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JSSC -JPSC भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती अभियान की ऐतिहासिक जीत, देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में निकली आभार यात्रा

Megha Sinha

JSSC -JPSC : 47 दिनों के छात्र संघर्ष के बाद भर्ती परीक्षाओं पर बड़ी कार्रवाई; रांची में जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक निकली आभार यात्रा

झारखंड में JSSC -JPSC भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती अभियान को बड़ी सफलता मिलने के बाद राजधानी रांची में बुधवार को छात्र नेताओं और अभ्यर्थियों ने ऐतिहासिक आभार यात्रा निकाली। छात्र आंदोलन के प्रमुख नेता देवेंद्र नाथ महतो के नेतृत्व में यह यात्रा जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक निकाली गई, जिसमें हजारों छात्र-छात्राओं और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों ने भाग लिया। अबीर-गुलाल, आतिशबाजी और शहीदों को श्रद्धांजलि के साथ छात्रों ने इसे झारखंड के छात्र आंदोलन की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक जीत बताया।

जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबे समय से चल रहे आंदोलन को निर्णायक सफलता मिलने के बाद रांची का माहौल उत्सव में बदल गया। जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम परिसर से शुरू हुई आभार यात्रा में बड़ी संख्या में छात्र हाथों में तिरंगा और आंदोलन से जुड़े बैनर लेकर शामिल हुए।

यात्रा अल्बर्ट एक्का चौक पहुंचने के बाद शहीद जयपाल सिंह मुंडा और अल्बर्ट एक्का की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया गया। छात्रों ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका संघर्ष भी न्याय, अधिकार और सम्मान की लड़ाई का प्रतीक रहा है।

अबीर-गुलाल उड़ाकर, ढोल-नगाड़ों की थाप पर नाचते हुए और आतिशबाजी कर छात्रों ने अपनी खुशी व्यक्त की। पूरे मार्ग में “भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती हमारा अधिकार” और “छात्र एकता जिंदाबाद” जैसे नारे गूंजते रहे।

आभार यात्रा का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि यह किसी एक संगठन या व्यक्ति की उपलब्धि नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की जीत है जिन्होंने न्यायपूर्ण भर्ती व्यवस्था के लिए लगातार आवाज उठाई।

उन्होंने कहा कि झारखंड के युवाओं ने शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपने अधिकार की लड़ाई लड़ी है। लंबे संघर्ष, सत्याग्रह और भूख हड़ताल के बाद सरकार द्वारा भर्ती परीक्षाओं पर कार्रवाई करना इस आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।

महतो ने आंदोलन में शामिल सभी छात्र-छात्राओं, अभिभावकों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह एक नए झारखंड की शुरुआत है, जहां भर्ती प्रक्रिया पारदर्शी और जवाबदेह बनेगी।

छात्र आंदोलन के दबाव के बाद भर्ती परीक्षाओं को लेकर कुल 45 परीक्षाओं पर कार्रवाई की गई। आंदोलन से जुड़े अभ्यर्थियों के अनुसार यह राज्य की भर्ती प्रणाली में अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई मानी जा रही है।

  • 22 परीक्षाएं रद्द
  • 17 परीक्षाओं की जांच
  • 6 परीक्षाएं स्थगित
  • कुल प्रभावित परीक्षाएं: 45

छात्रों का कहना है कि इन फैसलों से उन लाखों अभ्यर्थियों को उम्मीद मिली है जो लंबे समय से निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की मांग कर रहे थे। उनका मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी होती है तो भविष्य में भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ियों पर रोक लगेगी।

यह सफलता अचानक नहीं मिली। इसके पीछे लगभग डेढ़ महीने से अधिक समय तक चला लगातार छात्र संघर्ष रहा, जिसने पूरे झारखंड का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया।

