Giridih News : गिरिडीह के बनियाडीह CCL क्षेत्र में शनिवार रात तेज आवाज और कंपन के बाद जमीन में पड़ी दरारों से मचा हड़कंप, प्रभावित परिवारों में दहशत; स्थानीय लोगों ने अवैध खनन की आशंका जताते हुए जांच और पुनर्वास की मांग की।
Giridih News : गिरिडीह के बनियाडीह CCL क्षेत्र में एक बार फिर भू-धसान की घटना सामने आने से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। शनिवार रात करीब 9 बजे अचानक तेज आवाज के साथ जमीन में कंपन महसूस हुआ और देखते ही देखते कई स्थानों पर दरारें पड़ने लगीं। घटना के बाद कई घर जमीन में समा गए, जबकि सुरक्षा को देखते हुए करीब 11 घरों को खाली करा लिया गया। स्थानीय लोगों ने भू-धसान के पीछे भूमिगत कोयला खनन और कथित अवैध खनन को संभावित कारण बताते हुए जांच की मांग की है।
Giridih News : गिरिडीह के बनियाडीह CCL क्षेत्र में शनिवार रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब करीब 9 बजे अचानक तेज आवाज सुनाई दी। स्थानीय लोगों के अनुसार, आवाज के साथ आसपास के घरों में कंपन महसूस हुआ। शुरुआत में लोगों को कुछ समझ नहीं आया, लेकिन कुछ ही देर बाद जमीन पर दरारें दिखाई देने लगीं। स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और सुरक्षित स्थानों की ओर भागने लगे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि भू-धसान की वजह से क्षेत्र में कई घर प्रभावित हुए हैं। कुछ मकानों के जमीन में समा जाने की बात सामने आई है। घटना के बाद प्रशासन और CCL प्रबंधन की ओर से प्रभावित इलाके की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। एहतियात के तौर पर करीब 11 घरों को खाली करा लिया गया है, ताकि किसी बड़े हादसे की स्थिति में जान-माल का नुकसान कम किया जा सके।
घटना के बाद इलाके में रातभर लोगों के बीच भय का माहौल बना रहा। जिन परिवारों ने अपना घर खाली किया है, उनके सामने रहने और जरूरी सामान को सुरक्षित रखने की चुनौती भी खड़ी हो गई है।
बनियाडीह और आसपास के CCL क्षेत्र में जमीन धंसने की घटनाएं कोई पहली घटना नहीं हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस इलाके में लंबे समय से भूमिगत कोयला खनन के कारण जमीन की स्थिरता को लेकर चिंता बनी हुई है। समय-समय पर जमीन में दरारें और भू-धसान की घटनाएं सामने आती रही हैं।
लोगों का कहना है कि कोयला खनन वाले क्षेत्रों में भूमिगत खाली स्थानों के कारण जमीन के कमजोर होने का खतरा बना रहता है। ऐसे में आबादी वाले इलाके में अगर जमीन धंसती है तो इसका सीधा असर वहां रहने वाले परिवारों पर पड़ता है।
स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया है कि क्षेत्र में अवैध खनन की गतिविधियां भी जमीन की स्थिति को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि, भू-धसान की मौजूदा घटना के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। इसलिए प्रभावित क्षेत्र का तकनीकी सर्वेक्षण और जमीन के नीचे की स्थिति की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग उठ रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, प्रभावित इलाके के कुछ परिवारों को CCL प्रबंधन की ओर से पहले ही घर खाली करने का नोटिस दिया गया था। इसके बावजूद कई परिवार लंबे समय से उसी इलाके में रहने को मजबूर थे।
अब ताजा भू-धसान के बाद एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि जोखिम वाले इलाकों में रह रहे परिवारों की सुरक्षा के लिए स्थायी व्यवस्था कब होगी। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल नोटिस जारी करना पर्याप्त नहीं है। यदि किसी इलाके को असुरक्षित माना गया है, तो वहां रहने वाले परिवारों के लिए सुरक्षित आवास, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था भी जरूरी है।
प्रभावित परिवारों की मांग है कि उन्हें सुरक्षित स्थान पर बसाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि भविष्य में किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके।
भू-धसान की घटना के बाद स्थानीय लोगों ने क्षेत्र में अवैध खनन की गतिविधियों की जांच की मांग भी तेज कर दी है। लोगों का कहना है कि यदि कहीं अवैध तरीके से खनन हुआ है तो उसकी पहचान कर जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि वर्तमान भू-धसान का कारण अवैध खनन ही है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। जमीन धंसने के पीछे भूमिगत खनन, पुरानी खदानों की स्थिति, जमीन के भीतर खाली स्थान या अन्य भूगर्भीय कारणों की भी भूमिका हो सकती है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष और तकनीकी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन और CCL प्रबंधन से मांग की है कि प्रभावित क्षेत्र का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और यह पता लगाया जाए कि जमीन के नीचे की स्थिति कितनी खतरनाक है।
भू-धसान के बाद सबसे बड़ी चिंता उन परिवारों की है, जिन्हें अपने घर छोड़ने पड़े हैं। जिन लोगों के मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं या जमीन में समा गए हैं, उनके सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। ऐसे में प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत के साथ सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की मांग की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को केवल घटना के बाद राहत देने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि ऐसे क्षेत्रों की पहचान कर पहले से सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। खासकर उन इलाकों में जहां भूमिगत खनन का इतिहास रहा है, वहां जमीन की नियमित निगरानी और जोखिम का वैज्ञानिक आकलन जरूरी है।
बनियाडीह की ताजा घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि खनन क्षेत्र में रहने वाले लोगों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। शनिवार रात हुई घटना में समय रहते लोग घरों से बाहर निकल गए, जिससे किसी बड़े जनहानि की स्थिति टल गई। लेकिन जमीन के लगातार अस्थिर होने की आशंका ने इलाके के लोगों की चिंता बढ़ा दी है।









