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Jharkhand News : झारखंड में पेयजल व्यवस्था को मिलेगा तकनीकी सहयोग, IIT (ISM) धनबाद समेत तीन संस्थान बनेंगे ‘नॉलेज पार्टनर’

Jharkhand News : पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने IIT (ISM) धनबाद, निर्मला कॉलेज रांची और रांची विश्वविद्यालय के साथ तकनीकी सहयोग की पहल की; जल गुणवत्ता, पाइपलाइन लीकेज और खनन क्षेत्रों में जल स्रोतों की स्थिरता पर होगा संयुक्त काम।

Jharkhand News : झारखंड के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने राज्य में जलापूर्ति योजनाओं की गुणवत्ता और संचालन एवं रख-रखाव व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए अकादमिक संस्थानों के साथ सहयोग की पहल की है। विभाग जल्द ही IIT (ISM) धनबाद, निर्मला कॉलेज रांची और रांची विश्वविद्यालय के साथ MoU करेगा।

Jharkhand News : झारखंड में लोगों को नियमित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराने के लिए पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ने अकादमिक संस्थानों के साथ तकनीकी सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाया है। विभाग अब विशेषज्ञ शैक्षणिक संस्थानों को ‘नॉलेज पार्टनर’ के रूप में जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इस पहल के तहत जलापूर्ति योजनाओं की तकनीकी समस्याओं, जल गुणवत्ता और पर्यावरणीय चुनौतियों पर विशेषज्ञों की मदद ली जाएगी।

18 सितंबर 2026 को जारी सूचना एवं जनसंपर्क निदेशालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अबु इमरान की अध्यक्षता में शुक्रवार को नेपाल हाउस स्थित कार्यालय में विभागीय संचालन एवं रख-रखाव नीति को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में IIT (ISM) धनबाद, निर्मला कॉलेज रांची और रांची विश्वविद्यालय के प्रख्यात प्रोफेसरों के साथ विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक का प्रमुख उद्देश्य इन तीनों संस्थानों को विभाग के नॉलेज पार्टनर के रूप में जोड़ना था। विभाग के अनुसार, अकादमिक संस्थानों की विशेषज्ञता का उपयोग पेयजल योजनाओं को अधिक प्रभावी और टिकाऊ बनाने में किया जा सकता है।

पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में पाइपलाइन लीकेज एक महत्वपूर्ण चुनौती होती है। बैठक में इस समस्या के तकनीकी समाधान पर भी चर्चा की गई। प्रस्तावित सहयोग के तहत IIT और विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञ पाइपलाइनों में लीकेज का पता लगाने, जलापूर्ति योजनाओं की डिजाइन और संचालन एवं रख-रखाव यानी O&M से जुड़ी तकनीकी समस्याओं पर सलाह देंगे।

इससे जलापूर्ति योजनाओं के संचालन में आने वाली तकनीकी दिक्कतों को वैज्ञानिक तरीके से समझने और उनके समाधान की दिशा में काम करने में मदद मिल सकती है।

झारखंड के कई क्षेत्रों में पानी की गुणवत्ता से जुड़ी समस्याएं भी सामने आती रही हैं। बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों में पानी में आयरन, फ्लोराइड और TDS से संबंधित समस्याओं पर संयुक्त शोध करने की बात कही गई।

इस शोध के माध्यम से अलग-अलग क्षेत्रों में जल गुणवत्ता से जुड़ी चुनौतियों को बेहतर तरीके से समझने और उनके समाधान के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकल्प विकसित करने पर काम किया जाएगा।

बैठक में पर्यावरण और जल स्रोतों की दीर्घकालीन स्थिरता को लेकर भी चर्चा हुई। खासतौर पर धनबाद-झरिया जैसे खनन क्षेत्रों में पर्यावरणीय क्षरण का जल स्रोतों पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन किया जाएगा।

विभाग और अकादमिक संस्थानों के बीच प्रस्तावित सहयोग के तहत जल स्रोतों की Sustainability को लेकर कार्य योजना तैयार करने पर भी काम होगा। इसका उद्देश्य जल संसाधनों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और पेयजल योजनाओं की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक तकनीकी उपायों की पहचान करना है।

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के सचिव अबु इमरान ने कहा कि अकादमिक संस्थानों के जुड़ने से योजनाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा और जनता को नियमित रूप से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। विभाग के अनुसार, IIT (ISM) धनबाद, निर्मला कॉलेज रांची और रांची विश्वविद्यालय के साथ जल्द ही MoU पर हस्ताक्षर किया जाएगा।

यह पहल लागू होने के बाद राज्य की पेयजल योजनाओं में तकनीकी विशेषज्ञता, जल गुणवत्ता अनुसंधान और पर्यावरणीय स्थिरता को एक साथ जोड़ने का प्रयास होगा। हालांकि, इस सहयोग का वास्तविक प्रभाव MoU के बाद तय होने वाली कार्ययोजनाओं और उनके जमीन पर प्रभावी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा।