Jharkhand Industrial Policy : झारखंड सरकार ने टेक्सटाइल, परिधान, फुटवियर और औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2026 के मसौदे किए सार्वजनिक, उद्योग जगत, विशेषज्ञों और आम नागरिकों से मांगे सुझाव; 8-9 जुलाई को नई दिल्ली में होगा राष्ट्रीय हितधारक परामर्श कार्यक्रम।
Jharkhand Industrial Policy : झारखंड सरकार ने टेक्सटाइल एवं औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति 2026 के ड्राफ्ट जारी कर हितधारकों से सुझाव मांगे हैं। नई दिल्ली में 8-9 जुलाई को राष्ट्रीय परामर्श कार्यक्रम आयोजित होगा, जिससे राज्य में निवेश और रोजगार को नई गति मिलने की उम्मीद है।
रांची: झारखंड सरकार ने राज्य को औद्योगिक विकास के नए दौर में ले जाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उद्योग निदेशालय ने झारखंड टेक्सटाइल, परिधान एवं फुटवियर नीति 2026 तथा झारखंड औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति (JIIPP) 2026 के प्रारूप (ड्राफ्ट) सार्वजनिक कर दिए हैं। सरकार ने इन दोनों नीतियों पर उद्योग जगत, विशेषज्ञों, निवेशकों, व्यापारिक संगठनों और आम नागरिकों से सुझाव एवं प्रतिक्रिया आमंत्रित की है, ताकि अंतिम रूप देने से पहले व्यापक विचार-विमर्श सुनिश्चित किया जा सके।
राज्य सरकार का मानना है कि उद्योगों के विकास में सभी हितधारकों की भागीदारी आवश्यक है। इसी उद्देश्य से दोनों नीतियों के विस्तृत प्रारूप झारखंड सिंगल विंडो पोर्टल पर सार्वजनिक किए गए हैं। इससे कोई भी इच्छुक व्यक्ति या संस्था इन नीतियों का अध्ययन कर अपने सुझाव सरकार तक पहुंचा सकती है।
औद्योगिक निवेश को मिलेगा नया प्रोत्साहन
झारखंड लंबे समय से खनिज संपदा के लिए देशभर में जाना जाता है, लेकिन अब सरकार राज्य की अर्थव्यवस्था को केवल खनन तक सीमित नहीं रखना चाहती। नई औद्योगिक नीतियों का उद्देश्य विनिर्माण, टेक्सटाइल, परिधान, फुटवियर और अन्य आधुनिक उद्योगों को बढ़ावा देकर राज्य में विविध औद्योगिक आधार तैयार करना है।
सरकार का लक्ष्य है कि नई नीति के माध्यम से घरेलू और विदेशी निवेशकों को आकर्षित किया जाए, जिससे नए उद्योग स्थापित हों, उत्पादन क्षमता बढ़े और राज्य की आर्थिक गतिविधियों में तेजी आए। इससे स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होने की उम्मीद है।
टेक्सटाइल और फुटवियर सेक्टर पर विशेष फोकस
नई झारखंड टेक्सटाइल, परिधान एवं फुटवियर नीति 2026 के माध्यम से राज्य में टेक्सटाइल उद्योग को नई पहचान देने की तैयारी की जा रही है। सरकार चाहती है कि झारखंड केवल कच्चे संसाधनों का उत्पादक राज्य न रहे, बल्कि मूल्य संवर्धन (Value Addition) के माध्यम से तैयार उत्पादों के निर्माण का भी प्रमुख केंद्र बने।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टेक्सटाइल और परिधान उद्योग को उचित प्रोत्साहन मिला तो महिलाओं और युवाओं के लिए बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर विकसित होंगे। यह क्षेत्र अपेक्षाकृत कम लागत में अधिक रोजगार उपलब्ध कराने वाला उद्योग माना जाता है।
JIIPP 2026 से निवेशकों को मिलेगा बेहतर माहौल
झारखंड औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन नीति (JIIPP) 2026 का उद्देश्य राज्य में निवेश प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और निवेशक-अनुकूल बनाना है। नई नीति के तहत निवेशकों को बेहतर सुविधाएं, त्वरित अनुमोदन प्रक्रिया, औद्योगिक आधारभूत संरचना का विकास तथा विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।
सरकार का मानना है कि यदि निवेश प्रक्रिया आसान होगी तो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां झारखंड में निवेश करने के लिए अधिक आकर्षित होंगी। इससे औद्योगिक उत्पादन के साथ-साथ राज्य के राजस्व में भी वृद्धि होगी।
