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Koderma News : सुरक्षित बचपन अभियान के तहत विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, बच्चों को बताए गए अधिकार

Megha Sinha

Koderma News : चाइल्ड प्रोग्रेसिव स्कूल असनाबाद में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की पहल, पॉक्सो एक्ट, बाल अधिकार, बाल विवाह और गुड टच-बैड टच की दी गई जानकारी

Koderma News : कोडरमा के चाइल्ड प्रोग्रेसिव स्कूल असनाबाद में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की ओर से सुरक्षित बचपन अभियान के तहत विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। बच्चों को पॉक्सो एक्ट, बाल अधिकार, बाल विवाह, गुड टच-बैड टच और कानूनी संरक्षण की जानकारी दी गई।

Koderma News : बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने, उनके अधिकारों की रक्षा करने और उन्हें कानून के प्रति जागरूक बनाने के उद्देश्य से कोडरमा जिले में सुरक्षित बचपन अभियान के तहत विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। गुरुवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार, कोडरमा के तत्वावधान में चाइल्ड प्रोग्रेसिव स्कूल, असनाबाद में आयोजित इस शिविर में स्कूली छात्र-छात्राओं को बाल अधिकारों, लैंगिक अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पॉक्सो एक्ट), बाल विवाह और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि बच्चों का सर्वांगीण विकास तभी संभव है, जब उन्हें शिक्षा, सुरक्षा, समान अवसर और स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराया जाए। बच्चों को अपने अधिकारों की जानकारी होने के साथ-साथ किसी भी प्रकार के शोषण, उत्पीड़न और भेदभाव के खिलाफ आवाज उठाने के लिए भी जागरूक होना जरूरी है।

Koderma News : सुरक्षित बचपन अभियान के तहत विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, बच्चों को बताए गए अधिकार 1

विधिक जागरूकता शिविर में एलईडीसीएस की अधिवक्ता किरण कुमारी ने विद्यार्थियों को कानून की जानकारी देते हुए कार्यक्रम के उद्देश्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी और पॉक्सो एक्ट सहित विभिन्न कानूनों के महत्व को समझाया।

उन्होंने बताया कि बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा से संबंधित कानूनी व्यवस्थाओं की जानकारी देना बेहद आवश्यक है। जागरूकता के अभाव में कई बार बच्चे अपने साथ होने वाली गलत घटनाओं के बारे में किसी को बता नहीं पाते। ऐसे में उन्हें यह समझना चाहिए कि कानून उनकी सुरक्षा के लिए है और किसी भी तरह के शोषण या अनुचित व्यवहार की स्थिति में मदद लेना उनका अधिकार है।

शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल कानूनों से परिचित कराना ही नहीं, बल्कि उन्हें अपने आसपास होने वाली गलत गतिविधियों को पहचानने और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता प्राप्त करने के लिए सक्षम बनाना भी था।

एलईडीसीएस के अधिवक्ता अरुण कुमार ओझा ने कहा कि सुरक्षित बचपन अभियान का मुख्य उद्देश्य बच्चों को जागरूक, सुरक्षित और संरक्षित बनाना है, ताकि वे अपने अधिकारों को समझ सकें और उनका लाभ उठा सकें।

उन्होंने बाल अधिकारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक बच्चे को शिक्षा, सुरक्षा, समान अवसर और स्वस्थ वातावरण मिलना चाहिए। किसी भी बच्चे के विकास में गरीबी, सामाजिक भेदभाव या अन्य परिस्थितियां बाधा नहीं बननी चाहिए। सभी बच्चों को अपनी प्रतिभा पहचानने और उसे विकसित करने का समान अवसर मिलना जरूरी है।

