Jharkhand SBI Scam : धनबाद की बैंक मोड़ शाखा में 1.25 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में बड़ी कार्रवाई, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार हुए फरार आरोपी
Jharkhand SBI Scam : झारखंड के धनबाद स्थित एसबीआई बैंक मोड़ शाखा में हुए 1.25 करोड़ रुपये के चर्चित घोटाले में सीबीआई को बड़ी सफलता मिली है। लगभग 20 वर्षों से फरार चल रहे दो आरोपियों को महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ से गिरफ्तार किया गया है। दोनों आरोपी वर्ष 2005 से कानून की नजरों से बचते रहे थे। सीबीआई अब मामले की आगे की जांच और कानूनी कार्रवाई में जुट गई है।
झारखंड के धनबाद जिले में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) की बैंक मोड़ मुख्य शाखा में हुए 1.25 करोड़ रुपये के बहुचर्चित घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बड़ी सफलता हासिल की है। करीब दो दशकों से फरार चल रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस कार्रवाई को सीबीआई की लंबे समय से चल रही जांच और निगरानी का महत्वपूर्ण परिणाम माना जा रहा है।
सीबीआई अधिकारियों के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बृजभूषण प्रसाद और करतार सिंह के रूप में हुई है। बृजभूषण प्रसाद को महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के कोपरगांव से गिरफ्तार किया गया, जबकि करतार सिंह को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से पकड़ा गया। दोनों आरोपी वर्ष 2005 से फरार थे और लगातार अपनी पहचान बदलकर कानून से बचने का प्रयास कर रहे थे।
क्या था 1.25 करोड़ रुपये का SBI घोटाला?
जानकारी के मुताबिक धनबाद स्थित एसबीआई की बैंक मोड़ शाखा में नवंबर 2002 से जून 2005 के बीच लगभग 1.25 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी और गबन का मामला सामने आया था। यह उस समय बैंकिंग क्षेत्र के चर्चित वित्तीय घोटालों में शामिल था।
मामले में बैंकिंग प्रक्रियाओं का दुरुपयोग करते हुए बड़ी राशि का गबन किए जाने का आरोप लगाया गया था। घोटाले के उजागर होने के बाद बैंक प्रशासन ने इसकी शिकायत जांच एजेंसियों को दी थी, जिसके बाद सीबीआई ने मामले की जांच अपने हाथ में ली।
31 अगस्त 2005 को दर्ज हुई थी एफआईआर
सीबीआई ने इस मामले में 31 अगस्त 2005 को प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि कई लोगों की मिलीभगत से बैंक को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। हालांकि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, दोनों मुख्य आरोपी फरार हो गए और लंबे समय तक उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया।
नेपाल भाग गए थे आरोपी
सीबीआई सूत्रों के अनुसार जांच का दबाव बढ़ने पर दोनों आरोपी भारत छोड़कर नेपाल चले गए थे। वहां उन्होंने कई वर्षों तक छिपकर समय बिताया। बाद में वे अलग-अलग राज्यों में लौट आए और नई पहचान के साथ रहने लगे।
जांच एजेंसी का कहना है कि आरोपियों ने अपनी वास्तविक पहचान छिपाने के लिए कई तरीके अपनाए, जिससे उन्हें पकड़ना चुनौतीपूर्ण बन गया। इसके बावजूद सीबीआई लगातार उनकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी।
अदालत ने घोषित किया था अपराधी
मामले में दोनों आरोपियों को अदालत द्वारा पहले ही घोषित अपराधी (Proclaimed Offender) घोषित किया जा चुका था। उनकी गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया था।
इसके अलावा दोनों आरोपियों की सूचना देने वालों के लिए नकद इनाम की भी घोषणा की गई थी। बावजूद इसके वे लगभग 20 वर्षों तक जांच एजेंसियों की गिरफ्त से दूर रहे।
तकनीकी निगरानी और मानव स्रोतों से मिली सफलता
सीबीआई एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) धनबाद की टीम पिछले कई महीनों से दोनों आरोपियों की तलाश में जुटी हुई थी। एजेंसी ने मानव स्रोतों (Human Intelligence) और तकनीकी निगरानी (Technical Surveillance) का व्यापक उपयोग किया।
सूत्रों के मुताबिक आरोपियों की गतिविधियों और ठिकानों की जानकारी जुटाने के लिए आधुनिक तकनीक के साथ-साथ स्थानीय नेटवर्क का भी सहारा लिया गया। इसी दौरान दोनों के संभावित ठिकानों की जानकारी मिली और समन्वित अभियान चलाकर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में चला संयुक्त अभियान
सीबीआई ने महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ में अलग-अलग टीमों को तैनात किया था। कई दिनों तक निगरानी रखने के बाद कार्रवाई को अंजाम दिया गया।
महाराष्ट्र के कोपरगांव से बृजभूषण प्रसाद की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई टीम ने रायपुर में भी कार्रवाई की और करतार सिंह को गिरफ्तार कर लिया। दोनों गिरफ्तारियों को एजेंसी की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
अदालत में पेशी के बाद न्यायिक हिरासत
गिरफ्तारी के बाद एक आरोपी को धनबाद की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। वहीं दूसरे आरोपी को भी धनबाद लाया जा रहा है।
कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे भी अदालत में पेश किया जाएगा। माना जा रहा है कि अदालत उसे भी न्यायिक हिरासत में भेज सकती है।
अब आगे क्या करेगी सीबीआई?
सीबीआई अब मामले के शेष पहलुओं की जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि फरारी के दौरान आरोपियों को किस-किस ने सहयोग दिया और क्या इस मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने वर्षों बाद हुई गिरफ्तारी से मामले में नए तथ्य सामने आ सकते हैं। इससे न केवल घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आने की उम्मीद है बल्कि बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़े पुराने मामलों की जांच को भी नई दिशा मिल सकती है।
धनबाद के एसबीआई बैंक मोड़ शाखा घोटाले में लगभग 20 वर्षों बाद हुई यह गिरफ्तारी सीबीआई के लिए बड़ी सफलता मानी जा रही है। लंबे समय तक फरार रहने के बावजूद कानून के शिकंजे से बच न पाने वाले इन आरोपियों की गिरफ्तारी यह संदेश देती है कि आर्थिक अपराधों में शामिल लोगों पर जांच एजेंसियां लगातार नजर रखती हैं। अब पूरे मामले की आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।