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Seraikela Kharsawan News : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पत्नी कल्पना सोरेन के साथ पहुंचे मामा घर, मां के निधन के बाद निभाई पारंपरिक रस्में

Megha Sinha

Seraikela Kharsawan News : मां रूपी सोरेन के निधन के बाद पारिवारिक परंपरा निभाने मामा घर पहुंचे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पत्नी कल्पना सोरेन भी रहीं साथ

Seraikela Kharsawan News : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी एवं गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के साथ चांडिल स्थित धातकीडीह मामा घर पहुंचे। मां रूपी सोरेन के निधन के बाद अंतिम संस्कार, श्राद्धकर्म और अस्थि विसर्जन की रस्में पूरी करने के पश्चात मुख्यमंत्री ने झारखंडी पारिवारिक परंपरा के अनुसार मामा घर में रस्म अदायगी की।
Seraikela Kharsawan News : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पत्नी कल्पना सोरेन के साथ पहुंचे मामा घर, मां के निधन के बाद निभाई पारंपरिक रस्में 1

Seraikela Kharsawan News : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंगलवार को अपनी पत्नी एवं गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के साथ चांडिल स्थित अपने मामा घर पहुंचे। मुख्यमंत्री का यह दौरा पारिवारिक और पारंपरिक रस्मों से जुड़ा रहा। धातकीडीह (कांगलाटांड़) स्थित मामा घर में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने झारखंडी समाज की पारिवारिक परंपरा के अनुसार रस्म अदायगी की।

इस दौरान मामा घर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी का स्वागत किया गया। वहीं, प्रशासन की ओर से मुख्यमंत्री को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। मुख्यमंत्री के मामा घर पहुंचने को उनकी माता के निधन के बाद पूरी की जा रही पारिवारिक परंपराओं की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

गौरतलब है कि बीते दिनों झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता रूपी सोरेन का निधन हो गया था। उनके निधन के बाद परिवार में शोक का माहौल था। इस दुखद घटना के पश्चात परिवार की ओर से अंतिम संस्कार, श्राद्धकर्म और अस्थि विसर्जन सहित विभिन्न पारिवारिक एवं धार्मिक परंपराओं को पूरा किया गया।

इन रस्मों के संपन्न होने के बाद मुख्यमंत्री मंगलवार को अपनी पत्नी कल्पना सोरेन के साथ चांडिल के धातकीडीह स्थित मामा घर पहुंचे। यहां उन्होंने झारखंडी समाज की पारंपरिक व्यवस्था के अनुसार रस्म अदायगी की।

Seraikela Kharsawan News : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पत्नी कल्पना सोरेन के साथ पहुंचे मामा घर, मां के निधन के बाद निभाई पारंपरिक रस्में 2

यह आयोजन केवल एक पारिवारिक मुलाकात नहीं, बल्कि झारखंड की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अवसर भी रहा। ऐसे रीति-रिवाजों के माध्यम से परिवार अपने पूर्वजों और सामाजिक मान्यताओं से जुड़ाव बनाए रखता है।

झारखंड के कई समुदायों में माता-पिता के निधन के बाद अंतिम संस्कार और अन्य निर्धारित धार्मिक एवं पारिवारिक रस्में पूरी करने के पश्चात मामा घर जाकर पारंपरिक रस्म अदायगी करने की परंपरा प्रचलित है।

इस परंपरा के अंतर्गत मामा घर में व्यक्ति का विशेष तरीके से स्वागत किया जाता है। परिवार के सदस्य पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अतिथि का सम्मान करते हैं। कई स्थानों पर पैर धोकर स्वागत करने और भोजन कराने की परंपरा भी निभाई जाती है।

मान्यता और स्थानीय परंपराओं के अनुसार, इस रस्म का संबंध शोक अवधि के बाद पारिवारिक जीवन में सामान्य सामाजिक गतिविधियों की ओर लौटने से भी माना जाता है। झारखंडी समाज में ऐसी परंपराएं परिवारों के बीच संबंधों को मजबूत करने और सामाजिक एकजुटता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

हालांकि, इन रस्मों के स्वरूप और पालन करने के तरीके समुदाय, परिवार तथा स्थानीय मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

मामा घर में स्वागत के दौरान पैर धोने और भोजन कराने की परंपरा का विशेष महत्व बताया जाता है। यह सम्मान, अपनापन और पारिवारिक संबंधों की अभिव्यक्ति के रूप में देखी जाती है।

झारखंड के ग्रामीण और पारंपरिक सामाजिक परिवेश में मामा घर का संबंध केवल रिश्तेदारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह परिवार के भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव का भी प्रतीक है। विशेष अवसरों पर मामा घर पहुंचना पारिवारिक जीवन की महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल माना जाता है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के धातकीडीह स्थित मामा घर पहुंचने के दौरान भी पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार स्वागत किया गया और रस्म अदायगी की प्रक्रिया पूरी की गई।

इस पारिवारिक अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ उनकी पत्नी और गांडेय विधानसभा क्षेत्र की विधायक कल्पना सोरेन भी मौजूद रहीं। दोनों ने मामा घर पहुंचकर पारिवारिक परंपरा का निर्वहन किया।

मुख्यमंत्री का यह दौरा झारखंड की सामाजिक-सांस्कृतिक विरासत और पारिवारिक परंपराओं के महत्व को भी सामने लाता है। राज्य की विभिन्न जनजातीय और स्थानीय समुदायों में जीवन के महत्वपूर्ण अवसरों पर परंपराओं का पालन सामाजिक पहचान का अभिन्न हिस्सा माना जाता है।