
Jharkhand News : झारखण्ड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दी नई दिशा, 2240 क्विंटल आम की बिक्री से ₹60.51 लाख का कारोबार; दुबई और लंदन तक पहुंचा झारखण्ड का आम
Jharkhand News : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की दूरदर्शी सोच और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत के दम पर झारखण्ड का आम अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी पहचान बना रहा है। ‘पलाश’ ब्रांड के तहत संचालित झारखण्ड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव ने हजारों ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने के साथ-साथ महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। राज्य में इस वर्ष 50 हजार मीट्रिक टन आम उत्पादन का अनुमान है, जबकि अब तक 2240 क्विंटल आम की बिक्री से 60.51 लाख रुपये से अधिक का कारोबार हो चुका है।

रांची: मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की दूरदर्शी सोच और ग्रामीण महिलाओं की अथक मेहनत ने झारखण्ड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई पहचान दी है। राज्य सरकार की पहल और सखी मंडल की महिलाओं के समर्पण का परिणाम है कि आज झारखण्ड का आम देश के बड़े बाजारों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी अपनी मिठास बिखेर रहा है। ‘पलाश’ ब्रांड के तहत संचालित झारखण्ड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव ने न केवल किसानों की आय बढ़ाई है, बल्कि हजारों ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी प्रदान किया है।
कोरोना महामारी के दौरान मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के निर्देश पर शुरू की गई बिरसा हरित ग्राम योजना आज ग्रामीण विकास का सफल मॉडल बन चुकी है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को स्थायी आजीविका उपलब्ध कराना था। योजना के तहत सखी मंडल की महिलाओं और गांव लौटे प्रवासी श्रमिकों को फलदार पौधों की खेती से जोड़ा गया। इसका सकारात्मक परिणाम आज पूरे राज्य में दिखाई दे रहा है। वर्तमान में झारखण्ड में लगभग 1.86 लाख एकड़ क्षेत्र में आम के बगीचे विकसित हो चुके हैं, जिससे करीब 2.15 लाख ग्रामीण परिवारों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार और आय का स्रोत मिला है।
इस वर्ष राज्य में लगभग 52 हजार एकड़ के आम बागान पूरी तरह तुड़ाई के लिए तैयार हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस सीजन में करीब 50 हजार मीट्रिक टन आम उत्पादन का अनुमान है। यह उत्पादन न केवल राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगा, बल्कि किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि करेगा।

इस पूरी पहल की सबसे बड़ी ताकत झारखण्ड की ग्रामीण महिलाएं हैं। सखी मंडल की दीदियां आम के संग्रहण, छंटाई, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और विपणन तक की पूरी जिम्मेदारी संभाल रही हैं। “ग्रामीण महिलाओं की श्रम शक्ति का सम्मान” की भावना के साथ महिलाएं अब केवल उत्पादन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बाजार प्रबंधन और बिक्री की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। झारखण्ड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) द्वारा किसानों को फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FPO) से जोड़ा गया है, जिससे उन्हें संगठित बाजार और बेहतर मूल्य प्राप्त हो रहा है।
झारखण्ड के आमों को वैश्विक पहचान दिलाने में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन की कृषि और ग्रामीण विकास केंद्रित नीतियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य ने आम निर्यात के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। सिमडेगा जिले से जेबी एक्सपोर्टर्स के माध्यम से 1,580 किलोग्राम प्रीमियम गुणवत्ता वाले आम सीधे लंदन भेजे गए हैं। वहीं रामगढ़ क्लस्टर से 1,500 मीट्रिक टन से अधिक आम संयुक्त अरब अमीरात के दुबई बाजार में निर्यात किए गए हैं।
झारखण्ड के सिमडेगा, रामगढ़ और पूर्वी सिंहभूम जिले इस निर्यात अभियान में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार की गुणवत्ता आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए ICAR-RCER, पलांडू द्वारा किसानों और उत्पादक समूहों को तकनीकी मार्गदर्शन एवं गुणवत्ता मानक उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे झारखण्ड के आमों की गुणवत्ता वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धी बनी हुई है।

किसानों को अधिकतम लाभ दिलाने के उद्देश्य से आमों को गुणवत्ता के आधार पर ग्रेड-ए, ग्रेड-बी और ग्रेड-सी श्रेणियों में विभाजित किया गया है। ग्रेड-ए के प्रीमियम आमों को APEDA प्रमाणित निर्यातकों के माध्यम से यूएई, सऊदी अरब और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में भेजा जा रहा है। वहीं घरेलू बाजार में इन्हें पलाश मार्ट और अपना मार्ट के माध्यम से सह-ब्रांडेड पैकेजिंग में 60 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बेचा जा रहा है। गुमला जिले के एफपीओ ने अकेले अपना मार्ट को 2,000 किलोग्राम आम की आपूर्ति कर एक नई मिसाल पेश की है।
ग्रेड-बी आमों की बिक्री संगठित खुदरा बाजारों और पलाश के रिटेल नेटवर्क के माध्यम से की जा रही है, जबकि ग्रेड-सी आमों को स्थानीय बाजारों, पलाश कैनोपी कियोस्क, बस स्टैंड, जिला मुख्यालयों और साप्ताहिक हाटों के जरिए आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जा रहा है। इससे किसानों को हर स्तर पर बाजार उपलब्ध हो रहा है और उनकी उपज का बेहतर मूल्य सुनिश्चित हो रहा है।
राज्यभर में सक्रिय लगभग 115 एफपीओ को पलाश मैंगो कैनोपी काउंटर से जोड़ा गया है। ये काउंटर संग्रहण, परिवहन और बिक्री की प्रक्रिया को व्यवस्थित रूप से संचालित कर रहे हैं। अब तक इन केंद्रों के माध्यम से लगभग 2,24,200 किलोग्राम यानी 2240 क्विंटल आम की बिक्री हो चुकी है, जिससे 60.51 लाख रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया गया है।

राज्य सरकार भविष्य में इस पहल को और व्यापक बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। बाजार विस्तार के लिए ब्लॉक और जिला स्तर पर किसान मेले तथा बायर-सेलर मीट का आयोजन किया जा रहा है। इसके साथ ही आधुनिक रिटेल और ई-कॉमर्स नेटवर्क से जुड़ने की दिशा में भी प्रयास तेज हैं। ब्लिंकिट, रिलायंस फ्रेश और कशिश मॉल जैसे बड़े कॉर्पोरेट समूहों के साथ बातचीत अंतिम चरण में है। इन संस्थानों के जुड़ने से झारखण्ड के किसानों और महिला उत्पादक समूहों को देशभर के बड़े बाजारों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा।
झारखण्ड मैंगो मार्केटिंग इनिशिएटिव आज इस बात का उदाहरण बन चुका है कि यदि सरकार की योजनाओं को सही दिशा, मजबूत क्रियान्वयन और जनभागीदारी का साथ मिले, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के विज़न और ग्रामीण महिलाओं की मेहनत ने यह साबित कर दिया है कि झारखण्ड के गांव अब केवल कृषि उत्पादन के केंद्र नहीं, बल्कि वैश्विक बाजार से जुड़े सशक्त आर्थिक इकाई के रूप में उभर रहे हैं।


