Giridih News : गिरिडीह के मधुबन स्थित मरांग बुरु में 4 और 5 नवंबर को होगा महासम्मेलन, वहीं बोकारो के ललपनिया में 22 से 24 नवंबर तक आयोजित होगा 26वां अंतरराष्ट्रीय संथाल सामाजिक एवं सरना धर्म सम्मेलन।
Giridih News : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को मरांग बुरु धर्मगाढ़ महा सम्मेलन 2026 और 26वें अंतरराष्ट्रीय संथाल सामाजिक एवं सरना धर्म सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया। जानिए गिरिडीह और बोकारो में होने वाले इन आयोजनों की पूरी जानकारी।
Giridih News : झारखंड में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सरना धर्म से जुड़े दो प्रमुख महासम्मेलनों के आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसी क्रम में संथाल समाज के एक संयुक्त प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर उन्हें दोनों आयोजनों में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। यह मुलाकात 24 अक्टूबर 2026 को कांके रोड, रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में हुई।
मुख्यमंत्री सचिवालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति संख्या 347/2026 के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को गिरिडीह जिले के पीरटांड़ प्रखंड स्थित मधुबन में आयोजित होने वाले ‘मरांग बुरु धर्मगाढ़ महा सम्मेलन-2026’ तथा बोकारो जिले के ललपनिया में होने वाले ‘26th International Santal Socio-Sarna Religion Conference 2026’ में शामिल होने का निमंत्रण दिया।
इन दोनों आयोजनों को संथाल समाज की सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था, पारंपरिक पहचान और सामाजिक एकजुटता को आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखा जा रहा है।
गिरिडीह जिले के मधुबन, पीरटांड़ स्थित मरांग बुरु में 4 और 5 नवंबर 2026 को ‘मरांग बुरु धर्मगाढ़ महा सम्मेलन-2026’ आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में संथाल समाज और सरना धर्म से जुड़े श्रद्धालुओं, सामाजिक प्रतिनिधियों तथा विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले लोगों के शामिल होने की संभावना है।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को कार्यक्रम की रूपरेखा से अवगत कराते हुए बताया कि हर वर्ष की तरह इस बार भी महासम्मेलन का आयोजन व्यापक स्तर पर किया जा रहा है। इस अवसर पर आदिवासी समाज की धार्मिक मान्यताओं, सांस्कृतिक परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामुदायिक एकता से जुड़े विषयों पर चर्चा की जाएगी।
मरांग बुरु संथाल समाज की धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था से जुड़ा एक महत्वपूर्ण नाम है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से समुदाय अपनी पारंपरिक मान्यताओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने, सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने और समाज के लोगों के बीच आपसी संवाद को बढ़ावा देने का प्रयास करता है।
गिरिडीह जिले के लिए भी यह आयोजन महत्वपूर्ण है। मधुबन और पीरटांड़ क्षेत्र अपनी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान के कारण विशेष स्थान रखते हैं। महासम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए स्थानीय स्तर पर आयोजन की तैयारियां और व्यवस्थाएं अहम रहेंगी।
दूसरा प्रमुख आयोजन बोकारो जिले के टी.टी.पी.एस. ललपनिया में प्रस्तावित है। यहां 22 से 24 नवंबर 2026 तक ‘26th International Santal Socio-Sarna Religion Conference 2026’ का आयोजन किया जाएगा। यह सम्मेलन सोहराय कुनामी, यानी कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने की जानकारी दी गई है।
प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी सरना धर्मावलंबियों और संथाल समाज से जुड़े लोगों के शामिल होने की संभावना है। सम्मेलन का उद्देश्य सामाजिक और धार्मिक विषयों पर विचार-विमर्श करना तथा संथाल समाज की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को व्यापक स्तर पर साझा करना है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाला यह सम्मेलन समुदाय के विभिन्न प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाने का अवसर प्रदान करेगा। ऐसे मंचों पर पारंपरिक जीवनशैली, सामाजिक मूल्यों, धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण जैसे विषयों पर संवाद किया जा सकता है।
