JPSC-JSSC Recruitment Scam : JPSC-JSSC भर्ती अनियमितताओं के विरोध में गिरिडीह में हाई वोल्टेज प्रदर्शन, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन, पुलिस-भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और दो दर्जन से अधिक आंदोलनकारी हिरासत में
JPSC-JSSC Recruitment Scam : गिरिडीह में JPSC-JSSC भर्ती घोटाले के विरोध में भाजपा और छात्र संगठनों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ आक्रोश मार्च निकाला। पुतला दहन रोकने पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प हुई। पुलिस ने भाजपा जिलाध्यक्ष रंजीत राय समेत करीब दो दर्जन लोगों को हिरासत में लेकर कैंप जेल भेज दिया।
JPSC-JSSC Recruitment Scam : झारखंड में जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्र आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में शनिवार को गिरिडीह में भारतीय जनता पार्टी ने छात्र संगठनों के समर्थन में आक्रोश मार्च सह मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन कार्यक्रम आयोजित किया। हालांकि पुलिस प्रशासन ने पुतला दहन रोकने का प्रयास किया, जिसके बाद झंडा मैदान से लेकर आंबेडकर चौक तक तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।
इस दौरान पुलिस और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की, छीना-झपटी और नारेबाजी हुई। अंततः भाजपा जिलाध्यक्ष रंजीत राय समेत लगभग दो दर्जन नेताओं, कार्यकर्ताओं और छात्र आंदोलनकारियों को हिरासत में लेकर गिरिडीह स्टेडियम स्थित कैंप जेल भेज दिया गया।
दरअसल शुक्रवार को छात्र-छात्राओं ने JPSC-JSSC भर्ती घोटाले के विरोध में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया था। इस दौरान कथित तौर पर झामुमो समर्थकों द्वारा आंदोलनकारियों पर हमला किए जाने का आरोप लगाया गया। इसी घटना के विरोध में भाजपा ने शनिवार को जिला मुख्यालय में आक्रोश मार्च का ऐलान किया था।
सुबह से ही झंडा मैदान में भाजपा नेताओं, छात्र संगठनों और बड़ी संख्या में युवाओं का जुटान शुरू हो गया। प्रदर्शन की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की जंबो टीम मौके पर पहुंच गई और पूरे मैदान को चारों ओर से घेर लिया।
भाजपा जिलाध्यक्ष रंजीत राय के नेतृत्व में जैसे ही कार्यकर्ता पुतला दहन की तैयारी करने लगे, पुलिस ने मैदान का मुख्य गेट बंद कर दिया। बड़ी संख्या में पुलिस जवानों की तैनाती कर किसी भी कीमत पर पुतला जलने से रोकने की रणनीति अपनाई गई।
इसके बावजूद आंदोलनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। कार्यकर्ताओं ने मैदान में ही मुख्यमंत्री और जिला प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। माहौल धीरे-धीरे गर्म होता गया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।
सबसे ज्यादा तनाव उस समय पैदा हुआ जब पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से मुख्यमंत्री का पुतला छीनने का प्रयास किया। छीना-झपटी के दौरान पुतला दो हिस्सों में बंट गया। पुलिस एक हिस्सा अपने कब्जे में लेने में सफल रही, जबकि दूसरा हिस्सा आंदोलनकारियों ने झंडा मैदान में ही आग के हवाले कर दिया।
पुतला दहन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। कई बार हालात बेकाबू होने जैसे नजर आए, हालांकि अतिरिक्त पुलिस बल ने स्थिति संभालने का प्रयास किया।
प्रदर्शन के दौरान भाजपा नेत्री प्रो. विनीता कुमारी को पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा घेरने का आरोप भी सामने आया। बाद में महिला सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें अपने संरक्षण में लेकर अलग खड़ा किया। इस घटना के बाद कार्यकर्ताओं का आक्रोश और बढ़ गया तथा उन्होंने पुलिस प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी।
झंडा मैदान में रोक दिए जाने के बाद प्रदर्शनकारी अचानक पुलिस का घेरा तोड़ते हुए बाहर निकल पड़े। नारेबाजी करते हुए सैकड़ों कार्यकर्ता आंबेडकर चौक की ओर बढ़ने लगे। पुलिस भी उनके पीछे दौड़ती रही और जगह-जगह बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने का प्रयास करती रही।
मेन रोड, जेपी चौक और आंबेडकर चौक के आसपास कुछ समय के लिए यातायात भी प्रभावित रहा। एसडीपीओ जीतबाहन उरांव के नेतृत्व में पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन आंदोलनकारी मुख्यमंत्री के इस्तीफे और भर्ती अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़े रहे।
स्थिति लगातार बिगड़ती देख पुलिस ने भाजपा जिलाध्यक्ष रंजीत राय समेत करीब दो दर्जन नेताओं, कार्यकर्ताओं और छात्र आंदोलनकारियों को हिरासत में ले लिया। सभी को पुलिस निगरानी में गिरिडीह स्टेडियम स्थित कैंप जेल भेजा गया।
गिरफ्तारी के बाद भी प्रदर्शन शांत नहीं हुआ। हिरासत में लिए गए नेताओं के समर्थन में अन्य कार्यकर्ताओं ने मेन रोड पर नारेबाजी करते हुए विरोध जारी रखा।
पुलिस की सख्ती के बावजूद आंदोलनकारी अलग-अलग समूहों में बंट गए और शहर के विभिन्न स्थानों पर मुख्यमंत्री का पुतला दहन किया। आंबेडकर चौक, जेपी चौक, महाराजा जरासंध चौक, मुफस्सिल थाना गेट तथा गिरिडीह स्टेडियम के पास भी पुतले जलाए गए।
झंडा मैदान से लेकर स्टेडियम तक प्रदर्शनकारी पैदल मार्च करते रहे और गिरफ्तार नेताओं की रिहाई की मांग करते हुए नारे लगाते रहे।
प्रदर्शन के दौरान कई पुलिस अधिकारियों को भी मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़ा। नगर थाना प्रभारी रतन कुमार सिंह और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई। वहीं, प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के दौरान डीएसपी वन नीरज कुमार सिंह का जूता भी टूट गया, जिसकी चर्चा पूरे घटनाक्रम के दौरान होती रही।
हालांकि पुलिस ने बल प्रयोग की बजाय भीड़ को नियंत्रित करने और गिरफ्तार आंदोलनकारियों को सुरक्षित हिरासत में लेने की रणनीति अपनाई।
गिरिडीह स्टेडियम स्थित कैंप जेल में हिरासत में रखे गए आंदोलनकारियों के लिए मुफस्सिल पुलिस की ओर से पानी और नाश्ते की व्यवस्था भी की गई। प्रशासन का कहना है कि सभी हिरासत में लिए गए लोगों के साथ नियमानुसार व्यवहार किया गया तथा स्थिति सामान्य होने के बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा अब झारखंड की राजनीति का बड़ा केंद्र बनता जा रहा है। छात्र संगठन लगातार पारदर्शी जांच, दोषियों पर कार्रवाई और निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया की मांग कर रहे हैं। भाजपा ने भी इस आंदोलन को खुला समर्थन देते हुए राज्य सरकार पर युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने का आरोप लगाया है।
वहीं, प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है और बिना अनुमति सार्वजनिक पुतला दहन या हिंसक प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जा सकती।
आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और छात्र आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।









