Jharkhand News : विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति सहित बार काउंसिल, शिक्षाविदों, अधिवक्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ उद्घाटन समारोह, गुणवत्तापूर्ण विधि शिक्षा और नई शिक्षा नीति पर रहा विशेष जोर।
Jharkhand News : झारखंड विधि महाविद्यालय, कोडरमा में नव-निर्मित भव्य प्रवेश द्वार एवं सीमा द्वार का उद्घाटन विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने किया। समारोह में राज्यभर के शिक्षाविदों, अधिवक्ताओं और गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया तथा विद्यार्थियों को उत्कृष्ट विधि शिक्षा, संविधान और न्याय व्यवस्था के प्रति समर्पित रहने का संदेश दिया।
कोडरमा: झारखंड विधि महाविद्यालय, कोडरमा में नव-निर्मित भव्य प्रवेश द्वार एवं सीमा द्वार का उद्घाटन अत्यंत गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर शिक्षा, न्याय और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की उपस्थिति ने समारोह को ऐतिहासिक बना दिया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्र भूषण शर्मा रहे, जिन्होंने प्रवेश द्वार एवं सीमा द्वार का उद्घाटन कर महाविद्यालय की प्रगति की सराहना की।
समारोह में झारखंड स्टेट बार काउंसिल के वाइस चेयरमैन राजेश शुक्ला, नगर परिषद कोडरमा के अध्यक्ष रमेश हर्षधर कुमार, महाविद्यालय के बॉडी गवर्नर डॉ. मनीष, कला देवी, मीना मिश्रा, प्रियंका, स्वाती मिश्रा, अर्णव पांडे, यशराज, पंकज मिश्रा, कोडरमा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश सलूजा, चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के विधि विभागाध्यक्ष प्रो. अजय कुमार, पटना विश्वविद्यालय के सलीम जावेद, सेंट्रल यूनिवर्सिटी के पवन कुमार मिश्रा, सादिक रजाक, रंजीत कुमार, विद्यानंद पांडे, सेवानिवृत्त प्राचार्य, कार्यकारी अध्यक्ष गणेश प्रसाद, श्याम सुंदर सिंघानिया सहित बड़ी संख्या में शिक्षाविद, अधिवक्ता, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
दीप प्रज्वलन से हुआ कार्यक्रम का शुभारंभ
समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्वलित कर किया गया। इसके बाद अतिथियों ने नव-निर्मित प्रवेश द्वार एवं सीमा द्वार का उद्घाटन किया और महाविद्यालय परिसर का भ्रमण किया। भ्रमण के दौरान उन्होंने विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न शैक्षणिक, विधिक जागरूकता एवं नवाचार आधारित स्टॉलों का अवलोकन किया। अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा, रचनात्मकता और उनके प्रयासों की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
डॉ. डी.एन. मिश्रा ने रखा महाविद्यालय का विजन
कार्यक्रम के स्वागत भाषण में महाविद्यालय के सचिव डॉ. डी.एन. मिश्रा ने सभी अतिथियों का अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि संस्थान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि उन्हें गुणवत्तापूर्ण, व्यवहारिक एवं रोजगारोन्मुख विधि शिक्षा उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालय चाहता है कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले विद्यार्थी न्यायिक सेवा, अधिवक्ता, विधि अनुसंधान और अन्य कानूनी क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिले और राज्य का नाम रोशन करें। उन्होंने इसे महाविद्यालय के इतिहास का महत्वपूर्ण दिन बताते हुए कहा कि इतने प्रतिष्ठित अतिथियों की उपस्थिति विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और मनोबल को नई ऊर्जा प्रदान करेगी।
नई शिक्षा नीति पर कुलपति ने रखा अपना दृष्टिकोण
मुख्य अतिथि प्रो. चंद्र भूषण शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड विधि महाविद्यालय, कोडरमा में आकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि परिसर का भ्रमण करने और विद्यार्थियों की गतिविधियों को देखने के बाद उन्हें यह महसूस हुआ कि महाविद्यालय गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) का उद्देश्य केवल डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को ज्ञान, कौशल, नैतिक मूल्यों और व्यावहारिक शिक्षा से जोड़ना है। शिक्षा व्यवस्था में किए गए सुधारों का सकारात्मक प्रभाव झारखंड विधि महाविद्यालय में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
