Jharkhand News : मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र बरहेट में दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पुण्यतिथि पर उनकी आदमकद प्रतिमा का भव्य अनावरण किया गया। कार्यक्रम में मंत्री दीपक बिरुआ, मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि पंकज मिश्रा और विधायक एम.टी. राजा सहित हजारों लोग शामिल हुए।
Jharkhand News : मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र बरहेट में झारखंड आंदोलन के महानायक, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक, पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व सांसद दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पुण्यतिथि के अवसर पर भव्य श्रद्धांजलि सभा और आदमकद प्रतिमा अनावरण समारोह का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर पूरे क्षेत्र में श्रद्धा, सम्मान और जनभागीदारी का अनूठा दृश्य देखने को मिला। कार्यक्रम में राज्य सरकार के मंत्री, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, झामुमो कार्यकर्ता और हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने भाग लेकर दिशोम गुरु को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

समारोह का मुख्य आकर्षण दिशोम गुरु शिबू सोरेन की विशाल आदमकद प्रतिमा का अनावरण रहा। पारंपरिक रीति-रिवाजों और विधि-विधान के साथ प्रतिमा का अनावरण किया गया। जैसे ही प्रतिमा से आवरण हटाया गया, पूरा परिसर तालियों की गड़गड़ाहट और “दिशोम गुरु अमर रहें” तथा “जब तक सूरज चांद रहेगा, गुरु जी का नाम रहेगा” जैसे नारों से गूंज उठा। उपस्थित लोगों ने पुष्प अर्पित कर झारखंड आंदोलन के इस महान योद्धा को नमन किया।
कार्यक्रम में राज्य के कैबिनेट मंत्री दीपक बिरुआ, मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि पंकज मिश्रा और राजमहल विधायक एम.टी. राजा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभी अतिथियों ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए और दिशोम गुरु के संघर्ष, त्याग और समाज के प्रति उनके योगदान को याद किया। कार्यक्रम के दौरान कई वरिष्ठ नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी मंच साझा किया।
अपने संबोधन में मंत्री दीपक बिरुआ ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन केवल एक राजनीतिक नेता नहीं थे, बल्कि झारखंड की आत्मा और शोषित, वंचित तथा आदिवासी समाज की बुलंद आवाज थे। उन्होंने कहा कि गुरुजी ने अपना पूरा जीवन जल, जंगल और जमीन की रक्षा, महाजनी प्रथा के खिलाफ संघर्ष और आदिवासियों तथा मूलवासियों के अधिकारों की लड़ाई को समर्पित कर दिया। उनके अथक संघर्ष और त्याग के कारण ही अलग झारखंड राज्य का सपना साकार हो सका।

दीपक बिरुआ ने कहा कि गुरुजी के संघर्ष ने लाखों लोगों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए यह प्रतिमा केवल एक स्मारक नहीं, बल्कि संघर्ष, समर्पण और सामाजिक न्याय का प्रतीक बनेगी। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे दिशोम गुरु के आदर्शों को आत्मसात कर समाज और राज्य के विकास में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि पंकज मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि बरहेट की धरती हमेशा से दिशोम गुरु के विचारों और संघर्ष की कर्मभूमि रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार गुरुजी के सपनों का झारखंड बनाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास, आदिवासी कल्याण और रोजगार जैसे क्षेत्रों में सरकार की योजनाएं उसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास हैं, जिसकी नींव दिशोम गुरु ने अपने संघर्षों से रखी थी।
पंकज मिश्रा ने कहा कि दिशोम गुरु का जीवन हमें यह सिखाता है कि जनहित और समाज के अधिकारों की लड़ाई कभी समाप्त नहीं होती। उन्होंने लोगों से सामाजिक एकता बनाए रखने और विकास की यात्रा में सहभागी बनने की अपील की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गरीबों, किसानों, मजदूरों और आदिवासी समाज के उत्थान के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

राजमहल विधायक एम.टी. राजा ने अपने संबोधन में कहा कि दिशोम गुरु का जीवन दर्शन और उनके आदर्श आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि गुरुजी ने समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने की लड़ाई लड़ी और यही कारण है कि आज भी लोगों के दिलों में उनके प्रति अपार सम्मान और श्रद्धा है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र का समग्र विकास तभी संभव है जब हम उनके दिखाए रास्ते पर चलें और समाज के हर वर्ग को साथ लेकर आगे बढ़ें।
समारोह के दौरान झारखंड आंदोलन के इतिहास, दिशोम गुरु के संघर्ष और उनके राजनीतिक एवं सामाजिक योगदान को भी याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिबू सोरेन ने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन में आदिवासी समाज की पहचान, सम्मान और अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष किया। उन्होंने सामाजिक न्याय, समान अवसर और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कार्यक्रम में झामुमो के वरिष्ठ कार्यकर्ता, विभिन्न पंचायतों के जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के सदस्य, महिला समूहों की प्रतिनिधियां, युवा कार्यकर्ता और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। प्रखंड प्रशासन के अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर आयोजन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूरे आयोजन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्थाओं का विशेष ध्यान रखा गया ताकि श्रद्धालुओं और आगंतुकों को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
बरहेट और आसपास के गांवों से हजारों लोग सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंचने लगे थे। पारंपरिक वेशभूषा में आए लोगों ने दिशोम गुरु के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। कई सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से झारखंड की समृद्ध परंपरा और आंदोलन के इतिहास को भी दर्शाया गया। कार्यक्रम स्थल को आकर्षक ढंग से सजाया गया था, जहां गुरुजी के जीवन से जुड़े महत्वपूर्ण क्षणों को चित्रों और प्रदर्शनी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया।
श्रद्धांजलि सभा के समापन पर उपस्थित लोगों के बीच प्रसाद और सामूहिक भोजन का वितरण किया गया। बड़ी संख्या में लोगों ने अनुशासित ढंग से प्रसाद ग्रहण किया और आयोजन की सराहना की। स्थानीय लोगों का कहना था कि दिशोम गुरु की आदमकद प्रतिमा आने वाली पीढ़ियों को उनके संघर्ष, विचारों और जनसेवा की भावना से जोड़ने का कार्य करेगी।
बरहेट में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक श्रद्धांजलि समारोह नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन की विरासत, सामाजिक न्याय की भावना और जनसेवा के संकल्प को पुनः स्मरण कराने वाला ऐतिहासिक अवसर बन गया। दिशोम गुरु शिबू सोरेन की प्रतिमा अब क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणा, संघर्ष और सामाजिक चेतना का स्थायी प्रतीक बनी रहेगी।

