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Jharkhand News : ऑपरेशन ‘दौरा पहाड़’ में झारखंड पुलिस की बड़ी सफलता, 2 करोड़ 20 लाख के इनामी माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा गिरफ्तार

Megha Sinha

Jharkhand News : धनबाद के बरवड्डा जंगल में संयुक्त सुरक्षा बलों की कार्रवाई, AK-47 राइफलें, मैगजीन और 288 गोलियां बरामद; झारखंड में माओवादी नेटवर्क को बड़ा झटका।

Jharkhand News : ऑपरेशन ‘दौरा पहाड़’ के तहत झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने 2 करोड़ 20 लाख के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा उर्फ सागर को गिरफ्तार किया। जानिए पूरी कार्रवाई, बरामद हथियार, आत्मसमर्पण अभियान और माओवाद के खिलाफ बड़ी सफलता की पूरी रिपोर्ट।

झारखंड में माओवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सुरक्षा बलों को अब तक की सबसे बड़ी सफलताओं में से एक हाथ लगी है। संयुक्त सुरक्षा बलों द्वारा संचालित ‘ऑपरेशन दौरा पहाड़’ के तहत भाकपा (माओवादी) के एकमात्र सक्रिय पोलित ब्यूरो सदस्य और 2 करोड़ 20 लाख रुपये के इनामी माओवादी नेता मिसिर बेसरा उर्फ सागर उर्फ भास्कर उर्फ सुर्निमल को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह गिरफ्तारी धनबाद जिले के बरवड्डा थाना क्षेत्र के जंगलों से की गई, जहां वह अपने शीर्ष कमांडरों के साथ छिपा हुआ था।

झारखंड पुलिस ने इसे राज्य में माओवादी संगठन की कमर तोड़ने वाली निर्णायक कार्रवाई बताया है। पुलिस का कहना है कि इस गिरफ्तारी से राज्य में सक्रिय भाकपा (माओवादी) का शीर्ष नेतृत्व लगभग समाप्त हो चुका है।

Jharkhand News : ऑपरेशन 'दौरा पहाड़' में झारखंड पुलिस की बड़ी सफलता, 2 करोड़ 20 लाख के इनामी माओवादी पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा गिरफ्तार 1

महानिदेशक के नेतृत्व में लगातार चल रहे अभियान का बड़ा परिणाम

महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक, झारखंड के नेतृत्व में झारखंड पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों द्वारा लंबे समय से माओवादियों के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के दौरान लगातार आत्मसमर्पण, गिरफ्तारी और हथियारों की बरामदगी जैसी महत्वपूर्ण सफलताएं सामने आई हैं।

पुलिस मुख्यालय के अनुसार, 21 मई 2026 को झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर भाकपा (माओवादी) के 27 नक्सली कमांडरों एवं दस्ता सदस्यों ने पुलिस महानिदेशक के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। इनमें 7 सब-जोनल कमांडर (SZCM), 7 एरिया कमांडर (ACM) और 13 दस्ता सदस्य शामिल थे। आत्मसमर्पण के दौरान 18 हथियार और 2,987 गोलियां भी जमा कराई गई थीं।

इसके बाद 13 जुलाई 2026 को 20 लाख रुपये के इनामी रविंद्र गंझु (RCM) की गिरफ्तारी हुई, जबकि 17 जुलाई 2026 को 25 लाख रुपये के इनामी अजय महतो उर्फ टाइगर (SAC) को गिरफ्तार किया गया। इसी दौरान बबिता उर्फ अनिता किरकू (ACM) ने भी आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया।

28 जुलाई को फिर हुआ 16 नक्सलियों का आत्मसमर्पण

माओवाद के खिलाफ अभियान की सफलता का सिलसिला यहीं नहीं रुका। 28 जुलाई 2026 को पुलिस मुख्यालय में 16 नक्सली कमांडरों और दस्ता सदस्यों ने आत्मसमर्पण किया। इनमें 1 रीजनल कमेटी सदस्य (RCM), 3 जोनल कमांडर (ZCM), 3 सब-जोनल कमांडर (SZCM), 6 एरिया कमांडर (ACM) तथा 3 दस्ता सदस्य शामिल थे।

आत्मसमर्पण के दौरान इन नक्सलियों ने 11 हथियार और 1,562 गोलियां भी सुरक्षा बलों को सौंप दीं। पुलिस का मानना है कि सरकार की पुनर्वास नीति और लगातार बढ़ते दबाव के कारण बड़ी संख्या में नक्सली संगठन छोड़ रहे हैं।

