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Koderma News : कोडरमा बैंक लूट की साजिश नाकाम: मुठभेड़ में एक बदमाश घायल, तीन गिरफ्तार, बैंक ऑफ महाराष्ट्र था निशाने पर

Megha Sinha

Koderma News : पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर इंदरवा बस्ती में की छापेमारी, तीन पिस्टल और 15 जिंदा कारतूस बरामद, डिजिटल रेकी कर बैंक लूट की तैयारी कर रहा था गिरोह

Koderma News : कोडरमा में बैंक ऑफ महाराष्ट्र लूट की साजिश पुलिस ने समय रहते नाकाम कर दी। मुठभेड़ में एक आरोपी घायल हुआ जबकि तीन अन्य गिरफ्तार किए गए। पुलिस ने तीन पिस्टल, 15 कारतूस और लूट की योजना से जुड़े अहम सबूत बरामद किए।

Koderma News : झारखंड के कोडरमा में तिलैया पुलिस ने एक बड़ी बैंक लूट की साजिश को वारदात से पहले ही विफल कर दिया। गुप्त सूचना के आधार पर इंदरवा बस्ती में किराए के मकान पर छापेमारी के दौरान पुलिस और अपराधियों के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें एक आरोपी के पैर में गोली लगी। पुलिस ने घायल समेत कुल चार अपराधियों को गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस के अनुसार गिरफ्तार गिरोह कोडरमा बाजार स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र को निशाना बनाकर लूट की तैयारी कर रहा था। आरोपियों के कब्जे से तीन देसी पिस्टल, 15 जिंदा कारतूस, मोबाइल फोन और रेकी से जुड़े अन्य सामान बरामद किए गए हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह Google Maps की मदद से बैंक और उसके आसपास के इलाके की डिजिटल रेकी करता था।

कोडरमा के पुलिस अधीक्षक कुमार शिवाशीष को सूचना मिली थी कि बिहार से आए कुछ संदिग्ध युवक इंदरवा बस्ती में किराए के मकान में रह रहे हैं। सूचना में यह भी बताया गया था कि वे किसी बड़ी बैंक लूट की योजना बना रहे हैं।

सूचना मिलते ही एसपी ने तिलैया थाना प्रभारी विनय कुमार के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी दल का गठन किया। सोमवार देर रात पुलिस टीम ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर संदिग्ध मकान पर दबिश दी।

जैसे ही पुलिस टीम मकान के करीब पहुंची, अंदर मौजूद अपराधियों ने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने पहले आत्मसमर्पण की चेतावनी दी, लेकिन आरोपी भागने की कोशिश करने लगे। जवाबी कार्रवाई में प्रिंस पांडेय उर्फ बाबा के पैर में गोली लगी और वह घायल होकर गिर पड़ा।

इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। वहीं उसके तीन अन्य साथियों को भी मौके से दबोच लिया गया। मुठभेड़ के दौरान तिलैया थाना प्रभारी विनय कुमार के पैर में भी हल्की चोट आई, जिनका प्राथमिक उपचार कराया गया।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने गिरोह के पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए। पुलिस के अनुसार बरामद सामान में शामिल हैं:

  • तीन पिस्टल
  • 15 जिंदा कारतूस
  • कई मोबाइल फोन
  • बैंक रेकी से जुड़े दस्तावेज और अन्य सामग्री

इन बरामदगी से यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी किसी सामान्य चोरी नहीं बल्कि सुनियोजित बैंक डकैती की तैयारी में थे।

पुलिस पूछताछ में पता चला कि चारों आरोपी करीब तीन दिनों से इंदरवा बस्ती में किराए के मकान में ठहरे हुए थे। घायल आरोपी प्रिंस पांडेय ने कथित तौर पर बताया कि वह बिहार के हाजीपुर क्षेत्र से अपने साथियों सन्नी, अतुल और अमन के साथ कोडरमा आया था।

इन तीन दिनों के दौरान गिरोह लगातार बैंक ऑफ महाराष्ट्र और उसके आसपास के इलाके की रेकी कर रहा था। पुलिस का मानना है कि अगले एक या दो दिनों में लूट की घटना को अंजाम दिया जा सकता था।

