Jharkhand News : स्वास्थ्य मंत्री Dr. Irfan Ansari ने मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार पर साधा निशाना, उच्चस्तरीय जांच, मुआवजा, स्वच्छ पानी और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग
Jharkhand News : मध्य प्रदेश में मासूम आदिवासी बच्चों की लगातार मौतों को लेकर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री Dr. Irfan Ansari ने चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो वह स्वयं मध्य प्रदेश जाकर स्वास्थ्य व्यवस्था का जायजा लेंगे और बच्चों की मदद के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
Dr. Irfan Ansari ने गंभीर चिंता जताई है। बच्चों की मौत के मुद्दे पर उन्होंने मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े किए हैं। डॉ. अंसारी ने कहा कि किसी भी मासूम की जान बीमारी, गंदे पानी या स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण जाना बेहद पीड़ादायक और शर्मनाक है।
डॉ. इरफान अंसारी ने भावुक अंदाज में कहा कि “बच्चों के आंसू मुझसे देखे नहीं जाते। मासूम आदिवासी बच्चे किसी एक राज्य के नहीं, बल्कि पूरे देश के बच्चे हैं।” उन्होंने कहा कि अगर मध्य प्रदेश सरकार इन बच्चों को उचित इलाज, दवा और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं है, तो वह स्वयं वहां जाने के लिए तैयार हैं।
डॉ. अंसारी ने कहा कि वह डॉक्टर हैं और उनके लिए किसी भी बच्चे की जिंदगी सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो वह स्वयं मध्य प्रदेश जाएंगे और वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था का जायजा लेंगे। साथ ही जरूरतमंद बच्चों और उनके परिवारों की मदद के लिए हर संभव सहयोग करने की कोशिश करेंगे।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं का उद्देश्य राजनीति नहीं, बल्कि लोगों की जान बचाना होना चाहिए। किसी गरीब या आदिवासी परिवार के बच्चे को इलाज, दवा या स्वच्छ पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में अपनी जान गंवानी पड़े, तो यह पूरी व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
स्वास्थ्य मंत्री ने आरोप लगाया कि गंदा पानी, मलेरिया और कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था जैसी समस्याएं आदिवासी इलाकों में लोगों के लिए बड़ी चुनौती बन रही हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का पहला धर्म नागरिकों की जान बचाना और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना है।
डॉ. अंसारी ने कहा कि “बच्चों की मौत कोई आंकड़ा नहीं है। हर मौत के पीछे एक मां का आंसू, एक परिवार का दर्द और एक उजड़ा हुआ भविष्य है।” उन्होंने कहा कि मासूम बच्चों की मौत को केवल आंकड़ों के तौर पर नहीं देखा जा सकता। हर बच्चे के पीछे एक परिवार और उसके सपनों की पूरी दुनिया जुड़ी होती है।
डॉ. इरफान अंसारी ने भाजपा सरकार पर राजनीतिक हमला भी बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा की सरकारें नफरत और लोगों को बांटने की राजनीति में व्यस्त हैं, जबकि गरीब और आदिवासी परिवार अपने बच्चों के लिए अस्पताल, दवा और बेहतर शिक्षा की मांग कर रहे हैं।
उन्होंने सवाल किया कि जब गरीब परिवारों के बच्चे स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में परेशान हैं, तब सरकार की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए? उन्होंने कहा कि सरकार को इस मामले में जवाब देना होगा कि आखिर मासूम बच्चों की मौत के लिए जिम्मेदारी किसकी है।
हालांकि, इन आरोपों पर मध्य प्रदेश सरकार या भाजपा की ओर से कोई पक्ष इस बयान में शामिल नहीं है। ऐसे में मामले पर सरकार का आधिकारिक पक्ष सामने आना भी महत्वपूर्ण होगा।
स्वास्थ्य मंत्री ने आदिवासी समुदाय के अधिकारों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आदिवासियों को उनके घर, जमीन और प्राकृतिक संसाधनों से बेदखल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने जल, जंगल और जमीन पर आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करने की मांग की।
डॉ. अंसारी ने कहा कि बड़े उद्योगपतियों के हितों के लिए गरीब आदिवासी परिवारों को उनके मूल अधिकारों से वंचित करना स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासी बच्चों को शिक्षा और इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं से दूर रखना किसी भी कीमत पर उचित नहीं है।
डॉ. इरफान अंसारी ने मध्य प्रदेश सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मृतक बच्चों के परिवारों को उचित मुआवजा देने के साथ-साथ प्रभावित इलाकों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही।
उन्होंने मलेरिया नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाने और ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को तत्काल मजबूत करने की मांग की। उनका कहना है कि केवल घटना के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए स्थायी स्वास्थ्य व्यवस्था विकसित करना जरूरी है।
डॉ. अंसारी ने चेतावनी दी कि अब चुप बैठने का समय नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि मासूम आदिवासी बच्चों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ जारी रहा, तो इसके खिलाफ लोकतांत्रिक और जनहित का बड़ा आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि गरीब, आदिवासी, दलित, अल्पसंख्यक या किसी भी वर्ग का बच्चा उनके लिए समान है। उन्होंने कहा, “मैं राजनीति से पहले इंसान हूं। जहां किसी मासूम की जान बचाने की जरूरत होगी, वहां डॉ. इरफान अंसारी खड़ा मिलेगा।”
अपने बयान के अंत में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि बच्चों की पीड़ा देखकर वह चुप नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि वह जल्द मध्य प्रदेश जाकर वहां की स्वास्थ्य व्यवस्था का जायजा लेने और जरूरतमंद आदिवासी बच्चों की मदद के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
डॉ. अंसारी ने कहा कि “बच्चे मेरे अपने हैं और उनकी रक्षा मेरी जिम्मेदारी है।” उनका यह बयान अब राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है।
मध्य प्रदेश में आदिवासी बच्चों की मौत का यह मामला स्वास्थ्य व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, मलेरिया नियंत्रण और सरकारी जवाबदेही जैसे गंभीर सवालों को सामने लाता है। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि मध्य प्रदेश सरकार इस पूरे मामले पर क्या कदम उठाती है और प्रभावित परिवारों के लिए राहत एवं स्वास्थ्य सेवाओं को किस तरह मजबूत किया जाता है।









