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Usri Bachao Andolan Giridih : उसरी बचाओ आंदोलन: इंटेक वेल निर्माण के विरोध में बनी मानव श्रृंखला, जल-जंगल-पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प

Megha Sinha

Usri Bachao Andolan Giridih : गिरिडीह के उसरी फॉल में प्रस्तावित इंटेक वेल निर्माण और जल दोहन के विरोध में उसरी बचाओ आंदोलन के समर्थन में ग्रामीणों ने मानव श्रृंखला बनाई। आंदोलनकारियों ने जल-जंगल-पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए सरकार से योजना पर पुनर्विचार की मांग की।

Usri Bachao Andolan Giridih : गिरिडीह जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल उसरी फॉल में प्रस्तावित इंटेक वेल निर्माण एवं बड़े पैमाने पर जल दोहन के विरोध में चल रहे उसरी बचाओ आंदोलन को रविवार को एक नई मजबूती मिली। आंदोलन के समर्थन में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं, महिलाओं और विद्यार्थियों ने मानव श्रृंखला बनाकर अपना शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराया। इस दौरान लोगों ने जल, जंगल और पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प लेते हुए सरकार से प्रस्तावित योजना पर पुनर्विचार करने की मांग की।

रविवार को आयोजित इस कार्यक्रम में आसपास के कई गांवों से लोग बड़ी संख्या में पहुंचे। मानव श्रृंखला के माध्यम से आंदोलनकारियों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि उसरी नदी और उसरी फॉल केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि क्षेत्र की प्राकृतिक धरोहर, पर्यावरणीय संतुलन और हजारों लोगों की आजीविका का आधार हैं। लोगों ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के बिना आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित भविष्य की कल्पना नहीं की जा सकती।

मानव श्रृंखला के दौरान पूरे क्षेत्र में “उसरी बचाओ, भविष्य बचाओ”, “जल है तो कल है”, “प्रकृति से खिलवाड़ बंद करो” और “जल-जंगल-जमीन हमारी पहचान” जैसे नारों की गूंज सुनाई दी। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर पर्यावरण संरक्षण के संदेश दिए और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया।

आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रस्तावित इंटेक वेल निर्माण और बड़े पैमाने पर पानी निकासी से उसरी नदी के प्राकृतिक जल प्रवाह पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उनका मानना है कि यदि नदी के जल का अत्यधिक दोहन किया गया तो इसका असर केवल उसरी फॉल की सुंदरता तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि क्षेत्र की जैव विविधता, वन्य जीवों, जल स्रोतों और खेती-किसानी पर भी पड़ेगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी का पानी आसपास के गांवों की जीवनरेखा है और इसके प्राकृतिक स्वरूप से किसी भी प्रकार का समझौता भविष्य में गंभीर संकट पैदा कर सकता है।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि उसरी फॉल झारखंड के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है और यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक पहुंचते हैं। यदि जल प्रवाह प्रभावित होता है तो पर्यटन गतिविधियों पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा, जिससे स्थानीय लोगों की आय और रोजगार के अवसर प्रभावित होंगे। उनका कहना है कि प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण विकास के साथ-साथ होना चाहिए, न कि उनके अस्तित्व को खतरे में डालकर।

मानव श्रृंखला में शामिल महिलाओं और युवाओं ने भी पर्यावरण संरक्षण को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन की सबसे अधिक मार ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ती है। इसलिए किसी भी विकास परियोजना को लागू करने से पहले स्थानीय लोगों की राय लेना और पर्यावरणीय प्रभावों का गंभीर अध्ययन करना आवश्यक है।

आंदोलनकारियों ने सरकार और जिला प्रशासन से मांग की कि उसरी फॉल में प्रस्तावित इंटेक वेल निर्माण एवं जल दोहन की योजना पर पुनर्विचार किया जाए। उनका कहना है कि यदि क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों की अनदेखी कर योजनाओं को आगे बढ़ाया गया तो आने वाले समय में इसके दूरगामी दुष्परिणाम सामने आ सकते हैं। उन्होंने प्रशासन से संवाद स्थापित कर स्थानीय लोगों की चिंताओं को गंभीरता से सुनने और समाधान निकालने की अपील की।

प्रदर्शन में शामिल सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक संख्या में इस जन आंदोलन से जुड़ने और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए आगे आने की अपील की। उनका कहना था कि जल, जंगल और जमीन का संरक्षण सतत विकास की पहली शर्त है।

आंदोलन के दौरान ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य विकास कार्यों का विरोध करना नहीं है, बल्कि ऐसे विकास मॉडल का समर्थन करना है जिसमें पर्यावरण, प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय समुदायों के हितों का समान रूप से ध्यान रखा जाए। उनका कहना है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने उसरी नदी, उसरी फॉल और आसपास के पर्यावरण की रक्षा के लिए सामूहिक संकल्प लिया। लोगों ने कहा कि वे भविष्य में भी पर्यावरण संरक्षण के लिए जनजागरण अभियान चलाएंगे और समाज को प्राकृतिक संसाधनों के महत्व के प्रति जागरूक करेंगे।

आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद करते हुए वे उसरी नदी और उसरी फॉल के संरक्षण की लड़ाई जारी रखेंगे। ग्रामीणों का मानना है कि प्राकृतिक धरोहरों को बचाना केवल वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति भी एक महत्वपूर्ण दायित्व है। इसी उद्देश्य के साथ उसरी बचाओ आंदोलन को लगातार जनसमर्थन मिल रहा है और लोगों की भागीदारी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।