Jharkhand News : झारखंड की वांछित मानव तस्कर को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। संयुक्त अभियान में खूंटी जिले की एक पीड़िता का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। जानिए पूरी कार्रवाई, विभाग की जीरो टॉलरेंस नीति और पुनर्वास की प्रक्रिया।
Jharkhand News : झारखंड सरकार के महिला एवं बाल विकास विभाग की पहल और विभिन्न एजेंसियों के समन्वित प्रयास से मानव तस्करी के खिलाफ एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। शनिवार सुबह नई दिल्ली में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान झारखंड की एक वांछित महिला मानव तस्कर को गिरफ्तार कर लिया गया। इसी अभियान के दौरान खूंटी जिले की मानव तस्करी की शिकार एक बालिका को भी सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। यह कार्रवाई चाईबासा पुलिस, दिल्ली पुलिस, एक स्थानीय गैर-सरकारी संगठन (एनजीओ) तथा झारखंड भवन, नई दिल्ली स्थित एकीकृत पुनर्वास सह संसाधन केंद्र की संयुक्त रणनीति के तहत की गई।
मानव तस्करी के विरुद्ध चलाए गए इस अभियान को झारखंड सरकार की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। लंबे समय से फरार चल रही आरोपी के खिलाफ वर्ष 2023 से चाईबासा में मानव तस्करी के कई मामलों में प्राथमिकी दर्ज थी। न्यायालय द्वारा उसके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया जा चुका था, लेकिन लगातार प्रयासों के बावजूद वह पुलिस की गिरफ्त से बाहर थी।
सूत्रों के अनुसार चाईबासा पुलिस पूर्व में कई बार दिल्ली पहुंचकर आरोपी की तलाश कर चुकी थी, लेकिन हर बार वह गिरफ्तारी से बच निकलने में सफल रही। इस बार पुलिस ने रणनीति में बदलाव करते हुए दिल्ली पुलिस, स्थानीय एनजीओ और झारखंड सरकार के एकीकृत पुनर्वास सह संसाधन केंद्र के साथ मिलकर संयुक्त अभियान की योजना बनाई। पिछले दो से तीन दिनों तक आरोपी के संभावित ठिकानों और उसके संपर्क में रहने वाले लोगों पर लगातार नजर रखी गई। विस्तृत रेकी और तकनीकी सूचनाओं के आधार पर शनिवार सुबह लगभग छह बजे पुलिस टीम ने उसके ठिकाने पर दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से चाईबासा पुलिस को चार दिनों की रिमांड मिली है। पुलिस अब उससे पूछताछ कर मानव तस्करी के पूरे नेटवर्क, उसके सहयोगियों, पीड़ितों की संख्या तथा अन्य राज्यों में फैले संपर्कों की जानकारी जुटाने में लगी हुई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं, जिससे मानव तस्करी के बड़े गिरोह का पर्दाफाश होने की संभावना है।
इसी अभियान के दौरान पुलिस ने एक अन्य संदिग्ध मानव तस्कर को भी गिरफ्तार किया। उसके घर पर छापेमारी के दौरान खूंटी जिले की एक बालिका को बरामद किया गया, जिसे कथित रूप से मानव तस्करी के माध्यम से दिल्ली लाया गया था। बालिका को दिल्ली के सुभाष प्लेस थाना क्षेत्र से सुरक्षित रेस्क्यू किया गया। बचाव के तुरंत बाद उसका चिकित्सीय परीक्षण कराया गया और वर्तमान में उसे सुरक्षित गृह में रखा गया है।
निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत बालिका को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। समिति के निर्देशानुसार उसके सुरक्षित पुनर्वास, परामर्श, शिक्षा और गृह वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि पीड़िता को मानसिक और सामाजिक रूप से सामान्य जीवन में लौटाने के लिए आवश्यक सभी सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव उमाशंकर सिंह ने इस कार्रवाई को मानव तस्करी के विरुद्ध सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकार की नीति मानव तस्करी के मामलों में पूरी तरह जीरो टॉलरेंस की है। किसी भी जिले से ऐसी सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित जिले के जिला समाज कल्याण पदाधिकारी तथा जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी की संयुक्त टीम को अन्य राज्यों में भी भेजा जाएगा, ताकि पीड़ित बच्चों और महिलाओं को सुरक्षित रेस्क्यू कर उनके गृह राज्य वापस लाया जा सके।
उन्होंने कहा कि केवल पीड़ितों को बचा लेना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सम्मानजनक पुनर्वास भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से झारखंड सरकार पुनर्वास के बाद बच्चों और महिलाओं को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ती है। शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य सुविधाओं और आर्थिक सहायता जैसी योजनाओं के माध्यम से उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाता है ताकि वे भविष्य में दोबारा मानव तस्करी के जाल में न फंसें।
महिला एवं बाल विकास विभाग के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में राज्य सरकार ने मानव तस्करी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया है। इसके परिणामस्वरूप अब तक झारखंड के सैकड़ों बच्चों और महिलाओं को देश के विभिन्न राज्यों से सुरक्षित रेस्क्यू कर उनके परिवारों तक पहुंचाया गया है। पुनर्वास के बाद इन पीड़ितों को सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने के साथ-साथ उनकी नियमित निगरानी भी की जाती है, जिससे उनके जीवन में स्थायी बदलाव सुनिश्चित हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड मानव तस्करी से प्रभावित राज्यों में शामिल रहा है, जहां आर्थिक कठिनाइयों, बेरोजगारी और जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर अपराधी महिलाओं और बच्चों को रोजगार, शिक्षा या बेहतर जीवन का झांसा देकर दूसरे राज्यों में ले जाते हैं। कई मामलों में पीड़ितों को घरेलू काम, जबरन मजदूरी या अन्य शोषणकारी गतिविधियों में धकेल दिया जाता है। ऐसे में पुलिस, प्रशासन और सामाजिक संगठनों के बीच समन्वित कार्रवाई बेहद महत्वपूर्ण साबित होती है।
नई दिल्ली स्थित एकीकृत पुनर्वास सह संसाधन केंद्र, झारखंड भवन इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित यह केंद्र संकटग्रस्त परिस्थितियों में फंसी महिलाओं और बच्चों की पहचान, बचाव, अस्थायी संरक्षण, कानूनी सहायता, परामर्श, पुनर्वास और गृह वापसी की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से संचालित करता है। विभिन्न राज्यों की पुलिस और सामाजिक संस्थाओं के साथ समन्वय स्थापित कर यह केंद्र मानव तस्करी के मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करता है।
अधिकारियों के अनुसार शनिवार को हुई पूरी कार्रवाई झारखंड भवन के स्थानिक आयुक्त अरवा राजकमल के निर्देशन और मार्गदर्शन में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस अभियान ने एक बार फिर यह साबित किया है कि यदि विभिन्न एजेंसियां समन्वय के साथ कार्य करें तो मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
झारखंड सरकार ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में बच्चों या महिलाओं की संदिग्ध आवाजाही, झूठे रोजगार के नाम पर ले जाने या मानव तस्करी से जुड़ी किसी भी गतिविधि की जानकारी मिले तो तत्काल स्थानीय पुलिस अथवा संबंधित विभाग को सूचित करें। समय पर दी गई सूचना कई मासूम जिंदगियों को अपराधियों के चंगुल से बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है।

