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Jharkhand News : झारखंड में रद्द नियुक्तियों पर हाई कोर्ट में सोमवार को सुनवाई, JPSC 14वीं परीक्षा मामले पर सुप्रीम कोर्ट की भी नजर

Megha Sinha

Jharkhand News : राज्य सरकार के 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हाई कोर्ट करेगा संयुक्त सुनवाई, जबकि JPSC 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में होगी अहम सुनवाई।

Jharkhand News : झारखंड में रद्द की गई 22 भर्ती परीक्षाओं और स्थगित नियुक्ति प्रक्रियाओं के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सोमवार को झारखंड हाई कोर्ट में सुनवाई होगी। वहीं JPSC 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा और CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुप्रीम कोर्ट भी विचार करेगा।

झारखंड में सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए सोमवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक ओर झारखंड हाई कोर्ट राज्य सरकार द्वारा विभिन्न विभागों की नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद्द करने के फैसले की वैधता पर सुनवाई करेगा, वहीं दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट में JPSC 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 और CGL परीक्षा में कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग वाली जनहित याचिका पर सुनवाई होगी।

दोनों अदालतों में होने वाली सुनवाई का असर राज्य की भर्ती प्रक्रिया, परीक्षाओं और हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ सकता है।

झारखंड सरकार ने 18 अगस्त को एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी करते हुए विभिन्न विभागों में चल रही भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा का निर्णय लिया था। इस अधिसूचना के तहत:

  • 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द की गईं।
  • 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित कर दी गई।
  • 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया।

सरकार का तर्क था कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और संभावित अनियमितताओं की जांच के लिए यह कदम आवश्यक है। हालांकि इस निर्णय से वे अभ्यर्थी प्रभावित हुए, जिन्होंने लंबे समय से इन परीक्षाओं की तैयारी की थी और जिनकी नियुक्ति प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी।

राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ कई अभ्यर्थियों, प्रतियोगी छात्रों और अन्य प्रार्थियों ने झारखंड हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं।

20 अगस्त को याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत से अनुरोध किया गया था कि मामले की जल्द सुनवाई की जाए, क्योंकि हजारों युवाओं का भविष्य इससे जुड़ा हुआ है।

इसके बाद जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने सभी संबंधित याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध करते हुए सोमवार को संयुक्त सुनवाई की तारीख तय की। इससे उम्मीद की जा रही है कि अदालत भर्ती रद्द करने की प्रक्रिया, सरकार के अधिकार और अभ्यर्थियों के हितों पर विस्तृत विचार करेगी।

सरकार द्वारा जिन विज्ञापनों को रद्द किया गया, उनमें कई ऐसी नियुक्तियां भी शामिल थीं जिनके लिए:

  • आवेदन प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।
  • शुल्क जमा किए जा चुके थे।
  • परीक्षा की तैयारी अंतिम चरण में थी।
  • कुछ मामलों में चयन प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी थी।

यही कारण है कि अभ्यर्थियों का कहना है कि बिना व्यक्तिगत दोष के पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द करना उनके साथ अन्याय है। उनका तर्क है कि यदि कहीं अनियमितता हुई है तो दोषियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, न कि सभी उम्मीदवारों को दंडित किया जाए।

सोमवार को ही देश की सर्वोच्च अदालत में JPSC 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 और CGL परीक्षा से जुड़े कथित अनियमितता मामले पर भी सुनवाई प्रस्तावित है।

यह जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत के माध्यम से दायर की है।

मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ करेगी।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि 19 अप्रैल 2025 को आयोजित JPSC 14वीं प्रारंभिक परीक्षा के संचालन, प्रश्नपत्र प्रबंधन और मूल्यांकन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुईं, जिनकी स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  1. JPSC 14वीं प्रारंभिक परीक्षा को रद्द किया जाए।
  2. नई परीक्षा निष्पक्ष तरीके से आयोजित कराई जाए।
  3. पूरे मामले की CBI से स्वतंत्र एवं समयबद्ध जांच कराई जाए।
  4. परीक्षा संचालन और मूल्यांकन प्रक्रिया की न्यायिक निगरानी में जांच हो।

याचिकाकर्ता का दावा है कि परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराना आवश्यक है, जिससे योग्य अभ्यर्थियों का विश्वास बहाल हो सके।

यह मामला केवल भर्ती रद्द होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक निर्णय और अभ्यर्थियों के संवैधानिक अधिकारों के बीच संतुलन का भी प्रश्न बन गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत निम्न बिंदुओं पर विचार कर सकती है:

  • क्या सरकार बिना नियुक्ति पूरी हुए विज्ञापन रद्द कर सकती है?
  • क्या सभी परीक्षाओं को एक समान आधार पर रद्द करना उचित था?
  • जिन परीक्षाओं में अनियमितता सिद्ध नहीं हुई, उनका क्या होगा?
  • प्रभावित अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा कैसे की जाएगी?

इन सवालों के जवाब भविष्य की भर्ती नीतियों को भी प्रभावित कर सकते हैं।

झारखंड में पिछले कुछ वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर लगातार विवाद सामने आते रहे हैं। पेपर लीक, परीक्षा स्थगन, परिणामों में देरी और भर्ती प्रक्रियाओं में बदलाव जैसे मुद्दों ने युवाओं के बीच असंतोष बढ़ाया है।

अब हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली समानांतर सुनवाई से अभ्यर्थियों को उम्मीद है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में स्पष्ट मार्गदर्शन मिलेगा।

यदि अदालत किसी अंतरिम राहत या महत्वपूर्ण निर्देश जारी करती है, तो इसका सीधा असर राज्य की लंबित भर्ती प्रक्रियाओं और हजारों उम्मीदवारों के भविष्य पर पड़ सकता है।

सोमवार की सुनवाई झारखंड की भर्ती व्यवस्था के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। एक ओर हाई कोर्ट राज्य सरकार के भर्ती रद्द करने के निर्णय की न्यायिक समीक्षा करेगा, वहीं सुप्रीम कोर्ट JPSC 14वीं परीक्षा में कथित अनियमितताओं की CBI जांच की मांग पर विचार करेगा। दोनों मामलों के परिणाम राज्य के लाखों प्रतियोगी छात्रों और आने वाली भर्ती प्रक्रियाओं के लिए महत्वपूर्ण दिशा तय कर सकते हैं।