आंदोलन की समयरेखा

चरणअवधि
संघर्ष की शुरुआत2 जुलाई 2026
जन आंदोलन प्रारंभ5 जुलाई 2026
बापू वाटिका सत्याग्रह25 जुलाई से
जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में सत्याग्रह24 दिन
भूख हड़ताल2 अगस्त से 16 दिन
कुल संघर्ष अवधि47 दिन

2 जुलाई से शुरू हुए इस अभियान ने धीरे-धीरे राज्यव्यापी स्वरूप ले लिया। 5 जुलाई से आंदोलन तेज हुआ और विभिन्न जिलों से छात्र रांची पहुंचने लगे। बाद में बापू वाटिका में सत्याग्रह प्रारंभ किया गया, जिसे प्रशासनिक कारणों से जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में स्थानांतरित किया गया।

यहीं पर लगातार 24 दिनों तक छात्र धरने पर बैठे रहे और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को सरकार के सामने रखते रहे।

आंदोलन का सबसे संवेदनशील चरण 2 अगस्त से शुरू हुई भूख हड़ताल रही। देवेंद्र नाथ महतो सहित कई छात्र-छात्राओं ने लगातार 16 दिनों तक अनशन किया।

भूख हड़ताल के दौरान कई प्रतिभागियों की तबीयत बिगड़ने की खबरें भी सामने आईं, लेकिन आंदोलनकारी अपने संकल्प पर डटे रहे। राज्यभर के अभ्यर्थियों ने सोशल मीडिया और विभिन्न जिलों में समर्थन प्रदर्शन कर आंदोलन को मजबूती दी।

छात्रों का कहना है कि यही वह दौर था जिसने सरकार और प्रशासन का ध्यान गंभीरता से इस मुद्दे की ओर आकर्षित किया।

आभार यात्रा के दौरान छात्रों ने बार-बार इस बात पर जोर दिया कि उनका आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण रहा। धरना, सत्याग्रह, रैली और भूख हड़ताल जैसे संवैधानिक माध्यमों का उपयोग कर उन्होंने अपनी मांगों को सामने रखा।

कई छात्रों ने कहा कि यह आंदोलन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा कि संगठित और शांतिपूर्ण संघर्ष के माध्यम से भी बड़े बदलाव संभव हैं। उनका मानना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता केवल छात्रों का मुद्दा नहीं, बल्कि राज्य के भविष्य से जुड़ा विषय है।

आंदोलन की सफलता के बाद छात्रों ने झारखंड सरकार तथा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के प्रति भी आभार व्यक्त किया। छात्रों ने कहा कि सरकार द्वारा परीक्षाओं पर कार्रवाई करना युवाओं की आवाज सुनने का सकारात्मक संकेत है।

हालांकि आंदोलनकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य केवल परीक्षाएं रद्द कराना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी व्यवस्था बनाना है जिसमें किसी भी अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो।

उन्होंने सरकार से मांग की कि सभी लंबित जांच समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए तथा दोषी अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

जेपीएससी-जेएसएससी भ्रष्टाचार मुक्त भर्ती अभियान की सफलता ने झारखंड के लाखों प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों में नई उम्मीद जगाई है। वर्षों से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता, प्रश्नपत्र लीक, अनियमितता और चयन प्रक्रिया को लेकर उठते रहे सवालों के बीच यह आंदोलन एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरी होती है तथा भर्ती प्रक्रियाओं में तकनीकी और प्रशासनिक सुधार लागू किए जाते हैं, तो राज्य की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली अधिक विश्वसनीय बन सकती है।

रांची में निकली यह आभार यात्रा केवल एक जीत का जश्न नहीं थी, बल्कि उन हजारों युवाओं के धैर्य, एकता और लोकतांत्रिक संघर्ष का प्रतीक बनी, जिन्होंने 47 दिनों तक अपने भविष्य के लिए आवाज बुलंद की। झारखंड के छात्र आंदोलन के इतिहास में यह दिन एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में याद किया जाएगा।