Hazaribagh News : शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में इलाज के दौरान 38 वर्षीय मालती देवी की मौत, परिजनों ने गलत इंजेक्शन दिए जाने का लगाया आरोप; जांच और कार्रवाई की मांग
Hazaribagh News : हजारीबाग के शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 38 वर्षीय महिला की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टर और नर्स पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का दावा है कि नस के जरिए इंजेक्शन दिए जाने के करीब 20 मिनट बाद महिला की तबीयत अचानक बिगड़ी और कुछ देर बाद उनकी मौत हो गई। मामले को लेकर अस्पताल परिसर में परिजनों ने विरोध जताया और कार्रवाई की मांग की है।
Hazaribagh News : झारखंड के हजारीबाग से इलाज के दौरान एक महिला की मौत का मामला सामने आया है। शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में 38 वर्षीय मालती देवी की मौत के बाद उनके परिजनों ने अस्पताल में इलाज के दौरान लापरवाही बरतने और गलत इंजेक्शन दिए जाने का आरोप लगाया है। घटना के बाद मृतका के परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध जताते हुए मामले की जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
मृतका मालती देवी हजारीबाग के जयप्रकाश मार्ग की रहने वाली थीं। परिजनों के मुताबिक, पिछले कुछ समय से उन्हें पेट दर्द और उल्टी की शिकायत थी। इसी समस्या के बाद उनकी बेटी लक्ष्मी कुमारी उन्हें इलाज के लिए शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल लेकर पहुंचीं। बताया गया कि 27 सितंबर को मालती देवी को अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
परिजनों का कहना है कि अस्पताल में भर्ती किए जाने के बाद महिला का इलाज चल रहा था। इसी दौरान रात में उन्हें नस के जरिए एक इंजेक्शन दिया गया। परिजनों के अनुसार इंजेक्शन दिए जाने के लगभग 20 मिनट बाद मालती देवी की तबीयत अचानक बिगड़ने लगी। उनके मुंह से झाग निकलने लगा और देखते ही देखते उनकी स्थिति गंभीर हो गई। कुछ देर बाद महिला की मौत हो गई।
मालती देवी की मौत के बाद उनके परिजनों ने इलाज की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए हैं। मृतका की बेटी लक्ष्मी कुमारी का आरोप है कि इंजेक्शन देने के बाद उनकी मां की हालत तेजी से खराब हुई, लेकिन उन्हें यह स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई कि कौन सा इंजेक्शन दिया गया था।
परिजनों के अनुसार, वे यह जानना चाहते थे कि महिला को कौन सी दवा दी गई और उसकी जरूरत क्यों पड़ी, लेकिन उन्हें संतोषजनक जानकारी नहीं मिल सकी। इसी बात को लेकर परिजनों ने अस्पताल में नाराजगी जताई।
हालांकि, इंजेक्शन के कारण ही महिला की मौत हुई या उनकी मौत के पीछे कोई अन्य चिकित्सकीय कारण था, इसकी आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। यह स्पष्ट करने के लिए चिकित्सकीय जांच और अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच जरूरी होगी।
मृतका की बेटी लक्ष्मी कुमारी ने आरोप लगाया कि जिस समय उनकी मां की तबीयत बिगड़ी, उस समय ऑन ड्यूटी डॉक्टर मौके पर मौजूद नहीं थे। उनका कहना है कि नर्स द्वारा इंजेक्शन दिए जाने के बाद अचानक उनकी मां की हालत खराब हुई और परिवार को स्थिति के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई।
परिजनों का आरोप है कि अगर समय पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप किया जाता तो शायद स्थिति को संभालने की कोशिश की जा सकती थी। हालांकि, यह केवल परिजनों का आरोप है और इसकी पुष्टि संबंधित अस्पताल प्रशासन या जांच के बाद ही हो सकेगी।
महिला की मौत की सूचना मिलने के बाद परिवार के लोगों और परिचितों में नाराजगी फैल गई। परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की। परिवार का कहना है कि इलाज के दौरान क्या हुआ, महिला को कौन-कौन सी दवाएं दी गईं और उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद किस तरह का उपचार किया गया, इन सभी बिंदुओं की जांच होनी चाहिए।
परिजन यह भी चाहते हैं कि यदि जांच में किसी चिकित्सक, नर्स या अन्य स्वास्थ्यकर्मी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
मालती देवी के परिजनों ने मामले को लेकर कानूनी कार्रवाई की बात कही है। मृतका की बेटी लक्ष्मी कुमारी के अनुसार, परिवार इस मामले में थाने में आवेदन देने की तैयारी कर रहा है। परिजन चाहते हैं कि पुलिस मामले की जांच करे और अस्पताल में इलाज के दौरान हुई पूरी घटना की जानकारी सामने लाई जाए।
ऐसे मामलों में इलाज से संबंधित मेडिकल रिकॉर्ड, मरीज को दी गई दवाओं और इंजेक्शन का विवरण, चिकित्सकीय पर्ची, ड्यूटी पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों की जानकारी तथा उपचार के दौरान की गई चिकित्सकीय प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि परिवार की ओर से शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो जांच एजेंसियां इन दस्तावेजों और संबंधित लोगों के बयान के आधार पर घटना की परिस्थितियों की जांच कर सकती हैं।
महिला की मौत को लेकर परिजनों की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, खबर लिखे जाने तक अस्पताल प्रशासन या संबंधित चिकित्सकों की ओर से इस पूरे मामले में विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए फिलहाल यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता कि महिला को कौन सा इंजेक्शन दिया गया था और मौत के पीछे वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था।
मामले में अस्पताल प्रशासन की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद ही तस्वीर अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
इलाज के दौरान किसी मरीज की अचानक मौत होना परिवार के लिए बेहद गंभीर और संवेदनशील स्थिति होती है। ऐसे मामलों में एक तरफ परिजनों के सवालों का जवाब मिलना जरूरी है, वहीं दूसरी ओर किसी चिकित्सक या स्वास्थ्यकर्मी पर आरोप की पुष्टि तथ्यों और चिकित्सकीय जांच के आधार पर ही की जानी चाहिए।
मालती देवी की मौत के मामले में भी अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इंजेक्शन दिए जाने के बाद उनकी हालत अचानक क्यों बिगड़ी? क्या उन्हें दी गई दवा उनके उपचार का हिस्सा थी? क्या किसी तरह की दवा संबंधी प्रतिक्रिया हुई? या उनकी गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के कारण उनकी हालत बिगड़ी? इन सवालों के जवाब मेडिकल रिकॉर्ड और विशेषज्ञ जांच से ही सामने आ सकते हैं।
फिलहाल परिवार ने मामले में कार्रवाई की मांग की है और पुलिस में आवेदन देने की तैयारी की बात कही है। अब देखना होगा कि शिकायत के बाद मामले की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और अस्पताल प्रशासन इस पूरे घटनाक्रम पर क्या आधिकारिक जानकारी देता है।









