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Jharkhand News : झारखंड में अवैध शराब पर कड़ा प्रहार, उत्पाद विभाग को दिए बड़े निर्देश, आदिवासी समुदाय को प्राथमिकता देने सहित कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी

Megha Sinha

Jharkhand News : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अवैध शराब निर्माण, तस्करी, विभागीय रिक्तियों, नई मदिरा नीति, जीपीएस ट्रैकिंग और स्थानीय आदिवासी समुदाय को प्राथमिकता देने सहित कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए।

Jharkhand News : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की समीक्षा बैठक में अवैध शराब पर सख्ती, नई मदिरा नीति, जीपीएस ट्रैकिंग, विभागीय बहाली और 4,500 करोड़ रुपये के राजस्व लक्ष्य को लेकर अहम निर्देश दिए। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

रांची: झारखंड सरकार ने राज्य में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, परिवहन और तस्करी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने झारखंड मंत्रालय में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राज्य में अवैध मदिरा के पूरे नेटवर्क पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि अवैध शराब केवल सरकारी राजस्व को नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि लोगों के जीवन और स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनती है। इसलिए ऐसे कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ त्वरित, प्रभावी और निरंतर कार्रवाई की जाए।

बैठक में उत्पाद एवं मद्य निषेध मंत्री योगेंद्र प्रसाद, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, विभाग के प्रधान सचिव अमिताभ कौशल, उत्पाद आयुक्त संदीप सिंह, झारखंड राज्य बिवरेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (JSBCL) के एमडी नीरज कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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वित्तीय वर्ष 2025-26 में राजस्व लक्ष्य से अधिक संग्रह

समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को विभाग के राजस्व संग्रह की विस्तृत जानकारी दी। बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग ने निर्धारित 3,885.11 करोड़ रुपये के लक्ष्य को पार करते हुए 4,013.53 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। यह विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।

वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए सरकार ने 4,500 करोड़ रुपये का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। अधिकारियों के अनुसार जुलाई 2026 के मध्य तक विभाग 1,376 करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह कर चुका है, जो वार्षिक लक्ष्य का लगभग 30.57 प्रतिशत है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को इस गति को बनाए रखने और राजस्व बढ़ाने के लिए पारदर्शी एवं प्रभावी व्यवस्था अपनाने का निर्देश दिया।


अवैध शराब निर्माण और तस्करी पर हर हाल में लगे रोक

मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड में अवैध शराब निर्माण, बिक्री, भंडारण और तस्करी के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहरीली और अवैध शराब कई बार लोगों की जान तक ले लेती है, इसलिए यह केवल राजस्व का विषय नहीं बल्कि जनस्वास्थ्य और कानून व्यवस्था से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी जिलों में लगातार छापेमारी अभियान चलाया जाए, अवैध कारोबार से जुड़े लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए तथा विभागीय निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाए।

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आधुनिक तकनीक से होगी मदिरा परिवहन की निगरानी

मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने विभाग को तकनीकी रूप से और अधिक सक्षम बनाने पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि राज्य में मदिरा परिवहन करने वाले सभी वाहनों में जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम और डिजिटल (DG) लॉक की व्यवस्था अनिवार्य की जाए।

उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से वाहनों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। वाहन किस मार्ग से गुजर रहा है, कहां रुका है और उसका अंतिम गंतव्य क्या है, इसकी पूरी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध रहेगी। इससे परिवहन प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि राज्य में स्पिरिट की वर्तमान और भविष्य की मांग, उसके औद्योगिक उपयोग तथा उससे मिलने वाले संभावित राजस्व का विस्तृत अध्ययन कर ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।


नई मदिरा विनिर्माण नीति तैयार करने के निर्देश

बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य के लिए व्यापक मदिरा विनिर्माण नीति तैयार करने पर भी जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विभिन्न प्रकार की मदिरा के निर्माण, वितरण और नियमन के लिए स्पष्ट एवं आधुनिक नीति बनाई जाए।

इसके साथ ही औद्योगिक अल्कोहल के विनियमन के लिए अलग नीति तैयार करने का निर्देश भी दिया गया। मुख्यमंत्री ने लेबल रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को सरल और तेज बनाने की आवश्यकता बताई ताकि लोकप्रिय ब्रांड्स की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके और उपभोक्ताओं को बेहतर विकल्प मिल सकें।

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विभाग की रिक्तियों को जल्द भरने का निर्देश

मुख्यमंत्री ने उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग में रिक्त पदों की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विभागीय योजनाओं और जिम्मेदारियों का प्रभावी क्रियान्वयन तभी संभव होगा जब पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित और दक्ष मानव संसाधन उपलब्ध हों।

उन्होंने झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) के माध्यम से नियमित बहाली की प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए और कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध होनी चाहिए।

बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि JSSC के माध्यम से चयनित 583 उत्पाद सिपाहियों को नियुक्ति पत्र देने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। मुख्यमंत्री ने इसे शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए ताकि विभाग की कार्यक्षमता और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत बनाया जा सके।


गोदाम निर्माण में स्थानीय आदिवासी समुदाय को मिले प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने विभाग के विभिन्न जिलों में बनने वाले गोदामों के निर्माण कार्यों में स्थानीय आदिवासी समुदाय को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विभागीय विकास कार्य केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से नहीं बल्कि जनहित और स्थानीय विकास को ध्यान में रखते हुए किए जाएं, ताकि योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

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तकनीक आधारित निरीक्षण व्यवस्था होगी मजबूत

मुख्यमंत्री ने विभाग के निरीक्षण और पर्यवेक्षण कार्यों में आधुनिक तकनीकों का अधिकतम उपयोग करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल मॉनिटरिंग, डेटा आधारित निगरानी और आधुनिक सूचना प्रणाली अपनाने से विभाग की कार्यक्षमता बढ़ेगी तथा भ्रष्टाचार और अवैध गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।


सरकार का लक्ष्य: राजस्व बढ़े, अवैध कारोबार खत्म हो

समीक्षा बैठक से स्पष्ट संकेत मिला कि झारखंड सरकार आने वाले समय में उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग को अधिक तकनीक आधारित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना चाहती है। सरकार एक ओर राजस्व संग्रह को मजबूत करने पर जोर दे रही है तो दूसरी ओर अवैध शराब के कारोबार को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में भी ठोस रणनीति बना रही है।

नई मदिरा नीति, जीपीएस ट्रैकिंग, डिजिटल लॉक, स्पिरिट उपयोग का अध्ययन, रिक्त पदों पर नियुक्ति और स्थानीय समुदायों को रोजगार जैसे निर्णय इस बात का संकेत हैं कि विभाग को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में सरकार गंभीरता से काम कर रही है।