NEET Re-exam : लखीसराय में NEET पुनर्परीक्षा के दौरान पुलिस-प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, डॉक्टर, मेडिकल छात्र और बायोमेट्रिक कर्मी गिरफ्तार
NEET Re-exam : NEET (UG) पुनर्परीक्षा 2026 के दौरान बिहार के लखीसराय में बड़े स्तर पर चल रहे सॉल्वर गैंग का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में तीन परीक्षा केंद्रों से 9 सॉल्वर स्कॉलर, 18 बायोमेट्रिक कर्मी, दो सेटर और एक अभ्यर्थी समेत कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मामले में डॉक्टरों, मेडिकल छात्रों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कर्मियों की संलिप्तता सामने आई है। प्रशासन ने इसे संगठित परीक्षा फर्जीवाड़ा नेटवर्क बताया है जिसकी जांच अब और गहराई से की जा रही है।
बिहार के लखीसराय जिले में आयोजित NEET (UG) पुनर्परीक्षा 2026 के दौरान एक बड़े सॉल्वर स्कॉलर गैंग का खुलासा हुआ है। पुलिस और जिला प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में ऐसे संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया गया है जो पैसे लेकर असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को परीक्षा में बैठा रहा था। इस मामले में अब तक कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें सॉल्वर स्कॉलर, बायोमेट्रिक कर्मी, सेटर, डॉक्टर और मेडिकल छात्र शामिल हैं।
जिला प्रशासन के अनुसार यह गिरोह लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में फर्जीवाड़ा करने का काम कर रहा था। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क लाखों रुपये के लेन-देन के आधार पर संचालित हो रहा था और इसमें कई राज्यों के लोग शामिल थे।
गुप्त सूचना के बाद शुरू हुई कार्रवाई
लखीसराय के डीएम शैलेंद्र कुमार और एसपी प्रेरणा कुमार ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ लोग दूसरे अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा देने की तैयारी कर रहे हैं। सूचना मिलने के बाद पुलिस और प्रशासन की विशेष टीम ने जांच शुरू की।
जांच के दौरान दो संदिग्ध अभ्यर्थियों की जानकारी सामने आई, जिसके बाद प्लस टू हसनपुर परीक्षा केंद्र पर विशेष जांच अभियान चलाया गया। यहां एक परीक्षार्थी का बायोमेट्रिक सत्यापन सफल नहीं हो सका। जब उससे पूछताछ की गई तो उसने स्वीकार किया कि वह किसी अन्य अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने आया था।
इसके बाद पुलिस ने केंद्र के बाहर मौजूद मूल अभ्यर्थी को भी गिरफ्तार कर लिया। इस खुलासे के बाद पूरे मामले की जांच का दायरा बढ़ा दिया गया।
बायोमेट्रिक सत्यापन में मिली बड़ी गड़बड़ी
मामले की जांच आगे बढ़ने पर प्रशासन को बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया में भी गंभीर अनियमितताएं मिलीं। जांच में सामने आया कि कुछ बायोमेट्रिक कर्मियों ने जानबूझकर फर्जी अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिलाने में मदद की थी।
इसके बाद परीक्षा केंद्रों पर तैनात बायोमेट्रिक टीम के सदस्यों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ और तकनीकी जांच के आधार पर कुल 18 बायोमेट्रिक कर्मियों को गिरफ्तार किया गया। यह खुलासा पूरे मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू माना जा रहा है क्योंकि परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था में लगे कर्मियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई।
मेडिकल छात्रा को बनाया गया सॉल्वर
जांच के दौरान केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र से एक संदिग्ध छात्रा को हिरासत में लिया गया। वहीं परीक्षा केंद्र के बाहर से मूल अभ्यर्थी मधु प्रिया को गिरफ्तार किया गया।
पूछताछ में मधु प्रिया ने बताया कि उसकी जगह परीक्षा देने के लिए बीएचयू मेडिकल की छात्रा पूनम कुमारी को बुलाया गया था। पुलिस ने झारखंड के गिरिडीह निवासी पूनम कुमारी को गिरफ्तार कर लिया।
इस खुलासे के बाद जांच एजेंसियों को पूरे नेटवर्क की जानकारी मिलने लगी और धीरे-धीरे एक बड़े संगठित गिरोह की परतें खुलती चली गईं।
तीन परीक्षा केंद्रों से 9 सॉल्वर गिरफ्तार
पुलिस जांच में सामने आया कि तीन अलग-अलग परीक्षा केंद्रों पर फर्जी अभ्यर्थियों को बैठाने की योजना बनाई गई थी। कार्रवाई के दौरान केंद्रीय विद्यालय परीक्षा केंद्र से सात सॉल्वर स्कॉलर गिरफ्तार किए गए।
इसके अलावा हसनपुर हाई स्कूल परीक्षा केंद्र से पकड़े गए आरोपी की निशानदेही पर एक अन्य परीक्षा केंद्र से भी एक सॉल्वर को गिरफ्तार किया गया। इस प्रकार कुल नौ सॉल्वर स्कॉलर पुलिस की गिरफ्त में आए।
प्रशासन का कहना है कि इन सभी लोगों को विशेष रूप से परीक्षा देने के लिए तैयार किया गया था और इन्हें असली अभ्यर्थियों की जगह बैठाने के लिए मोटी रकम का भुगतान किया जाना था।
डॉक्टर और मेडिकल छात्रों की संलिप्तता
मामले में गिरफ्तार लोगों में डॉक्टर अर्पित राज का नाम भी शामिल है। पुलिस ने उन्हें परीक्षा केंद्र के बाहर से गिरफ्तार किया। जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ मेडिकल कॉलेजों में पढ़ रहे छात्र इस नेटवर्क का हिस्सा थे।
सूत्रों के अनुसार, मेडिकल क्षेत्र से जुड़े कुछ लोगों का इस्तेमाल इसलिए किया जा रहा था क्योंकि उनकी शैक्षणिक क्षमता बेहतर थी और वे प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छे अंक ला सकते थे।
जांच में यह भी पता चला है कि अर्पित राज से वर्ष 2024 के चर्चित NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी पहले भी पूछताछ कर चुकी थी। हालांकि इस मामले में उनकी भूमिका को लेकर विस्तृत जांच जारी है।
लाखों रुपये में होता था सौदा
प्रारंभिक जांच में यह खुलासा हुआ है कि सॉल्वर गैंग का पूरा नेटवर्क आर्थिक लाभ के लिए संचालित हो रहा था। अभ्यर्थियों और उनके परिवारों से लाखों रुपये लेकर परीक्षा में सफलता दिलाने का वादा किया जाता था।
सौदा तय होने के बाद सॉल्वर स्कॉलर को पहले से कुछ राशि एडवांस दी जाती थी। शेष रकम परीक्षा परिणाम आने और अभ्यर्थी के सफल होने के बाद दी जाती थी।
गिरोह के सदस्य फर्जी अभ्यर्थियों की पहचान छिपाने, बायोमेट्रिक सत्यापन को प्रभावित करने और परीक्षा केंद्र तक सुरक्षित पहुंचाने की पूरी व्यवस्था करते थे। यही कारण है कि इस नेटवर्क में बायोमेट्रिक कर्मियों की भूमिका भी सामने आई है।
कई आरोपियों की गिरफ्तारी, जांच जारी
पुलिस ने इस मामले में अर्पित राज, पूनम कुमारी, मधु प्रिया, संजीत कुमार, मयंक कश्यप, सौरभ झा, अमन अग्रवाल सहित कई अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
इसके अलावा प्लस टू हसनपुर परीक्षा केंद्र से मंतोष कुमार, संजीत कुमार और रंजीत कुमार को गिरफ्तार किया गया। वहीं बायोमेट्रिक टीम से जुड़े कृष्णा कुमार, अंकित कुमार, मुकुंद कुमार, उदय कुमार, बदल कुमार और अखिलेश कुमार सहित कई कर्मियों को भी गिरफ्तार किया गया है।
केआरके प्लस टू परीक्षा केंद्र से विवेक कुमार, अर्पित सिंह, रमेश कुमार, अंकित कुमार, विशाल कुमार, मोहित कुमार, सुदर्शन कुमार और प्रभात अमन को गिरफ्तार किया गया है।
पूरे नेटवर्क की जांच में जुटी पुलिस
एसपी प्रेरणा कुमार ने बताया कि मामले में अब तक 30 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की जा चुकी है। पुलिस पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है और फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है।
प्रशासन का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस गिरोह का संबंध अन्य राज्यों में सक्रिय परीक्षा माफिया नेटवर्क से तो नहीं है।
NEET जैसी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में इस तरह के संगठित फर्जीवाड़े का सामने आना परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त किया जाएगा।