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Dhanbad News : झरिया में फिर धंसी जमीन, कई घरों में आईं दरारें; हैवी ब्लास्टिंग से दहशत में परिवार

Megha Sinha

Dhanbad News : बास्ताकोला एरिया में भू-धंसान की घटना से मचा हड़कंप, प्रभावित परिवारों ने सुरक्षित स्थानों की ओर किया पलायन; बीसीसीएल अधिकारियों और धनबाद मेयर ने लिया जायजा

धनबाद के झरिया स्थित बास्ताकोला एरिया में एक बार फिर भू-धंसान की घटना सामने आई है। अचानक जमीन धंसने से कई घरों में दरारें पड़ गईं। स्थानीय लोगों ने आउटसोर्सिंग कंपनी की हैवी ब्लास्टिंग को इसके लिए जिम्मेदार बताया है। घटना के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल है। बीसीसीएल अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और अति प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर बसाने की प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी दी।

धनबाद। कोयलांचल की धरती पर बसे झरिया में भू-धंसान का खतरा एक बार फिर लोगों के लिए चिंता का कारण बन गया है। बीसीसीएल के बास्ताकोला एरिया में अचानक जमीन धंसने की घटना के बाद आसपास रहने वाले परिवारों में अफरा-तफरी मच गई। जमीन धंसने के साथ ही कई घरों में दरारें आने की बात सामने आई है। घरों में अचानक आई दरारों को देखकर लोगों के बीच अनहोनी की आशंका बढ़ गई।

स्थानीय लोगों के अनुसार, इलाके में लंबे समय से कोयला खनन गतिविधियां चल रही हैं। इसी दौरान आउटसोर्सिंग कंपनी द्वारा की जा रही हैवी ब्लास्टिंग को लेकर ग्रामीणों और स्थानीय परिवारों में पहले से ही चिंता बनी हुई थी। लोगों का आरोप है कि ब्लास्टिंग के कारण जमीन में कंपन होता है, जिसका असर आसपास स्थित मकानों पर पड़ रहा है। हालांकि, भू-धंसान के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

घरों में दरारें देख सहमे लोग

भू-धंसान की घटना के बाद प्रभावित घरों में रहने वाले परिवारों के बीच डर का माहौल बन गया। घरों की दीवारों में दरारें दिखाई देने के बाद कई परिवार अपने जरूरी सामान को बाहर निकालते नजर आए। लोगों को आशंका है कि अगर जमीन दोबारा धंसी तो मकानों को भारी नुकसान पहुंच सकता है और जान-माल का खतरा पैदा हो सकता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि खनन क्षेत्र में रहने वाले परिवारों के लिए जमीन का धंसना कोई नई समस्या नहीं है। झरिया और आसपास के इलाकों में लंबे समय से भूमिगत आग, अवैज्ञानिक खनन, जमीन के कमजोर होने और खनन गतिविधियों के कारण सुरक्षा को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में ताजा घटना ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।

बीसीसीएल प्रबंधन के खिलाफ आक्रोश

घटना के बाद स्थानीय लोगों में बीसीसीएल प्रबंधन के खिलाफ नाराजगी देखने को मिली। लोगों का कहना है कि खनन गतिविधियों के कारण यदि उनके घरों की सुरक्षा प्रभावित हो रही है तो प्रबंधन को पहले से सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करने चाहिए। प्रभावित परिवारों ने प्रशासन और बीसीसीएल से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।

लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि घरों में आई दरारें कहीं किसी बड़े हादसे का संकेत तो नहीं हैं। प्रभावित परिवारों का कहना है कि वे अपने बच्चों और अन्य सदस्यों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। कई लोग फिलहाल अपने घरों में रहने से भी डर रहे हैं।

मौके पर पहुंचे अधिकारी और धनबाद मेयर

घटना की जानकारी मिलने के बाद बीसीसीएल के अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने स्थिति का जायजा लेते हुए स्थानीय लोगों से भी जानकारी ली। धनबाद के मेयर भी मौके पर पहुंचे और प्रभावित इलाके की स्थिति को देखा।

अधिकारियों के स्तर से प्रभावित परिवारों की सुरक्षा को लेकर आवश्यक कदम उठाने की बात कही गई है। बताया जा रहा है कि अति प्रभावित परिवारों को दूसरे स्थान पर बसाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। हालांकि, पुनर्वास की प्रक्रिया कब तक पूरी होगी और प्रभावित परिवारों को किस स्थान पर बसाया जाएगा, इसे लेकर विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

पुनर्वास पर टिकी प्रभावित परिवारों की उम्मीद

भू-धंसान और खनन प्रभावित क्षेत्रों में सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षित पुनर्वास की होती है। स्थानीय लोगों की मांग है कि केवल अस्थायी राहत देने के बजाय प्रभावित परिवारों के लिए स्थायी और सुरक्षित आवास की व्यवस्था की जाए। लोगों का कहना है कि जब तक वे सुरक्षित स्थान पर नहीं पहुंचते, तब तक उनके मन से हादसे का डर खत्म नहीं होगा।

प्रभावित परिवारों का यह भी कहना है कि यदि मकानों में संरचनात्मक नुकसान हो चुका है तो उनकी स्थिति का तकनीकी मूल्यांकन कराया जाना चाहिए। विशेषज्ञों द्वारा जांच के बाद यह तय किया जाना जरूरी है कि कौन से मकान रहने योग्य हैं और किन मकानों को तत्काल खाली कराया जाना चाहिए।

हैवी ब्लास्टिंग पर उठे सवाल

इस घटना के बाद आउटसोर्सिंग कंपनी की हैवी ब्लास्टिंग को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ब्लास्टिंग की तीव्रता और उसके प्रभाव का असर आसपास के मकानों पर पड़ रहा है। लोगों की मांग है कि संबंधित एजेंसियां ब्लास्टिंग की प्रक्रिया, सुरक्षा मानकों और प्रभावित मकानों की स्थिति की जांच करें।

यदि जांच में ब्लास्टिंग और मकानों को हुए नुकसान के बीच कोई संबंध सामने आता है, तो जिम्मेदारी तय करने और प्रभावित परिवारों को उचित राहत देने की जरूरत होगी। वहीं, यदि भू-धंसान का कारण कोई अन्य तकनीकी या भूगर्भीय वजह सामने आती है, तब भी प्रशासन और बीसीसीएल को प्रभावित क्षेत्र की सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे।

झरिया में सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल

झरिया का इलाका लंबे समय से कोयला खनन और उससे जुड़ी चुनौतियों के कारण संवेदनशील माना जाता है। ऐसे क्षेत्रों में जमीन की स्थिरता, मकानों की स्थिति और खनन गतिविधियों के बीच सुरक्षा का संतुलन बेहद महत्वपूर्ण है। ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि संवेदनशील खनन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की सुरक्षा के लिए व्यवस्था कितनी प्रभावी है।

स्थानीय लोगों की उम्मीद अब प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन से है कि घटना को गंभीरता से लिया जाए और प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराया जाए। साथ ही, पूरे इलाके का तकनीकी सर्वे कराकर भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

फिलहाल बास्ताकोला एरिया में भू-धंसान की घटना के बाद लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। प्रभावित परिवार अपने घरों की सुरक्षा और भविष्य को लेकर चिंतित हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और क्षेत्र की सुरक्षा के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।