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Koderma News : कोडरमा सदर अस्पताल में दिव्यांगता जांच शिविर, 5 लोगों को मिला दिव्यांग प्रमाण पत्र

Megha Sinha

Koderma News ; सदर अस्पताल के दिव्यांग बोर्ड में 12 मरीजों की हुई उपस्थिति, विशेष जांच के लिए 3 लोगों को एम्स देवघर और शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज हजारीबाग भेजा गया।

Koderma News : कोडरमा सदर अस्पताल में आयोजित दिव्यांगता जांच शिविर में 12 मरीज पहुंचे। इनमें 5 लोगों का दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाया गया, जबकि अन्य मरीजों को विशेषज्ञ जांच के लिए एम्स देवघर और शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज हजारीबाग भेजा गया।

Koderma News : जिले में दिव्यांगजनों को स्वास्थ्य सेवाओं और दिव्यांगता प्रमाण पत्र से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सदर अस्पताल कोडरमा में दिव्यांग बोर्ड के माध्यम से जांच शिविर आयोजित किया गया। 22 अक्टूबर 2026 को आयोजित इस शिविर में कुल 12 मरीज उपस्थित हुए। इनमें से पांच व्यक्तियों का दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाया गया। वहीं, कुछ मरीजों को उनकी दिव्यांगता की प्रकृति के अनुसार आगे की विशेषज्ञ जांच के लिए दूसरे चिकित्सा संस्थानों में भेजा गया।

जिला जनसंपर्क कार्यालय, कोडरमा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शिविर में अस्थि दिव्यांगता, सेरेब्रल पाल्सी, फाइलेरिया, सुनने-बोलने से संबंधित समस्याओं और अंधापन श्रेणी के मामलों पर ध्यान दिया गया। इस दौरान चिकित्सकों और संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी में मरीजों की जांच की प्रक्रिया पूरी की गई।

दिव्यांगता प्रमाण पत्र पात्र व्यक्तियों के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसके माध्यम से पात्रता के अनुसार विभिन्न सरकारी योजनाओं, शैक्षणिक सुविधाओं, रोजगार संबंधी प्रावधानों और अन्य कल्याणकारी सेवाओं का लाभ लेने में सहायता मिल सकती है। ऐसे में जिला स्तर पर आयोजित जांच शिविर दिव्यांगजनों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सदर अस्पताल कोडरमा में आयोजित दिव्यांगता जांच शिविर में कुल 12 मरीजों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें से पांच व्यक्तियों का दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाया गया। जिला जनसंपर्क कार्यालय की ओर से जारी जानकारी में प्रमाण पत्र बनाए गए पांच व्यक्तियों की श्रेणियों में तीन अस्थि दिव्यांगता, एक सेरेब्रल पाल्सी और एक फाइलेरिया से संबंधित मामला शामिल बताया गया है।

अस्थि दिव्यांगता से संबंधित मामलों में शारीरिक संरचना, अंगों की कार्यक्षमता या चलने-फिरने की क्षमता पर पड़ने वाले प्रभाव का चिकित्सकीय आकलन महत्वपूर्ण होता है। वहीं, सेरेब्रल पाल्सी से जुड़े मामलों में व्यक्ति की शारीरिक गतिविधियों और मांसपेशियों के नियंत्रण से संबंधित स्थितियों का मूल्यांकन किया जाता है। फाइलेरिया से संबंधित मामलों में भी दिव्यांगता प्रमाणन के लिए निर्धारित चिकित्सकीय मानकों के अनुसार आकलन आवश्यक होता है।

हालांकि, प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया संबंधित चिकित्सकीय जांच और निर्धारित पात्रता मानकों पर निर्भर करती है। इसलिए प्रत्येक मामले में विशेषज्ञों का मूल्यांकन महत्वपूर्ण माना जाता है।

शिविर के दौरान कुछ मरीजों की स्थिति को देखते हुए उन्हें आगे की जांच के लिए उच्च चिकित्सा संस्थानों में भेजने का निर्णय लिया गया। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, गूंगा-बहरा श्रेणी से संबंधित एक व्यक्ति को जांच के लिए एम्स देवघर भेजा गया।

सुनने और बोलने से जुड़ी दिव्यांगता के मामलों में सही आकलन के लिए विशेषज्ञ जांच की आवश्यकता हो सकती है। इसके अंतर्गत सुनने की क्षमता, संवाद संबंधी कठिनाइयों और संबंधित चिकित्सकीय पहलुओं की जांच की जाती है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

इस तरह मरीज को विशेषज्ञ संस्थान में भेजने का उद्देश्य उसकी स्थिति का अधिक विस्तृत चिकित्सकीय मूल्यांकन कराना है। हालांकि, संबंधित व्यक्ति की जांच का अंतिम परिणाम और प्रमाण पत्र जारी किए जाने की स्थिति के बारे में प्रेस विज्ञप्ति में अलग से जानकारी नहीं दी गई है।

