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Jharkhand Home Guard Bharti : साड़ी पहनकर नंगे पांव 1600 मीटर दौड़ी कविता महतो, सरकारी नौकरी के सपने ने बनाई प्रेरणा की मिसाल

Megha Sinha

Jharkhand Home Guard Bharti : रामगढ़ की कविता महतो ने आर्थिक तंगी, पति की मौत और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच होमगार्ड भर्ती की दौड़ साड़ी और नंगे पांव पूरी कर पूरे झारखंड को प्रेरित किया।

Jharkhand Home Guard Bharti : झारखंड के रामगढ़ की कविता महतो की प्रेरणादायक कहानी। पति की मौत के बाद दो बच्चों और परिवार की जिम्मेदारी निभाते हुए होमगार्ड भर्ती के फिजिकल टेस्ट में साड़ी पहनकर और नंगे पांव 1600 मीटर दौड़ पूरी की। पढ़ें पूरी खबर।

Jharkhand Home Guard Bharti : झारखंड के रामगढ़ जिले से एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने हजारों युवाओं, खासकर महिलाओं के हौसलों को नई उड़ान देने का काम किया है। यह कहानी है कविता महतो की, जिन्होंने जिंदगी की तमाम मुश्किलों के बावजूद हार मानने के बजाय संघर्ष का रास्ता चुना। आर्थिक तंगी, पति की असमय मौत, दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी और परिवार का बोझ—इन सबके बीच भी उनका सपना सिर्फ एक था, सरकारी नौकरी हासिल कर अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करना।

कविता महतो की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। इनमें वह साड़ी पहनकर और नंगे पांव होमगार्ड भर्ती के 1600 मीटर फिजिकल टेस्ट में दौड़ लगाती हुई नजर आ रही हैं। यह दृश्य देखने वालों की आंखें नम कर रहा है और हर कोई उनके जज्बे को सलाम कर रहा है।

जानकारी के अनुसार, कविता महतो के पति दीपक महतो गुजरात में मजदूरी करते थे। परिवार की आजीविका का पूरा जिम्मा उन्हीं पर था। लेकिन अचानक बीमारी के कारण उनकी मौत हो गई। इलाज के दौरान परिवार पर कर्ज भी चढ़ गया। पति के निधन के बाद कविता पर दो छोटे बच्चों के पालन-पोषण के साथ-साथ सास-ससुर की देखभाल की जिम्मेदारी भी आ गई।

घर की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर हो गई कि रोजमर्रा का खर्च चलाना भी मुश्किल हो गया। ऐसे हालात में भी कविता ने हिम्मत नहीं हारी और अपने परिवार को संभालने के लिए मजदूरी का रास्ता चुना।

कविता का हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता है। वह रोज सुबह करीब चार बजे उठती हैं, सबसे पहले दौड़ की तैयारी करती हैं ताकि होमगार्ड भर्ती के फिजिकल टेस्ट के लिए खुद को तैयार रख सकें। इसके बाद घर के सभी काम निपटाती हैं और फिर परिवार का खर्च चलाने के लिए ईंट भट्ठे में मजदूरी करने पहुंच जाती हैं।

दिनभर की कड़ी मेहनत और शारीरिक थकान के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद ही उन्हें हर दिन आगे बढ़ने की ताकत देती रही।

होमगार्ड भर्ती के फिजिकल टेस्ट के दौरान जब अन्य अभ्यर्थी स्पोर्ट्स शूज़ और ट्रैक सूट में मैदान में पहुंचे, तब कविता महतो साधारण साड़ी पहनकर और बिना जूते के दौड़ के लिए मैदान में उतरीं।

बताया जा रहा है कि उन्होंने 1600 मीटर की दौड़ करीब छह मिनट में पूरी कर ली। तपती जमीन, नंगे पैर और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने कदम नहीं रोके। उनका यह साहस अब पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया है।

कविता की आर्थिक स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके पास दौड़ने के लिए स्पोर्ट्स शूज़ या ट्रैक सूट खरीदने तक के पैसे नहीं थे। लेकिन उन्होंने संसाधनों की कमी को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।

उन्होंने यह साबित कर दिया कि सफलता केवल सुविधाओं से नहीं, बल्कि मजबूत इरादों और मेहनत से हासिल होती है।

कविता महतो की कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग उन्हें संघर्ष, आत्मविश्वास और मेहनत की मिसाल बता रहे हैं। हजारों लोग उनकी तस्वीरें साझा कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना कर रहे हैं।

कई लोगों का कहना है कि कविता जैसी महिलाएं समाज के लिए प्रेरणा हैं, जो विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानतीं। वहीं कुछ लोगों ने सरकार और समाज से ऐसे जरूरतमंद प्रतिभाशाली अभ्यर्थियों की मदद करने की भी अपील की है।

कविता महतो की कहानी सिर्फ एक भर्ती परीक्षा तक सीमित नहीं है। यह उन लाखों महिलाओं की कहानी है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद अपने परिवार और बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए हर दिन संघर्ष करती हैं।

उन्होंने यह संदेश दिया है कि परिस्थितियां चाहे जितनी कठिन हों, अगर इरादे मजबूत हों तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।