Jharkhand News : हाई कोर्ट से नवनियुक्त अधिकारियों को बड़ी राहत, सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के बाद अंतरिम रोक
Jharkhand News : झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य सरकार द्वारा 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षाओं व नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने नवनियुक्त अधिकारियों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह राहत दी। मामला JPSC और JSSC की 44 भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है।
रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को बड़ा झटका देते हुए 11वीं और 13वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं एवं उनसे हुई नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट के इस फैसले से उन नवनियुक्त अधिकारियों को तत्काल राहत मिली है, जिन्होंने सरकार के निर्णय को न्यायालय में चुनौती दी थी।
यह आदेश झारखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने कई याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान पारित किया। अदालत ने फिलहाल सरकार के रद्दीकरण आदेश के प्रभाव पर रोक लगाते हुए मामले की अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
झारखंड सरकार ने हाल ही में JPSC और JSSC द्वारा आयोजित 44 भर्ती परीक्षाओं की सूची जारी कर उन्हें रद्द करने का निर्णय लिया था। सरकार का कहना था कि इन परीक्षाओं में अनियमितताओं की शिकायतें मिली थीं और टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के माध्यम से आयोजित परीक्षाओं की CID जांच में कई तथ्य सामने आए हैं।
इसी आधार पर सरकार ने 11वीं और 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा सहित कई नियुक्तियों को निरस्त करने का फैसला लिया था। इस निर्णय के बाद प्रभावित अभ्यर्थियों और चयनित अधिकारियों ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
सरकार द्वारा जारी सूची में प्रशासनिक, तकनीकी और चिकित्सा समेत कई महत्वपूर्ण पदों की भर्ती परीक्षाएं शामिल थीं। इनमें प्रमुख रूप से:
- डिप्टी कलेक्टर
- ड्रग इंस्पेक्टर
- असिस्टेंट प्रोफेसर
- डेंटल डॉक्टर
- असिस्टेंट इंजीनियर
- सिविल जज
- एडिशनल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर
- फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर
- सरकारी पॉलिटेक्निक लेक्चरर
- सीनियर साइंटिफिक ऑफिसर
- असिस्टेंट कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट
इन सभी परीक्षाओं को कथित अनियमितताओं के आधार पर रद्द करने की घोषणा की गई थी।
नवनियुक्त अधिकारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा तथा अधिवक्ता अमृतांशु वत्स ने अदालत में दलीलें पेश कीं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बिना व्यक्तिगत सुनवाई और पर्याप्त कानूनी प्रक्रिया अपनाए सरकार ने नियुक्तियां रद्द कर दीं, जिससे हजारों उम्मीदवारों का भविष्य प्रभावित हुआ है।
सुनवाई के बाद अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए सरकार के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने का फैसला सुनाया।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घोषणा की थी कि राज्य सरकार भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कठोर कदम उठा रही है। सरकार ने कहा था कि:
JPSC की परीक्षाओं में लगातार अनियमितताओं की शिकायतें मिली हैं और TDPL से जुड़े मामलों की CID जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की गई है।
सरकार ने TDPL से जुड़ी सभी गतिविधियों को समाप्त करने, उसके माध्यम से आयोजित परीक्षाओं, जारी परिणामों और चयनित उम्मीदवारों को भी निरस्त करने का निर्णय लिया था।
इसके अलावा राज्य मंत्रिमंडल ने JSSC-CGL परीक्षा को भी रद्द करने का फैसला किया था।
भर्ती घोटालों के आरोपों को देखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने वर्ष 2014 से अब तक आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं की व्यापक जांच के आदेश दिए थे। सरकार का उद्देश्य यह पता लगाना है कि किन-किन परीक्षाओं में प्रक्रिया संबंधी गड़बड़ियां हुईं और किस स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाए।
इस जांच में JPSC, JSSC और अन्य भर्ती एजेंसियों की भूमिका की भी समीक्षा की जा रही है।
भर्ती परीक्षाओं में धांधली के आरोपों को लेकर झारखंड में लंबे समय तक छात्र आंदोलन चला था। अभ्यर्थियों ने रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम सहित कई स्थानों पर धरना-प्रदर्शन किया और परीक्षाएं रद्द करने की मांग उठाई थी।
जब सरकार ने उनकी मांग स्वीकार करते हुए 44 परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की थी, तब बड़ी संख्या में अभ्यर्थी भावुक हो गए थे और जयपाल सिंह स्टेडियम में जश्न भी मनाया था। अब हाई कोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद मामला नए कानूनी मोड़ पर पहुंच गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार हाई कोर्ट का यह आदेश अंतिम फैसला नहीं है, बल्कि अंतरिम राहत है। इसका अर्थ है कि सरकार का रद्दीकरण आदेश फिलहाल प्रभावी नहीं रहेगा और नियुक्त अधिकारियों को तत्काल राहत मिलेगी।
हालांकि अंतिम निर्णय विस्तृत सुनवाई के बाद ही होगा। यदि अदालत सरकार के आदेश को सही ठहराती है तो भर्ती प्रक्रिया पर दोबारा असर पड़ सकता है, वहीं यदि याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला आता है तो नियुक्तियां बहाल रह सकती हैं।
अब राज्य सरकार इस मामले में अपना विस्तृत जवाब हाई कोर्ट में दाखिल करेगी। अदालत सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह तय करेगी कि 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय कानूनी रूप से उचित था या नहीं।
फिलहाल हजारों अभ्यर्थियों, नवनियुक्त अधिकारियों और प्रतियोगी छात्रों की नजरें हाई कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं, क्योंकि इसका असर झारखंड की पूरी भर्ती व्यवस्था और भविष्य की नियुक्तियों पर पड़ सकता है।