जांच में गिरोह के काम करने का तरीका भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार गिरोह का कथित सरगना निरंतर सिंह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर बैंकों की पहचान करता था।

Google Maps के जरिए पहले बैंक की लोकेशन, आसपास की सड़कें, गलियां और संभावित भागने के रास्तों का अध्ययन किया जाता था। इसके बाद गिरोह के सदस्य मौके पर जाकर वास्तविक रेकी करते थे। सुरक्षा व्यवस्था, बैंक खुलने और बंद होने का समय तथा पुलिस की गतिविधियों का आकलन करने के बाद पूरी लूट की रणनीति तैयार होती थी।

पुलिस का कहना है कि यह तरीका दर्शाता है कि गिरोह काफी संगठित ढंग से काम कर रहा था।

पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि उन्होंने बैंक ऑफ महाराष्ट्र को इसलिए चुना क्योंकि वहां गोल्ड लोन की सुविधा उपलब्ध है। गिरोह को उम्मीद थी कि बैंक में बड़ी मात्रा में सोना और नकदी मौजूद होगी।

यही कारण था कि बैंक की कई दिनों तक लगातार निगरानी की जा रही थी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने बैंक के भीतर की जानकारी किसी स्थानीय व्यक्ति से हासिल की थी या नहीं।

तिलैया में पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ के बाद पुलिस की जांच अब हजारीबाग के बरही थाना क्षेत्र तक पहुंच गई है। कुछ समय पहले बरही स्थित बैंक ऑफ महाराष्ट्र में हथियारबंद अपराधियों ने बैंक कर्मियों को बंधक बनाकर सोना और नकदी लूटी थी।

कोडरमा पुलिस यह जांच कर रही है कि क्या गिरफ्तार आरोपी उसी नेटवर्क का हिस्सा हैं या फिर दोनों घटनाओं के पीछे अलग-अलग गिरोह सक्रिय हैं। फिलहाल पुलिस ने दोनों मामलों के बीच किसी आधिकारिक संबंध की पुष्टि नहीं की है।

घायल आरोपी प्रिंस पांडेय की पृष्ठभूमि भी जांच का विषय बनी हुई है। पुलिस के अनुसार वह बिहार के सिवान जिले के सराय परौली गांव का निवासी है। उसने फार्मेसी में डिप्लोमा किया है और उसके पिता किसान हैं।

कथित पूछताछ में उसने बताया कि पैसों के लालच में वह निरंतर सिंह के संपर्क में आया और धीरे-धीरे अपराध के नेटवर्क का हिस्सा बन गया। अन्य आरोपियों से उसकी पहचान भी इसी गिरोह के माध्यम से हुई थी।

एसडीपीओ प्रमोद केसरी ने बताया कि चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और घायल आरोपी का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है। अन्य तीन आरोपियों से गहन पूछताछ जारी है।

पुलिस अब इन बिंदुओं पर जांच कर रही है:

  • गिरोह का मुख्य सरगना निरंतर सिंह कहां है?
  • क्या इस नेटवर्क के और सदस्य झारखंड या बिहार में सक्रिय हैं?
  • बरही समेत अन्य बैंक लूट की घटनाओं से इनका संबंध है या नहीं?
  • आरोपियों का पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड क्या रहा है?

कोडरमा पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने एक संभावित बैंक डकैती को होने से पहले ही रोक दिया। इस ऑपरेशन ने यह भी उजागर किया कि अपराधी अब पारंपरिक तरीकों के बजाय डिजिटल प्लेटफॉर्म और Google Maps जैसी तकनीकों का उपयोग कर बैंक लूट की योजना बना रहे हैं।

पुलिस का मानना है कि समय पर मिली गुप्त सूचना और सटीक रणनीति के कारण न केवल बैंक और ग्राहकों की सुरक्षा सुनिश्चित हुई, बल्कि एक संगठित आपराधिक नेटवर्क की कार्यप्रणाली का भी पर्दाफाश हुआ है। आने वाले दिनों में पूछताछ के आधार पर इस गिरोह से जुड़े और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।