राष्ट्रीय स्तर पर होगा हितधारक परामर्श कार्यक्रम
इन नीतियों को अंतिम रूप देने से पहले सरकार राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक परामर्श प्रक्रिया भी आयोजित कर रही है। इसी क्रम में 8 और 9 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में दो दिवसीय राष्ट्रीय हितधारक परामर्श कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
इस कार्यक्रम में देशभर के प्रमुख उद्योगपति, विनिर्माण क्षेत्र के प्रतिनिधि, टेक्सटाइल विशेषज्ञ, नीति निर्माता, अर्थशास्त्री तथा निवेशक भाग लेंगे। कार्यक्रम के दौरान दोनों नीतियों के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होगी और प्राप्त सुझावों के आधार पर आवश्यक संशोधन किए जा सकते हैं।
मुख्यमंत्री करेंगे विशेष फीडबैक सत्र की अध्यक्षता
9 जुलाई को आयोजित होने वाले विशेष फीडबैक सत्र की अध्यक्षता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे। इस सत्र में उद्योग जगत के प्रतिनिधि सीधे अपने सुझाव और अनुभव साझा करेंगे। सरकार का प्रयास है कि नीति निर्माण में उद्योगों की वास्तविक आवश्यकताओं और चुनौतियों को शामिल किया जाए।
यह पहली बार नहीं है जब झारखंड सरकार ने किसी औद्योगिक नीति को अंतिम रूप देने से पहले इतने व्यापक स्तर पर हितधारकों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया है। इससे नीतियों की स्वीकार्यता और प्रभावशीलता दोनों बढ़ने की संभावना है।
MoU पर हस्ताक्षर की भी संभावना
दो दिवसीय कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की संभावना जताई जा रही है। यदि ये समझौते सफल होते हैं तो राज्य में नए औद्योगिक प्रोजेक्ट, निवेश और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए निवेश से उत्पादन इकाइयों की स्थापना होगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा और छोटे एवं मध्यम उद्योगों को भी लाभ मिलेगा। इससे राज्य की औद्योगिक श्रृंखला (Industrial Ecosystem) और अधिक मजबूत हो सकती है।
पारदर्शी नीति निर्माण पर सरकार का जोर
सरकार ने दोनों नीतियों के ड्राफ्ट सार्वजनिक कर यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वह नीति निर्माण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सहभागी बनाना चाहती है। किसी भी नई औद्योगिक नीति की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसमें उद्योग, निवेशक और समाज के विभिन्न वर्गों की जरूरतों को कितना समाहित किया गया है।
ड्राफ्ट सार्वजनिक होने से उद्योग संगठनों, व्यापारिक संस्थाओं, विशेषज्ञों और आम नागरिकों को भी अपनी राय रखने का अवसर मिलेगा। अंतिम कैबिनेट मंजूरी से पहले प्राप्त सुझावों पर विचार कर आवश्यक बदलाव किए जाएंगे।
आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
उद्योग निदेशालय के अनुसार, इन नीतियों का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना नहीं बल्कि झारखंड को आर्थिक रूप से अधिक आत्मनिर्भर और औद्योगिक रूप से सशक्त बनाना भी है। यदि इन नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है तो आने वाले वर्षों में झारखंड देश के प्रमुख औद्योगिक राज्यों की सूची में अपनी मजबूत पहचान बना सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि खनिज संपदा, बेहतर कनेक्टिविटी, औद्योगिक भूमि, कुशल मानव संसाधन और नई निवेश नीतियों का समन्वय झारखंड को विनिर्माण क्षेत्र का उभरता हुआ केंद्र बना सकता है। अब सभी की निगाहें आगामी हितधारक परामर्श कार्यक्रम और उसके बाद सरकार द्वारा अंतिम रूप से जारी की जाने वाली औद्योगिक नीतियों पर टिकी हैं।
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