना क्षेत्र के बेहराडीह गांव का है। यहां रहने वाले एक परिवार ने अपनी बेटी की शादी 20 जून 2026 को तय की थी। विवाह की लगभग सभी तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। रिश्तेदारों को निमंत्रण भेजा जा चुका था और घर में शादी का माहौल था। परिवार के सदस्य बारात के स्वागत और अन्य रस्मों की तैयारियों में जुटे हुए थे।

लेकिन शादी से ठीक आठ दिन पहले, यानी 12 जून की रात, युवती अचानक घर छोड़कर चली गई। बाद में पता चला कि उसने अपने प्रेमी के साथ विवाह कर लिया है। इस खबर ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। जिन सपनों को परिवार लंबे समय से संजो रहा था, वे एक झटके में टूट गए।

सोशल मीडिया पर वायरल हुआ युवती का वीडियो

घटना के बाद युवती का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जो तेजी से वायरल होने लगा। वीडियो में युवती यह कहती दिखाई दे रही है कि उसने अपनी मर्जी से विवाह किया है और वह अपने फैसले से खुश है। साथ ही उसने यह भी कहा कि यदि उसके पति या ससुराल पक्ष को किसी तरह की परेशानी होती है तो उसके लिए उसके मायके पक्ष को जिम्मेदार माना जाए।

वीडियो सामने आने के बाद मामले ने और अधिक तूल पकड़ लिया। सोशल मीडिया पर लोगों ने इस घटना को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कुछ लोगों ने युवती के अपने जीवनसाथी चुनने के अधिकार का समर्थन किया, जबकि कुछ लोगों ने परिवार की भावनाओं को नजरअंदाज करने को गलत बताया।

पिता को लगा गहरा भावनात्मक और सामाजिक आघात

परिजनों का कहना है कि बेटी के इस फैसले से पिता को गहरा मानसिक और भावनात्मक आघात पहुंचा है। परिवार का दावा है कि शादी की तैयारियों में काफी समय और धन खर्च किया गया था। रिश्तेदारों और समाज के बीच परिवार की प्रतिष्ठा भी दांव पर लग गई।

पिता का मानना है कि बेटी ने परिवार की भावनाओं और सामाजिक सम्मान की अनदेखी की है। इसी दर्द और निराशा के चलते उन्होंने एक ऐसा कदम उठाया जिसकी चर्चा अब दूर-दूर तक हो रही है।

राजदह धाम में कराया प्रतीकात्मक श्राद्ध और पिंडदान

अपनी पीड़ा व्यक्त करने के लिए पिता परिवार और गांव समाज के कुछ लोगों के साथ गिरिडीह जिले के सरिया स्थित प्रसिद्ध उत्तरवाहिनी तट राजदह धाम पहुंचे। यहां वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ बेटी का प्रतीकात्मक श्राद्ध और पिंडदान किया गया।

हिंदू धार्मिक परंपराओं में श्राद्ध और पिंडदान आमतौर पर मृत व्यक्तियों की आत्मा की शांति के लिए किया जाता है। ऐसे में जीवित बेटी के लिए इस तरह का अनुष्ठान किए जाने की घटना ने लोगों को आश्चर्यचकित कर दिया।

बताया जाता है कि अनुष्ठान के दौरान पिता ने अपनी बेटी से सभी सामाजिक और पारिवारिक संबंध समाप्त करने की घोषणा भी की। हालांकि इस पूरे मामले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई या कानूनी विवाद सामने नहीं आया है।

इलाके में छिड़ी सामाजिक बहस

इस घटना के सामने आने के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है। गांवों, चौपालों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोग इस मामले को लेकर अपनी-अपनी राय रख रहे हैं।

एक वर्ग का कहना है कि युवाओं को अपने जीवनसाथी चुनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए और प्रेम विवाह कोई अपराध नहीं है। उनका मानना है कि बदलते समय के साथ समाज को भी अपनी सोच में बदलाव लाना होगा।

वहीं दूसरा वर्ग इस घटना को पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक परंपराओं से जोड़कर देख रहा है। उनका कहना है कि किसी भी बड़े फैसले से पहले परिवार की भावनाओं और सम्मान का ध्यान रखना जरूरी है।

बदलते समाज और परंपराओं के बीच बढ़ती दूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक शिक्षा, सोशल मीडिया और बदलती जीवनशैली ने युवाओं को अपने फैसले लेने के लिए अधिक स्वतंत्र बनाया है। दूसरी ओर ग्रामीण और पारंपरिक समाज में परिवार की भूमिका आज भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।

यही कारण है कि जब युवाओं के व्यक्तिगत निर्णय और परिवार की अपेक्षाएं आपस में टकराती हैं तो इस तरह की घटनाएं सामने आती हैं। कोडरमा की यह घटना भी उसी सामाजिक बदलाव का एक उदाहरण मानी जा रही है, जहां एक तरफ व्यक्तिगत स्वतंत्रता है तो दूसरी तरफ पारंपरिक सोच और सामाजिक मान्यताएं।

एक परिवार की कहानी से आगे का सवाल

डोमचांच की यह घटना केवल एक पिता और बेटी के रिश्ते तक सीमित नहीं है। यह समाज के सामने कई सवाल भी खड़े करती है। क्या युवाओं को अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने की पूरी स्वतंत्रता होनी चाहिए? क्या परिवार की सहमति और भावनाओं को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए? और बदलते समय में पारंपरिक मूल्यों तथा आधुनिक सोच के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए?

इन सवालों के जवाब अलग-अलग हो सकते हैं, लेकिन इतना तय है कि यह घटना लंबे समय तक लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहेगी।