Giridih News : प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव रखने वाले आदिवासी समाज की पहचान और परंपराओं को संरक्षित करते हुए विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़ाने पर मुख्यमंत्री ने दिया जोर।
Giridih News : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मधुबन, पीरटांड़ में आयोजित ‘मारांग बुरु धोरोमगाड़ महासम्मेलन-2026’ में शिरकत की। आदिवासी समाज की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक उन्नति के लिए राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया। मुख्यमंत्री ने आदिवासी परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान और अधिकारों के संरक्षण के साथ समाज के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया।
Giridih News : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज गिरिडीह जिले के मधुबन, पीरटांड़ में आयोजित ‘मारांग बुरु धोरोमगाड़ महासम्मेलन-2026’ में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने आदिवासी समाज के सामाजिक, सांस्कृतिक और समग्र विकास से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए। मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज के उत्थान के लिए राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान करने का भरोसा दिलाया।
महासम्मेलन को आदिवासी समाज की एकजुटता, सांस्कृतिक पहचान और विकास की आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करने वाले महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जा रहा है। इस आयोजन के माध्यम से समाज की परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और भविष्य की दिशा से जुड़े विषयों पर चर्चा का अवसर मिला।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि प्रकृति के साथ रच-बसकर जीवन व्यतीत करने वाला आदिवासी समाज किस प्रकार विकास की मुख्यधारा में आगे बढ़े, यह हम सभी के लिए महत्वपूर्ण विषय है। आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट परंपराएं, सांस्कृतिक पहचान और प्रकृति के साथ गहरा जुड़ाव रहा है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की विशिष्ट पहचान और उसकी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखना आवश्यक है। विकास की प्रक्रिया में समाज की परंपराओं, मान्यताओं और प्रकृति के साथ उसके संबंधों का सम्मान किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री के अनुसार, आदिवासी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए ऐसे प्रयास जरूरी हैं, जिनमें उसकी पहचान और सांस्कृतिक मूल्यों को प्राथमिकता मिले।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि समाज के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए सभी वर्गों की सहभागिता आवश्यक है। सामाजिक सद्भाव, आपसी सहयोग और जागरूकता के माध्यम से आदिवासी समाज के विकास को नई दिशा दी जा सकती है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने ‘मारांग बुरु धोरोमगाड़ महासम्मेलन’ के आयोजन के प्रति समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सम्मेलन समाज की एकजुटता, जागरूकता और विकास की आकांक्षाओं को सामने लाने का महत्वपूर्ण माध्यम होते हैं।

ऐसे आयोजनों से समाज के लोगों को अपनी परंपराओं, सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का अवसर मिलता है। साथ ही, सामूहिक सहभागिता के माध्यम से भविष्य की चुनौतियों और विकास की संभावनाओं पर भी चर्चा की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज के सामाजिक, सांस्कृतिक और विकास संबंधी प्रयासों में राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहयोग प्रदान करने का भरोसा दिलाया। उन्होंने कहा कि समाज के विकास के लिए सरकार और समुदाय के बीच सहयोग तथा सहभागिता महत्वपूर्ण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान, परंपरा, संस्कृति और अधिकारों का सम्मान करते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करना आवश्यक है। इसके लिए सामूहिक सहभागिता और निरंतर प्रयासों की जरूरत है।
उन्होंने आदिवासी समाज के विकास को राज्य के समग्र विकास से जोड़ते हुए सामाजिक सद्भाव और सहयोग की भावना को महत्वपूर्ण बताया। मुख्यमंत्री के संदेश में सांस्कृतिक संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष जोर रहा।
मधुबन, पीरटांड़ में आयोजित ‘मारांग बुरु धोरोमगाड़ महासम्मेलन-2026’ में मुख्यमंत्री की सहभागिता आदिवासी समाज के सामाजिक और सांस्कृतिक विषयों पर संवाद का महत्वपूर्ण अवसर रही। इस दौरान उन्होंने समाज के उत्थान, सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण और विकास के लिए राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।


