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NEET UG Paper Leak 2024: NEET पेपर लीक का मास्टरमाइंड गिरफ्तार, MBBS के दो छात्र भी CBI के हत्थे चढ़े

NEET UG Paper Leak 2024: NEET UG 2024 पेपर लीक मामले में सीबीआई ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए कथित मास्टरमाइंड समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में राजस्थान के भरतपुर मेडिकल कॉलेज के दो एमबीबीएस छात्र भी शामिल हैं, जो कथित तौर पर सॉल्वर की भूमिका निभा रहे थे। NEET UG Paper Leak Case में CBI ने बड़ी कार्रवाई करते हुए कथित मास्टरमाइंड और दो MBBS छात्रों को गिरफ्तार किया है। NIT जमशेदपुर के पूर्व छात्र समेत तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद मामले में गिरफ्तार लोगों की संख्या 21 पहुंच गई है।
zabazshoaib

NEET UG Paper Leak 2024: देशभर में चर्चा का विषय बने NEET-UG पेपर लीक मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने मामले के कथित मास्टरमाइंड और दो मेडिकल छात्रों को गिरफ्तार किया है। इन गिरफ्तारियों के बाद इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपियों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है। सीबीआई के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक व्यक्ति नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT) जमशेदपुर से बीटेक कर चुका है, जबकि अन्य दो आरोपी राजस्थान के भरतपुर स्थित मेडिकल कॉलेज के एमबीबीएस छात्र हैं। इन पर परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक नेटवर्क का हिस्सा होने का आरोप है।

सीबीआई अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी की पहचान शशिकांत पासवान उर्फ शशि उर्फ पासू के रूप में हुई है। वह NIT जमशेदपुर से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक कर चुका है। जांच एजेंसियों का दावा है कि शशिकांत पेपर लीक नेटवर्क का महत्वपूर्ण सदस्य था और पहले गिरफ्तार किए जा चुके कुछ आरोपियों के साथ मिलकर पूरी साजिश को अंजाम देने में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।जांच में सामने आया है कि वह कुमार और रॉकी नामक आरोपियों के साथ संपर्क में था, जिन्हें पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। एजेंसी अब उसके डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग लेन-देन और अन्य संपर्कों की भी जांच कर रही है।

सीबीआई ने राजस्थान के भरतपुर मेडिकल कॉलेज से जुड़े दो एमबीबीएस छात्रों को भी गिरफ्तार किया है। इनमें द्वितीय वर्ष का छात्र कुमार मंगलम बिश्नोई और प्रथम वर्ष का छात्र दीपेंद्र शर्मा शामिल हैं।जांच एजेंसी के मुताबिक दोनों छात्र 5 मई को आयोजित NEET-UG परीक्षा के दौरान झारखंड के हजारीबाग में मौजूद थे। अधिकारियों का कहना है कि दोनों कथित तौर पर “सॉल्वर” के रूप में काम कर रहे थे। यानी उन्हें पहले से उपलब्ध कराए गए प्रश्नपत्र के उत्तर तैयार करने और अन्य अभ्यर्थियों की मदद करने की जिम्मेदारी दी गई थी।

सीबीआई की जांच में सामने आया है कि पेपर लीक के बाद कुछ चुनिंदा छात्रों को प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था। इसके बाद सॉल्वर गैंग के सदस्य प्रश्नों के उत्तर तैयार करते थे ताकि उम्मीदवार परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन कर सकें।अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार दोनों मेडिकल छात्र इसी नेटवर्क का हिस्सा थे। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इनके संपर्क में और कौन-कौन लोग थे तथा कितने उम्मीदवारों को इसका लाभ पहुंचाया गया।

सीबीआई के अनुसार इस मामले में इंजीनियर पंकज कुमार को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच में आरोप है कि पंकज कुमार ने परीक्षा का प्रश्नपत्र चोरी किया था और बाद में उसे नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचाया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि पेपर चोरी से लेकर उसके वितरण और सॉल्वर नेटवर्क के संचालन तक एक संगठित गिरोह सक्रिय था। इसी कड़ी में शशिकांत पासवान और दोनों मेडिकल छात्रों की गिरफ्तारी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

NEET-UG पेपर लीक मामले की जांच के दौरान झारखंड के हजारीबाग का नाम प्रमुख रूप से सामने आया था। शुरुआती जांच में संकेत मिले थे कि परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र कुछ लोगों तक पहुंच गया था। इसके बाद कई राज्यों में छापेमारी की गई और अलग-अलग स्थानों से आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों ने डिजिटल सबूत, मोबाइल फोन, लैपटॉप और वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए हैं।

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि ताजा गिरफ्तारियों के बाद NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक से जुड़े छह मामलों में अब तक कुल 21 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इन गिरफ्तारियों में सॉल्वर, बिचौलिये, नेटवर्क संचालक और अन्य सहयोगी शामिल हैं। एजेंसी का कहना है कि जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

NEET-UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। हर वर्ष लाखों छात्र इस परीक्षा में शामिल होते हैं। पेपर लीक की खबर सामने आने के बाद परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर देशभर में सवाल उठे थे।छात्र संगठनों और अभिभावकों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसके बाद केंद्र सरकार ने जांच की जिम्मेदारी सीबीआई को सौंपी थी। एजेंसी तब से लगातार इस मामले की तह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।