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Ranchi Protest : अनशनकारियों की बिगड़ती सेहत, राहुल ICU में भर्ती; धरनास्थल पर 24 घंटे डॉक्टर तैनात करने की उठी मांग

Megha Sinha

Ranchi Protest : रांची में जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षा अनियमितताओं के खिलाफ जारी छात्र आंदोलन के बीच अनशन पर बैठे छात्र राहुल की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया है। छात्रों ने धरनास्थल पर 24 घंटे डॉक्टर और मेडिकल टीम की तैनाती की मांग की है, जबकि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल पहुंचकर इलाज का जायजा लिया।

Ranchi Protest : रांची में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहे छात्र आंदोलन ने अब एक गंभीर मोड़ ले लिया है। कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे छात्रों की लगातार गिरती सेहत चिंता का विषय बन गई है। इसी बीच पलामू निवासी अनशनकारी छात्र राहुल की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उनकी स्थिति को गंभीर देखते हुए आईसीयू (ICU) में शिफ्ट कर दिया। इस घटना के बाद आंदोलनकारी छात्रों में चिंता और बढ़ गई है तथा उन्होंने धरनास्थल पर 24 घंटे चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग तेज कर दी है।

राहुल की तबीयत बिगड़ने की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन सक्रिय हो गया। सदर अस्पताल पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने डॉक्टरों से राहुल की स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी ली और इलाज की पूरी व्यवस्था का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने चिकित्सकों को आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया ताकि छात्र का समुचित उपचार सुनिश्चित किया जा सके।

सूत्रों के अनुसार, झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी भी राहुल का हालचाल जानने के लिए सदर अस्पताल पहुंचने वाले हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि सरकार भी मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था पर नजर बनाए हुए है।

दूसरी ओर, आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि अनशन पर बैठे छात्रों की तबीयत पिछले कई दिनों से लगातार बिगड़ रही है, लेकिन धरनास्थल पर पर्याप्त चिकित्सा व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। छात्रों का आरोप है कि मौके पर नियमित डॉक्टर या मेडिकल टीम की तैनाती नहीं होने के कारण आपातकालीन स्थिति में समय पर इलाज मिलने में कठिनाई हो सकती है।

छात्रों ने प्रशासन से मांग की है कि धरनास्थल पर 24 घंटे डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और आवश्यक चिकित्सा उपकरणों के साथ मेडिकल टीम की तैनाती की जाए। उनका कहना है कि यदि किसी अनशनकारी की तबीयत अचानक बिगड़ती है तो मौके पर ही प्राथमिक उपचार उपलब्ध होना चाहिए, जिससे किसी गंभीर स्थिति को समय रहते नियंत्रित किया जा सके।

आंदोलनकारियों के अनुसार, फिलहाल तीन छात्र आमरण अनशन पर बैठे हुए हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर लगातार निगरानी रखने की आवश्यकता है। छात्रों का कहना है कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन और आमरण अनशन जारी रहेगा। उनका दावा है कि यह आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा के लिए किया जा रहा है।

राहुल के अस्पताल में भर्ती होने के बाद अन्य अनशनकारी छात्रों की स्वास्थ्य जांच भी तेज कर दी गई है। चिकित्सकों द्वारा समय-समय पर उनका ब्लड प्रेशर, शुगर लेवल, पल्स और अन्य आवश्यक स्वास्थ्य परीक्षण किए जा रहे हैं। हालांकि आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि केवल अस्पताल में इलाज की व्यवस्था पर्याप्त नहीं है, बल्कि धरनास्थल पर भी लगातार चिकित्सकीय निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते चिकित्सा व्यवस्था को मजबूत नहीं किया गया तो अन्य अनशनकारियों की तबीयत भी गंभीर रूप से बिगड़ सकती है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी केवल अस्पताल तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि आंदोलन स्थल पर भी पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।

गौरतलब है कि रांची में पिछले कुछ समय से जेपीएससी और जेएसएससी की विभिन्न परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलनकारी छात्रों की मांग है कि परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए, कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। इसके अलावा भविष्य में होने वाली परीक्षाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से आयोजित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

राहुल के आईसीयू में भर्ती होने के बाद आंदोलन ने एक नया मोड़ ले लिया है। अब यह केवल परीक्षा अनियमितताओं का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि अनशन पर बैठे छात्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था भी चर्चा का केंद्र बन गई है। कई सामाजिक संगठनों और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों ने भी अनशनकारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

प्रशासन की ओर से फिलहाल अस्पताल में उपचार की व्यवस्था पर नजर रखी जा रही है, जबकि आंदोलनकारी चाहते हैं कि धरनास्थल पर स्थायी मेडिकल कैंप लगाया जाए। उनका कहना है कि इससे किसी भी आकस्मिक स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी और अनशनकारियों की जान को खतरा नहीं होगा।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सरकार, प्रशासन और आंदोलनकारी छात्रों के बीच संवाद की संभावनाओं पर भी सभी की नजर बनी हुई है। यदि जल्द कोई सकारात्मक पहल नहीं होती है तो आंदोलन और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, राहुल की स्वास्थ्य स्थिति और अन्य अनशनकारियों की सेहत आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

फिलहाल रांची में चल रहा यह आंदोलन प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता के साथ-साथ अनशनकारी छात्रों की सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है। छात्र अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि प्रशासन चिकित्सा सुविधाओं और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास में जुटा है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत तथा प्रशासन की अगली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।