Skip to content

Koderma News : कोडरमा में पर्यावरण संरक्षण को लेकर विधानसभा समिति की समीक्षा बैठक, खदानों और क्रशरों के मानकों का पालन करने का निर्देश

Megha Sinha

Koderma News : झारखंड विधानसभा की पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण समिति ने विभिन्न विभागों के कार्यों की समीक्षा की। पौधरोपण, जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन, ठोस कचरे के निस्तारण और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर विशेष जोर दिया गया।

Koderma News : कोडरमा में झारखंड विधानसभा की पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण समिति ने समीक्षा बैठक कर खदानों, क्रशर इकाइयों, जैव चिकित्सा अपशिष्ट, ठोस कचरा प्रबंधन और वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

Koderma News : जिले में पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित कार्यों की समीक्षा के लिए झारखंड विधानसभा की पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण समिति ने कोडरमा का दौरा किया। 25 अक्टूबर 2026 को जिला परिषदन सभागार में समिति के सभापति उदय शंकर सिंह की अध्यक्षता में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में समिति के सदस्य संजीव सरदार भी शामिल हुए। इस दौरान जिले में पर्यावरण संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों, प्रदूषण नियंत्रण के उपायों और विभिन्न विभागों की जिम्मेदारियों की समीक्षा की गई।

बैठक में अधिकारियों से विभागवार जानकारी प्राप्त की गई और पर्यावरण से संबंधित निर्धारित मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। समिति ने स्पष्ट किया कि खनन गतिविधियों, क्रशर इकाइयों, कचरा प्रबंधन, जैव चिकित्सा अपशिष्ट के निस्तारण और वाहनों से होने वाले प्रदूषण जैसे विषयों पर संबंधित विभागों को सजगता के साथ काम करना चाहिए।

Koderma News : कोडरमा में पर्यावरण संरक्षण को लेकर विधानसभा समिति की समीक्षा बैठक, खदानों और क्रशरों के मानकों का पालन करने का निर्देश 1

कोडरमा जिले में खनन गतिविधियों और क्रशर इकाइयों से जुड़े पर्यावरणीय पहलुओं की समीक्षा बैठक का प्रमुख हिस्सा रही। समिति के सभापति ने खनन विभाग के अधिकारियों से खदानों और क्रशरों में पर्यावरण संरक्षण तथा प्रदूषण नियंत्रण के निर्धारित मानकों के अनुपालन की जानकारी ली।

खनन और पत्थर क्रशिंग से जुड़ी गतिविधियों में धूल, वायु प्रदूषण और आसपास के पर्यावरण पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को देखते हुए नियमों का पालन महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसी इकाइयों में पर्यावरणीय मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करना संबंधित विभागों की जिम्मेदारी है।

समिति ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि खदानों और क्रशर इकाइयों में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े सभी निर्धारित नियमों का अनुपालन सुनिश्चित कराया जाए। इसके लिए संबंधित विभागों को अपने स्तर पर निगरानी और आवश्यक कार्रवाई पर ध्यान देने को कहा गया।

हालांकि, जिला जनसंपर्क कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में किसी विशेष खदान या क्रशर इकाई के खिलाफ कार्रवाई, उल्लंघन के मामलों की संख्या अथवा लगाए गए जुर्माने का उल्लेख नहीं किया गया है। बैठक में मुख्य रूप से नियमों के पालन और प्रदूषण नियंत्रण के उपायों की समीक्षा की गई।

पर्यावरण संरक्षण में वन विभाग की भूमिका को ध्यान में रखते हुए समिति ने जिले में पौधरोपण से संबंधित कार्यों की भी समीक्षा की। बैठक के दौरान अधिकारियों से पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से लगाए गए पौधों की जानकारी प्राप्त की गई।

पौधरोपण को पर्यावरण संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है, लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी मिलता है जब लगाए गए पौधों का उचित रखरखाव किया जाए और उनके जीवित रहने की नियमित निगरानी हो। केवल पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी सिंचाई, सुरक्षा और देखभाल भी आवश्यक है।

Koderma News : कोडरमा में पर्यावरण संरक्षण को लेकर विधानसभा समिति की समीक्षा बैठक, खदानों और क्रशरों के मानकों का पालन करने का निर्देश 2

इसी पहलू पर जोर देते हुए समिति के सभापति ने वन विभाग को लगाए गए पौधों के संरक्षण और उचित देखभाल पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया। इसका उद्देश्य पौधरोपण के निर्धारित लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करना और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े प्रयासों को परिणामकारी बनाना है।

बैठक में स्वास्थ्य विभाग से अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों से निकलने वाले जैव चिकित्सा अपशिष्ट यानी बायो मेडिकल वेस्ट के प्रबंधन की जानकारी भी ली गई।

अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों से निकलने वाले अपशिष्ट का सुरक्षित तरीके से संग्रह, पृथक्करण, परिवहन और निस्तारण सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा पर्यावरण की सुरक्षा के लिए आवश्यक है। यदि ऐसे कचरे का निस्तारण निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार नहीं किया जाता है, तो इससे संक्रमण फैलने और पर्यावरण दूषित होने का खतरा पैदा हो सकता है।

