Himanshu Singh Murder Case : गिरिडीह में मीडिया से बातचीत के दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने जमशेदपुर की घटना को कानून-व्यवस्था की बड़ी विफलता बताया। पुलिस की मौजूदगी में हत्या होने पर सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए।
Himanshu Singh Murder Case : जमशेदपुर घटना पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधा। गिरिडीह में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए घटना की नैतिक जिम्मेदारी सरकार की बताई।
झारखंड के जमशेदपुर में हुई चर्चित हत्या की घटना को लेकर प्रदेश की राजनीति तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने इस मामले में राज्य सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कानून-व्यवस्था को पूरी तरह विफल बताया है। गिरिडीह स्थित अपने आवास पर मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि जिस राज्य में पुलिस की मौजूदगी में किसी व्यक्ति की हत्या हो जाए, वहां की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि यह घटना केवल एक आपराधिक वारदात नहीं है, बल्कि राज्य की सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरी को भी उजागर करती है। उनका कहना था कि यदि पुलिस के सामने अपराधी इस तरह की घटना को अंजाम देकर आसानी से फरार हो जाते हैं तो इससे आम लोगों का कानून पर भरोसा कमजोर होता है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं सरकार की प्रशासनिक विफलता को दर्शाती हैं।
कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरा
मीडिया से बातचीत के दौरान बाबूलाल मरांडी ने कहा कि झारखंड में लगातार आपराधिक घटनाएं सामने आ रही हैं। हत्या, लूट, रंगदारी और अन्य गंभीर अपराधों में वृद्धि को लेकर उन्होंने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि आम नागरिकों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है और सरकार अपराध पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में असफल साबित हो रही है।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वे पुलिस की मौजूदगी में भी वारदात करने से नहीं डर रहे हैं। ऐसी स्थिति लोकतांत्रिक व्यवस्था और कानून के शासन के लिए चिंताजनक है।
मुख्यमंत्री से मांगा जवाब
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जमशेदपुर की घटना की नैतिक जिम्मेदारी राज्य सरकार की है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस मामले पर स्पष्ट जवाब देने की मांग करते हुए कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि आखिर अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है।
उन्होंने कहा कि सरकार को केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई करने के बजाय अपराध रोकने के लिए मजबूत रणनीति बनानी चाहिए। यदि कानून-व्यवस्था मजबूत होती तो ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता था।
पुलिस व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी केवल घटना के बाद जांच करना नहीं, बल्कि अपराध होने से पहले उसे रोकना भी है। उन्होंने कहा कि यदि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय रहती तो पुलिस की मौजूदगी में हत्या जैसी घटना नहीं होती।
मरांडी ने कहा कि पुलिस और प्रशासन को अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी अपराधी कानून को चुनौती देने की हिम्मत न कर सके।
जनता में बढ़ रही असुरक्षा की भावना
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि लगातार बढ़ती आपराधिक घटनाओं के कारण राज्य के लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि व्यापारियों, युवाओं, महिलाओं और आम नागरिकों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंता का माहौल है। ऐसी स्थिति में सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि यदि कानून का भय समाप्त हो जाएगा तो अपराधियों का मनोबल और बढ़ेगा, जिसका सीधा असर समाज और विकास दोनों पर पड़ेगा।
निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई की मांग
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार से मांग की कि जमशेदपुर की घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि दोषियों की जल्द पहचान कर उनके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को केवल बयान देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपराध नियंत्रण के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाने होंगे। राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।
राजनीतिक सरगर्मी तेज
जमशेदपुर की घटना के बाद राज्य की राजनीति भी गर्मा गई है। विपक्ष लगातार सरकार की कानून-व्यवस्था को लेकर सवाल उठा रहा है, जबकि सत्तापक्ष की ओर से भी मामले की जांच और कार्रवाई की बात कही जा रही है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज होने की संभावना है।
फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसियां घटना की तह तक कब पहुंचती हैं और दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है। साथ ही विपक्ष द्वारा उठाए गए कानून-व्यवस्था के सवालों पर राज्य सरकार किस प्रकार जवाब देती है, यह भी राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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