अरुण कुमार ओझा ने कहा कि बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए देश में कई कानून बनाए गए हैं। इन कानूनों का उद्देश्य बच्चों को शोषण, हिंसा, उपेक्षा और अन्य प्रकार की असुरक्षा से बचाना है। हालांकि, कानूनों का प्रभावी लाभ तभी मिल सकता है, जब बच्चे, अभिभावक, शिक्षक और समाज के अन्य लोग इनके प्रति जागरूक हों।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को भयमुक्त वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने और अपनी प्रतिभा विकसित करने का अवसर मिलना चाहिए। बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार, विद्यालय और समाज के प्रत्येक सदस्य का भी दायित्व है।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति भी जागरूक रहने की सलाह दी गई। वक्ताओं ने कहा कि यदि किसी बच्चे के साथ भेदभाव, उत्पीड़न या शोषण होता है, तो उसे चुप रहने के बजाय किसी विश्वसनीय वयस्क, अभिभावक, शिक्षक अथवा संबंधित पदाधिकारी को इसकी जानकारी देनी चाहिए।

बच्चों को यह समझाया गया कि किसी भी अनुचित घटना को छिपाने से समस्या बढ़ सकती है। इसलिए उन्हें अपनी परेशानी बताने में संकोच नहीं करना चाहिए। अभिभावकों और शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों की बात गंभीरता से सुनें और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं।

शिविर में इस बात पर भी जोर दिया गया कि विद्यालयों में ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए, जहां बच्चे बिना किसी डर के अपनी बात रख सकें। बच्चों की समस्याओं को संवेदनशीलता से सुनना और उन्हें उचित मार्गदर्शन देना सुरक्षित बचपन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

इस अवसर पर बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की चेयरपर्सन रिंकी कुमारी ने बाल विवाह को गंभीर सामाजिक कुरीति बताते हुए इसे समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास करने की अपील की। उन्होंने कहा कि बाल विवाह बच्चों के भविष्य, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यक्तिगत विकास पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

उन्होंने विद्यार्थियों को बाल विवाह से संबंधित कानूनी प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि कानून के तहत दोषी पाए जाने पर दंड और जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने कहा कि बाल विवाह को रोकने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।

रिंकी कुमारी ने कहा कि बच्चों को कम उम्र में विवाह के बजाय शिक्षा और अपने भविष्य के निर्माण पर ध्यान देने का अवसर मिलना चाहिए। अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के लोगों को भी इस विषय पर जागरूक होना आवश्यक है, ताकि बच्चों का भविष्य सुरक्षित बनाया जा सके।

उन्होंने बाल सुरक्षा के संदर्भ में गुड टच और बैड टच के बारे में भी जानकारी दी। बच्चों को समझाया गया कि उन्हें अपने शरीर की व्यक्तिगत सीमाओं के प्रति जागरूक रहना चाहिए और किसी भी असहज या अनुचित व्यवहार की स्थिति में भरोसेमंद व्यक्ति को इसकी जानकारी देनी चाहिए।

सीडब्ल्यूसी चेयरपर्सन रिंकी कुमारी ने सरकार की ओर से बच्चों के कल्याण और संरक्षण के लिए चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रमों की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जरूरतमंद, गरीब और असहाय बच्चों की सहायता के लिए चाइल्ड वेलफेयर कमिटी तत्पर है।

उन्होंने कहा कि समाज में ऐसे कई बच्चे होते हैं, जिन्हें उचित मार्गदर्शन, संरक्षण और सहायता की जरूरत होती है। ऐसे बच्चों तक मदद पहुंचाना और उन्हें सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना सामूहिक जिम्मेदारी है। बाल संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाकर जरूरतमंद बच्चों को उचित सहायता दिलाई जा सकती है।

वक्ताओं ने कहा कि कानून की जानकारी समाज को अधिक जागरूक, सभ्य और सुव्यवस्थित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब बच्चे अपने अधिकारों को समझेंगे और समाज के लोग उनकी सुरक्षा के प्रति जिम्मेदार बनेंगे, तभी सुरक्षित बचपन की परिकल्पना को साकार किया जा सकेगा।