Jharkhand News : लालगढ़ बिहार और पांजरिकला गांव के ग्रामीणों को मिलेगी राहत? हाई कोर्ट ने रेलवे को निर्माण कार्य पूरा करने और बरसात में अंडरपास में पानी भरने की समस्या दूर करने का निर्देश दिया। 12 मार्च 2027 तक अनुपालन शपथपत्र दाखिल करना होगा।
Jharkhand News : झारखंड हाई कोर्ट ने पलामू जिले के विश्रामपुर प्रखंड में लालगढ़ बिहार और पांजरिकला गांव के बीच रेलवे अंडरपास का निर्माण चार महीने में पूरा करने का निर्देश दिया है। अदालत ने बरसात में अंडरपास में पानी भरने की समस्या का स्थायी समाधान करने को कहा है। हालांकि, कोर्ट ने रेलवे ओवरब्रिज या मानवयुक्त रेलवे क्रॉसिंग बनाने का आदेश देने से इनकार कर दिया। मामले में अनुपालन की समीक्षा के लिए 18 मार्च 2027 को सुनवाई होगी।
Jharkhand News : झारखंड के पलामू जिले में रेलवे लाइन पार करने के दौरान ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने अहम निर्देश दिया है। अदालत ने रेलवे को लालगढ़ बिहार और पांजरिकला गांव के बीच निर्माणाधीन रेलवे अंडरपास का काम चार महीने के भीतर पूरा करने को कहा है। इसके साथ ही बरसात के मौसम में अंडरपास में पानी भरने की समस्या का स्थायी समाधान करने का निर्देश भी दिया गया है।
यह मामला विश्रामपुर प्रखंड के उन ग्रामीणों की परेशानी से जुड़ा है, जिन्हें रेलवे लाइन के दूसरी ओर आने-जाने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों की चिंता यह है कि अंडरपास का निर्माण पूरा होने के बाद भी यदि उसमें बारिश का पानी जमा होता रहा, तो आवागमन की समस्या बनी रहेगी। ऐसी स्थिति में लोगों के सामने रेलवे ट्रैक पार करने या पानी से भरे अंडरपास से गुजरने का जोखिम पैदा हो सकता है।
झारखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए रेलवे को निर्माण कार्य और जलभराव की समस्या पर आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया। अदालत का जोर इस बात पर रहा कि ग्रामीणों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा मिले और रेलवे लाइन पार करने के दौरान संभावित दुर्घटनाओं का खतरा कम किया जा सके।
लालगढ़ बिहार रेलवे स्टेशन और पांजरिकला गांव के बीच रेलवे लाइन ग्रामीणों के लिए आवागमन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है। स्थानीय लोगों की ओर से लंबे समय से रेलवे लाइन पार करने के लिए सुरक्षित व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग की जा रही थी।
ग्रामीणों की परेशानी केवल रेलवे ट्रैक पार करने तक सीमित नहीं है। बरसात के दिनों में अंडरपास में पानी भर जाने से रास्ते का उपयोग करना मुश्किल हो जाता है। इसका असर स्कूली बच्चों, कामकाज के लिए आने-जाने वाले लोगों और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए घर से निकलने वाले ग्रामीणों पर पड़ सकता है।
याचिकाकर्ता लालगढ़ वेलफेयर सोसाइटी ने जनहित याचिका के माध्यम से इस समस्या को अदालत के सामने रखा। याचिका में कहा गया कि अंडरपास का निर्माण ग्रामीणों की समस्या का पूर्ण समाधान नहीं है, क्योंकि बारिश के दौरान जलभराव होने पर लोगों को फिर से परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
याचिकाकर्ता की ओर से इसी आधार पर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) या मानवयुक्त रेलवे क्रॉसिंग की व्यवस्था करने की मांग की गई थी। उनका तर्क था कि लोगों को ऐसा सुरक्षित विकल्प मिलना चाहिए, जिससे उन्हें रेलवे ट्रैक पार करने के लिए अपनी जान जोखिम में न डालनी पड़े।
रेलवे अंडरपास का उद्देश्य रेलवे लाइन के नीचे से सुरक्षित आवागमन की सुविधा उपलब्ध कराना है। लेकिन यदि बारिश के दौरान अंडरपास में पानी जमा हो जाए, तो यह सुविधा ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है।