कुलपति ने कहा कि वर्तमान समय में विधि शिक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। समाज में न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए योग्य, ईमानदार और संवेदनशील विधि विशेषज्ञों की आवश्यकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से संविधान, कानून और न्याय व्यवस्था का गंभीर अध्ययन करने तथा समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों को न्याय दिलाने के लिए समर्पित रहने का आह्वान किया।
उन्होंने यह भी कहा कि व्यस्त कार्यक्रम के बावजूद वे महाविद्यालय के आमंत्रण को अस्वीकार नहीं कर सके और भविष्य में अधिक समय निकालकर विद्यार्थियों के साथ विस्तृत संवाद करने का प्रयास करेंगे।
विधि शिक्षा लोकतंत्र की मजबूत नींव : राजेश शुक्ला
झारखंड स्टेट बार काउंसिल के वाइस चेयरमैन राजेश शुक्ला ने कहा कि विधि शिक्षा किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूत नींव होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से अनुशासन, ईमानदारी और कठिन परिश्रम के साथ अध्ययन करने का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाले समय में विधि के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं और योग्य विद्यार्थियों के लिए अवसरों की कोई कमी नहीं है।
महाविद्यालय के विकास में हरसंभव सहयोग का आश्वासन
नगर परिषद अध्यक्ष रमेश हर्षधर कुमार ने महाविद्यालय परिवार को नवीन प्रवेश द्वार एवं सीमा द्वार के निर्माण के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि बेहतर शैक्षणिक वातावरण विद्यार्थियों के सर्वांगीण व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने महाविद्यालय के विकास कार्यों में नगर परिषद की ओर से हरसंभव सहयोग देने का आश्वासन भी दिया।
कानून समाज सेवा का प्रभावी माध्यम : जगदीश सलूजा
कोडरमा बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश सलूजा ने कहा कि कानून की पढ़ाई केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना का प्रभावी साधन है। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने ज्ञान का उपयोग समाजहित और न्याय की स्थापना के लिए करें।
तकनीक और शोध को अपनाने की सलाह
चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के विधि विभागाध्यक्ष प्रो. अजय कुमार ने कहा कि आधुनिक समय में विधि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रह गई है। शोध, तकनीक और व्यवहारिक प्रशिक्षण को अपनाकर ही विद्यार्थी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को समय के साथ स्वयं को निरंतर अपडेट रखने की सलाह दी।
बड़ी संख्या में पहुंचे विद्यार्थी, अभिभावक और अधिवक्ता
समारोह में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं, शिक्षकों, विद्यार्थियों, अभिभावकों और गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. विकास राय, अजय भट्टाचार्य, नीतू कुमारी, डॉ. सुरेंद्र पांडे, अनिकेत मिश्रा, आत्मानंद पांडे, नीरज, प्रमोद सिंह, सीता देवी, सुप्रिया सिंह, नीलम कंडोला, माला सिन्हा, नूपुर वर्मा, सुप्रभा लूंगा, अजय पांडे, धर्मेंद्र पांडेय, प्रो. राघवेंद्र दत्त, गोपाल प्रसाद यादव, राजेंद्र प्रसाद, अधिवक्ता बबलू गुप्ता, महेश यादव, अजय यादव, झारखंड टीचर ट्रेनिंग कॉलेज के प्राचार्य रामबालक पांडे, दिनकर मिश्रा, धनेश्वर महतो सहित अनेक शिक्षाविद और अधिवक्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का सफल संचालन महजबी परवीन एवं डॉ. अजय कुमार ने किया, जबकि अंत में डॉ. मनीष एवं पंकज मिश्रा ने सभी अतिथियों और उपस्थितजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।
समारोह के समापन पर सभी अतिथियों ने झारखंड विधि महाविद्यालय, कोडरमा की निरंतर प्रगति की सराहना करते हुए इसे क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण विधि शिक्षा का उभरता हुआ केंद्र बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि संस्थान भविष्य में न्यायिक सेवा, अधिवक्ता और विधि अनुसंधान के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रतिभाओं का निर्माण करेगा तथा राज्य में विधि शिक्षा को नई दिशा प्रदान करेगा।