दिव्यांगता जांच शिविर के दौरान अंधापन श्रेणी के दो मरीजों को आगे की जांच के लिए शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज, हजारीबाग भेजा गया। आंखों से संबंधित दिव्यांगता के मामलों में दृष्टि की स्थिति का उचित चिकित्सकीय आकलन करना आवश्यक होता है।

दृष्टिबाधिता से जुड़े मामलों में मरीज की दृष्टि क्षमता और अन्य निर्धारित चिकित्सा मानकों के आधार पर दिव्यांगता का मूल्यांकन किया जाता है। विशेषज्ञ संस्थान में जांच होने से संबंधित चिकित्सकीय जानकारी प्राप्त करने और प्रमाणन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

जिला स्तर पर इस प्रकार की व्यवस्था उन मरीजों के लिए उपयोगी हो सकती है, जिन्हें सामान्य जांच के बाद विशेषज्ञों की राय या अतिरिक्त चिकित्सकीय परीक्षण की जरूरत होती है। हालांकि, हजारीबाग भेजे गए दोनों मरीजों की जांच रिपोर्ट के संबंध में फिलहाल कोई अतिरिक्त जानकारी जारी नहीं की गई है।

दिव्यांगता जांच शिविर को संचालित करने के लिए सदर अस्पताल कोडरमा में विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी रही। जिला जनसंपर्क कार्यालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, शिविर में अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. रमण कुमार, जिला मलेरिया पदाधिकारी सह फिजिशियन डॉ. मनोज कुमार और नाक, कान एवं गला रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेमनाथ सिंह उपस्थित थे।

इसके अलावा ऑडियोलॉजिस्ट मनोज कुमार सहित कार्यालय सहायक अजीत कुमार, अनीश कुमार और कुणाल भी शिविर में मौजूद रहे।

अलग-अलग विशेषज्ञों की उपस्थिति से विभिन्न प्रकार की दिव्यांगता से संबंधित मामलों के मूल्यांकन में सहयोग मिलता है। अस्थि रोग विशेषज्ञ शारीरिक और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं का आकलन कर सकते हैं, जबकि नाक-कान-गला विशेषज्ञ और ऑडियोलॉजिस्ट सुनने से संबंधित समस्याओं की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में चिकित्सकीय मूल्यांकन, संबंधित दस्तावेजों और निर्धारित नियमों का पालन आवश्यक होता है। इसलिए ऐसे शिविरों में विशेषज्ञ चिकित्सकों और प्रशासनिक कर्मचारियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण है।

दिव्यांगता प्रमाण पत्र पात्र व्यक्तियों को सरकारी योजनाओं और विभिन्न सुविधाओं का लाभ प्राप्त करने में मदद करने वाला एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। पात्रता और संबंधित योजना के नियमों के अनुसार इसका उपयोग पेंशन, शिक्षा, रोजगार, आरक्षण तथा अन्य कल्याणकारी प्रावधानों के लिए किया जा सकता है।

कई बार दिव्यांगजनों और उनके परिवारों को प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अलग-अलग कार्यालयों या अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। ऐसे में जिला स्तर पर जांच शिविर आयोजित किए जाने से संबंधित प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाने में मदद मिल सकती है। जिन मामलों में अतिरिक्त विशेषज्ञ जांच की आवश्यकता होती है, उन्हें उपयुक्त चिकित्सा संस्थानों में भेजना भी इस प्रक्रिया का हिस्सा है।

हालांकि, प्रमाण पत्र प्राप्त होने मात्र से सभी योजनाओं का लाभ स्वतः नहीं मिलता। प्रत्येक योजना के लिए निर्धारित पात्रता, दस्तावेज और आवेदन प्रक्रिया का पालन करना आवश्यक होता है।

कोडरमा सदर अस्पताल में आयोजित इस शिविर के आंकड़े बताते हैं कि एक ही दिन में 12 मरीज दिव्यांगता संबंधी जांच के लिए पहुंचे, जिनमें पांच लोगों का प्रमाण पत्र बनाया गया। वहीं, तीन मरीजों को आगे की विशेषज्ञ जांच के लिए दूसरे चिकित्सा संस्थानों में भेजा गया। प्रेस विज्ञप्ति में शेष मरीजों के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।

दिव्यांगजनों को समय पर जांच, प्रमाणन और संबंधित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना प्रशासनिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके लिए जरूरी है कि लोगों को शिविरों की जानकारी समय पर मिले, आवश्यक दस्तावेजों के बारे में बताया जाए और जिन मरीजों को विशेषज्ञ जांच की आवश्यकता हो, उन्हें उचित मार्गदर्शन दिया जाए।

जिला जनसंपर्क कार्यालय, कोडरमा की ओर से जारी इस प्रेस विज्ञप्ति में शिविर की उपस्थिति, प्रमाण पत्र बनाए जाने और मरीजों को आगे की जांच के लिए भेजे जाने की जानकारी दी गई है। यह पहल दिव्यांगता प्रमाणन से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता को सामने लाती है।