हालांकि, सम्मेलन में शामिल होने वाले सभी प्रतिनिधियों की संख्या, विस्तृत कार्यक्रम और अन्य व्यवस्थाओं से संबंधित जानकारी आधिकारिक रूप से अलग से साझा किए जाने पर ही स्पष्ट होगी।
दोनों महासम्मेलनों का प्रमुख उद्देश्य आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और धार्मिक आस्था के संरक्षण को बढ़ावा देना है। आधुनिक सामाजिक बदलावों के बीच अपनी भाषा, रीति-रिवाज, सामुदायिक परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं को सुरक्षित रखना आदिवासी समुदायों के लिए महत्वपूर्ण विषय रहा है।
संथाल समाज की सांस्कृतिक पहचान उसके पारंपरिक पर्वों, सामुदायिक जीवन, प्रकृति से जुड़े विश्वासों और सामाजिक परंपराओं में दिखाई देती है। महासम्मेलन जैसे आयोजन इन परंपराओं पर चर्चा करने, अनुभव साझा करने और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का अवसर उपलब्ध कराते हैं।
इसके साथ ही, इस तरह के आयोजनों का महत्व केवल धार्मिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। ये सामाजिक एकता, पारंपरिक ज्ञान के आदान-प्रदान और समुदाय की सामूहिक पहचान को मजबूत करने के लिए भी महत्वपूर्ण मंच बन सकते हैं।
झारखंड में आदिवासी समुदायों की सामाजिक और सांस्कृतिक भूमिका व्यापक रही है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से उनकी परंपराओं और मान्यताओं को सम्मान देने के साथ-साथ उनके संरक्षण के लिए जरूरी प्रयासों पर भी ध्यान केंद्रित किया जा सकता है।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए दोनों महासम्मेलनों के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री सचिवालय की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, उन्होंने आदिवासी संस्कृति, गौरवशाली परंपराओं और जन-आस्था के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
मुख्यमंत्री ने कहा, “राज्य सरकार आदिवासी संस्कृति, गौरवशाली परंपरा और जन-आस्था के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरी तरह समर्पित है। हमारी पहचान और अस्तित्व को बचाए रखने के लिए ऐसे प्रयास निरंतर जारी रहेंगे।”
मुख्यमंत्री के इस वक्तव्य में आदिवासी समुदायों की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक विरासत को सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया है। हालांकि, दोनों सम्मेलनों में उनकी वास्तविक उपस्थिति की पुष्टि उनके कार्यक्रम में शामिल होने के बाद ही मानी जाएगी। फिलहाल, प्रतिनिधिमंडल की ओर से उन्हें मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले संयुक्त प्रतिनिधिमंडल में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त और मरांग बुरु बचाओ मोर्चा के अध्यक्ष फागू बेसरा सहित संथाल समाज के कई गणमान्य सदस्य शामिल थे।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल में हीरालाल मांझी, सोमई टुडू, महावीर मुर्मू, विष्णु किस्कू, सुरेश हेंब्रम, सुधीर बास्के, बबली सोरेन, भगवान किस्कू, शनिचर बेसरा, लादु मांझी, डॉ. डुमनी मयी मुर्मू और सोनाराम मांझी सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।
प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री को दोनों आयोजनों की विस्तृत रूपरेखा से अवगत कराया और उनसे कार्यक्रमों में शामिल होने का आग्रह किया।
नवंबर 2026 में होने वाले ये दोनों महासम्मेलन झारखंड की आदिवासी सांस्कृतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। गिरिडीह के मधुबन में मरांग बुरु धर्मगाढ़ महा सम्मेलन और बोकारो के ललपनिया में अंतरराष्ट्रीय संथाल सामाजिक एवं सरना धर्म सम्मेलन के जरिए संथाल समाज के लोग अपनी परंपराओं, धार्मिक आस्था और सामाजिक एकता से जुड़े विषयों को प्रमुखता से सामने रखेंगे।
इन आयोजनों की सफलता के लिए बेहतर प्रबंधन, श्रद्धालुओं की सुविधाएं, आवागमन और स्थानीय स्तर पर समन्वय महत्वपूर्ण होंगे। साथ ही, इन सम्मेलनों से जुड़ी चर्चाओं के जरिए आदिवासी संस्कृति के संरक्षण और नई पीढ़ी तक पारंपरिक विरासत पहुंचाने के प्रयासों को भी गति मिल सकती है।
फिलहाल मुख्यमंत्री को दोनों कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। अब इन आयोजनों की तैयारियों और मुख्यमंत्री की संभावित भागीदारी पर नजर रहेगी।