लालगढ़ बिहार और पांजरिकला के मामले में भी जलभराव की समस्या को प्रमुखता से उठाया गया। याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि बारिश के समय अंडरपास में पानी भरने से लोगों का आवागमन प्रभावित होता है। खासकर स्कूली बच्चों और अन्य ग्रामीणों के लिए यह स्थिति जोखिमपूर्ण हो सकती है।
ऐसे में केवल निर्माण कार्य पूरा करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि जलनिकासी की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करना भी जरूरी है। अदालत ने इसी पहलू को ध्यान में रखते हुए रेलवे को जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करने का निर्देश दिया है।
हालांकि, स्थायी समाधान के लिए रेलवे की ओर से कौन-सी तकनीकी व्यवस्था अपनाई जाएगी, इस संबंध में विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। वास्तविक राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्माण कार्य समय पर पूरा होने के साथ-साथ पानी की निकासी की व्यवस्था कितनी प्रभावी बनाई जाती है।
सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से अदालत को बताया गया कि संबंधित स्थान पर ग्रामीण लंबे समय से मानवयुक्त रेलवे क्रॉसिंग या रेलवे ओवरब्रिज बनाने की मांग कर रहे हैं। रेलवे के अनुसार, इस स्थान पर लोग अनधिकृत तरीके से रेलवे ट्रैक पार करते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
रेलवे ने अपने पक्ष में कहा कि मौजूदा नीति के तहत नई रेलवे क्रॉसिंग खोलने का प्रावधान नहीं है। रेलवे की ओर से दुर्घटनाओं की आशंका कम करने के उद्देश्य से पुरानी क्रॉसिंग को भी धीरे-धीरे समाप्त कर उनकी जगह अंडरपास या ओवरब्रिज जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं।
रेलवे ने यह भी दलील दी कि संबंधित स्थान पर ओवरब्रिज बनाने के लिए निर्धारित मानक पूरे नहीं होते हैं। इसके अलावा, राज्य सरकार की ओर से निर्माण लागत में हिस्सेदारी को लेकर सहमति नहीं मिलने की बात भी अदालत के सामने रखी गई।
इन दलीलों और मामले के तकनीकी पहलुओं पर विचार करने के बाद अदालत ने रेलवे ओवरब्रिज या मानवयुक्त रेलवे क्रॉसिंग बनाने का सीधा आदेश देने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस तरह के निर्माण की जरूरत, व्यवहार्यता और तकनीकी उपयुक्तता का निर्धारण विशेषज्ञों और संबंधित विभागों का विषय है।
इसका अर्थ है कि फिलहाल अदालत का निर्देश अंडरपास का निर्माण पूरा करने और जलभराव की समस्या दूर करने पर केंद्रित है। ओवरब्रिज या मानवयुक्त क्रॉसिंग की मांग पर याचिकाकर्ता को तत्काल राहत नहीं मिली।
अदालत ने रेलवे अधिकारियों को अपने निर्देशों के अनुपालन के संबंध में 12 मार्च 2027 तक शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके बाद मामले में अनुपालन की स्थिति की समीक्षा के लिए 18 मार्च 2027 को अगली सुनवाई निर्धारित की गई है।
इस समयसीमा का महत्व इसलिए भी है, क्योंकि ग्रामीणों की समस्या का समाधान केवल आदेश जारी होने से नहीं, बल्कि जमीन पर उसका प्रभावी क्रियान्वयन होने से होगा। निर्माण कार्य की प्रगति, अंडरपास की उपयोगिता और बरसात के दौरान पानी की निकासी की व्यवस्था इस मामले में महत्वपूर्ण पहलू होंगे।
अदालत ने लालगढ़ वेलफेयर सोसाइटी की जनहित याचिका का निष्पादन कर दिया है। अब रेलवे को निर्धारित निर्देशों के पालन की स्थिति अदालत के सामने प्रस्तुत करनी होगी।
पलामू के लालगढ़ बिहार और पांजरिकला गांव के लोगों के लिए यह मामला रोजमर्रा की आवाजाही और सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। रेलवे लाइन पार करने के दौरान दुर्घटना की आशंका और बरसात में अंडरपास में पानी भरने की समस्या, दोनों ही स्थानीय लोगों की चिंताओं का हिस्सा हैं।