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धनबाद के जंगल में चला ऑपरेशन ‘दौरा पहाड़’

संयुक्त सुरक्षा बलों द्वारा चलाए गए ऑपरेशन ‘दौरा पहाड़’ के तहत धनबाद जिला पुलिस, गिरिडीह जिला पुलिस और 209 कोबरा बटालियन ने संयुक्त कार्रवाई की।

28 जुलाई 2026 को धनबाद जिले के बरवड्डा थाना क्षेत्र के जंगली इलाके में गुप्त सूचना के आधार पर विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता मिसिर बेसरा को गिरफ्तार कर लिया गया।

मिसिर बेसरा झारखंड में 1 करोड़ रुपये तथा उड़ीसा में 1 करोड़ 20 लाख रुपये का इनामी था। इस प्रकार उस पर कुल 2 करोड़ 20 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार वह 175 आपराधिक मामलों में वांछित था और कई वर्षों से माओवादी संगठन के शीर्ष नेतृत्व का हिस्सा बना हुआ था।

इन शीर्ष माओवादी कमांडरों की भी हुई गिरफ्तारी

इस अभियान में मिसिर बेसरा के अलावा संगठन के अन्य महत्वपूर्ण कमांडरों को भी गिरफ्तार किया गया। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—

  • मेहनत उर्फ मोछु उर्फ विभीषण (RCM) – 15 लाख रुपये का इनामी, 137 मामलों में वांछित।
  • गौरव उर्फ बिरेंद्र हांसदा उर्फ सौरभ (ACM) – 8 मामलों में वांछित।
  • इनके अलावा दो अन्य सहयोगियों को भी गिरफ्तार किया गया।

पुलिस का कहना है कि इन गिरफ्तारियों से संगठन की संचालन क्षमता पर गंभीर असर पड़ेगा।

बरामद हुए आधुनिक हथियार और भारी मात्रा में गोलियां

गिरफ्तार माओवादी नेताओं के कब्जे से सुरक्षा बलों ने अत्याधुनिक हथियार और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद भी बरामद किया है।

बरामद सामग्री में शामिल हैं—

  • AK-47 राइफल – 3
  • मैगजीन – 8
  • 288 जिंदा गोलियां

पुलिस के अनुसार, इन हथियारों का उपयोग सुरक्षा बलों पर हमले और अन्य नक्सली गतिविधियों में किया जाना था। बरामदगी से संगठन की सैन्य क्षमता को भी बड़ा झटका लगा है।

झारखंड में माओवादी नेटवर्क को सबसे बड़ा झटका

झारखंड पुलिस का मानना है कि पोलित ब्यूरो स्तर के नेता की गिरफ्तारी केवल एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पूरे संगठन की रणनीतिक और संचालन व्यवस्था पर सीधा प्रहार है। पिछले कुछ महीनों में लगातार आत्मसमर्पण, गिरफ्तारियों और हथियारों की बरामदगी के कारण राज्य में माओवादी संगठन काफी कमजोर हुआ है।

सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि लगातार चल रहे संयुक्त अभियान से जंगलों में सक्रिय माओवादी दस्तों की संख्या तेजी से कम हुई है और कई क्षेत्रों में उनका प्रभाव लगभग समाप्त हो चुका है।

मुख्यधारा में लौटने की अपील

झारखंड पुलिस ने शेष बचे माओवादियों से अपील की है कि वे हिंसा, भय और उगाही का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटें। पुलिस ने कहा कि झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत हथियार छोड़ने वाले उग्रवादियों को पुनर्वास, रोजगार, आर्थिक सहायता तथा सामान्य जीवन जीने का अवसर प्रदान किया जा रहा है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राज्य में शांति, विकास और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए माओवाद के खिलाफ अभियान आगे भी पूरी मजबूती के साथ जारी रहेगा।

ऑपरेशन ‘दौरा पहाड़’ झारखंड में माओवाद के खिलाफ चल रहे अभियान की अब तक की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है। भाकपा (माओवादी) के एकमात्र सक्रिय पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा सहित शीर्ष कमांडरों की गिरफ्तारी, लगातार हो रहे आत्मसमर्पण और भारी मात्रा में हथियारों की बरामदगी इस बात का संकेत है कि राज्य में माओवादी संगठन लगातार कमजोर हो रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में शेष सक्रिय माओवादी भी या तो कानून के शिकंजे में होंगे या सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाकर मुख्यधारा में शामिल होंगे।