इसी को ध्यान में रखते हुए समिति ने स्वास्थ्य विभाग से संबंधित व्यवस्था की समीक्षा की। बैठक में जैव चिकित्सा अपशिष्ट के उचित प्रबंधन से जुड़े कार्यों की जानकारी प्राप्त की गई, ताकि निर्धारित मानकों के अनुपालन पर ध्यान दिया जा सके।

प्रेस विज्ञप्ति में जैव चिकित्सा अपशिष्ट के प्रबंधन से संबंधित किसी विशेष संस्थान की लापरवाही या नियम उल्लंघन का विवरण नहीं दिया गया है। समीक्षा का उद्देश्य संबंधित विभाग की व्यवस्था और जिम्मेदारियों की जानकारी प्राप्त करना था।

शहरों और कस्बों में उत्पन्न होने वाले ठोस कचरे का उचित प्रबंधन पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण चुनौती है। घरों, बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे का व्यवस्थित संग्रह और निस्तारण नहीं होने पर आसपास गंदगी, दुर्गंध और प्रदूषण की समस्या उत्पन्न हो सकती है।

बैठक के दौरान समिति ने नगर निकायों द्वारा ठोस अपशिष्ट और अन्य कचरे के प्रबंधन की स्थिति की समीक्षा की। संबंधित अधिकारियों से कचरे के निस्तारण की व्यवस्था के बारे में जानकारी प्राप्त की गई।

समिति ने अपशिष्टों का वैज्ञानिक और व्यवस्थित तरीके से निस्तारण सुनिश्चित करने पर बल दिया। इसका उद्देश्य कचरे के प्रबंधन को पर्यावरण के अनुकूल बनाना और स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर करने के लिए निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।

ठोस कचरा प्रबंधन के प्रभावी क्रियान्वयन में नगर निकायों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसके लिए कचरे का उचित संग्रह, आवश्यकतानुसार पृथक्करण, परिवहन और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निस्तारण जरूरी है। बैठक में इस विषय पर संबंधित विभागों को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सजग रहने का निर्देश दिया गया।

पर्यावरण एवं प्रदूषण नियंत्रण समिति ने जिला परिवहन विभाग के कार्यों की भी समीक्षा की। इस दौरान वाहनों की नियमित जांच तथा परिवहन के दौरान पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण से संबंधित निर्धारित मानकों के अनुपालन की जानकारी ली गई।

वाहनों से निकलने वाला धुआं वायु प्रदूषण का एक महत्वपूर्ण स्रोत हो सकता है। ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण के लिए वाहनों की स्थिति की जांच, लागू उत्सर्जन मानकों का अनुपालन और संबंधित नियमों के प्रति जागरूकता आवश्यक है।

समिति के सभापति ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति सजगता के साथ कार्य करने पर भी जोर दिया।

इस समीक्षा का उद्देश्य परिवहन व्यवस्था में पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन की स्थिति को समझना और संबंधित विभाग को अपनी जिम्मेदारियों के प्रति सक्रिय रखना था।

कोडरमा में आयोजित इस समीक्षा बैठक में पर्यावरण संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े विभिन्न विभागों के कार्यों पर चर्चा की गई। खनन विभाग, वन विभाग, पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, स्वास्थ्य विभाग, परिवहन विभाग, राजस्व विभाग, आपदा प्रबंधन विभाग, जल संसाधन विभाग, श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग तथा उद्योग विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के कार्यों की समीक्षा की गई।

बैठक में वन प्रमंडल पदाधिकारी सौमित्र शुक्ला, उप विकास आयुक्त रवि जैन, अपर समाहर्ता संजय पीएम कुजूर, अनुमंडल पदाधिकारी निर्मल सोरेन, जिला परिवहन पदाधिकारी विजय कुमार सोनी, भूमि उप समाहर्ता यस्मिता सिंह, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी कनक कुमारी तिर्की, जिला योजना पदाधिकारी अनूप कुजूर और जिला नियोजन पदाधिकारी प्रकाश बैठा सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

कोडरमा में हुई इस समीक्षा बैठक ने खनन गतिविधियों, पौधरोपण, जैव चिकित्सा अपशिष्ट, ठोस कचरा प्रबंधन और वाहनों से होने वाले प्रदूषण जैसे विषयों पर संबंधित विभागों की जिम्मेदारियों को रेखांकित किया। समिति ने अधिकारियों को पर्यावरण संरक्षण से जुड़े निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया।

पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को प्रभावी बनाने के लिए केवल निर्देश जारी करना ही नहीं, बल्कि उनका जमीन पर क्रियान्वयन और नियमित निगरानी भी महत्वपूर्ण है। खदानों और क्रशर इकाइयों में मानकों का पालन, लगाए गए पौधों की देखभाल, अस्पतालों के अपशिष्ट का सुरक्षित निस्तारण तथा नगर निकायों में ठोस कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन ऐसे विषय हैं, जिनका सीधा संबंध पर्यावरण और जनस्वास्थ्य से है।