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JPSC PT Result 2026: जेपीएससी पीटी रिजल्ट पर भाजपा-आजसू का हमला, CBI जांच की मांग से बढ़ा विवाद

Megha Sinha

JPSC PT Result 2026 : JPSC 14वीं सिविल सेवा पीटी परीक्षा के परिणाम को लेकर झारखंड में सियासत तेज, कटऑफ जारी नहीं होने, मेरिट सूची पर हस्ताक्षर के अभाव और OMR मूल्यांकन में कथित गड़बड़ियों को लेकर भाजपा और आजसू ने CBI जांच की मांग उठाई।

JPSC PT Result 2026 विवाद गहराता जा रहा है। भाजपा और आजसू ने JPSC 14वीं सिविल सेवा पीटी परीक्षा परिणाम रद्द कर CBI जांच की मांग की है। कटऑफ, मेरिट सूची, OMR शीट और चयन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष ने सरकार और आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा (PT) 2026 का परिणाम घोषित होने के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) ने परीक्षा परिणाम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूरे परिणाम को रद्द करने तथा मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की है।

विपक्ष का आरोप है कि परीक्षा परिणाम घोषित करने के बावजूद आयोग ने कटऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए, मेरिट सूची पर आयोग के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं हैं और OMR शीट के मूल्यांकन में भी कई तरह की अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। इन आरोपों के बाद लाखों प्रतियोगी छात्रों के बीच भी परीक्षा प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

भाजपा ने उठाए कई गंभीर सवाल

भाजपा के प्रदेश मुख्य प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने प्रेस वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि 103 पदों के लिए 2204 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया, लेकिन आयोग ने अब तक कटऑफ अंक जारी नहीं किए हैं। उनका कहना है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में कटऑफ सार्वजनिक करना पारदर्शिता का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मेरिट सूची पर आयोग के तीनों सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं होने से पूरी चयन प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ जाती है। भाजपा का कहना है कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर मामला है।

प्रतुल शाहदेव ने यह भी कहा कि बैकलॉग पीटी परीक्षा से जुड़े 832 अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड को लेकर भी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है, जिससे चयन प्रक्रिया पर और अधिक सवाल खड़े हो रहे हैं।

OMR मूल्यांकन पर भी जताई आपत्ति

भाजपा ने OMR शीट के मूल्यांकन में कथित अनियमितताओं का भी मुद्दा उठाया। प्रतुल शाहदेव ने दावा किया कि एक परीक्षार्थी के प्रथम प्रश्नपत्र में 100 में से 48 अंक आए, जबकि चयनित होने के लिए दूसरे प्रश्नपत्र में 97 अंक प्राप्त करना आवश्यक हो जाता है।

उन्होंने कहा कि परीक्षा विशेषज्ञों के अनुसार इस प्रकार का परिणाम असामान्य प्रतीत होता है और इससे मूल्यांकन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर संदेह पैदा होता है। भाजपा का कहना है कि यदि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

CBI जांच की मांग हुई तेज

भाजपा ने केवल इस परीक्षा ही नहीं बल्कि हाल के वर्षों में विवादों में रही अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की भी CBI जांच कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

प्रतुल शाहदेव ने राज्य के प्रतियोगी छात्रों से अपील करते हुए कहा कि यह संघर्ष किसी एक परीक्षा या एक बैच का नहीं बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य और उनके अधिकारों से जुड़ा हुआ है।

आजसू ने भी परीक्षा प्रक्रिया पर उठाए सवाल

अखिल झारखंड छात्र संघ (आजसू) ने भी प्रेस विज्ञप्ति जारी कर JPSC की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। आजसू के प्रदेश अध्यक्ष ओम वर्मा ने कहा कि झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता लगातार कमजोर होती जा रही है और हालिया परीक्षा परिणाम ने लाखों अभ्यर्थियों के मन में अविश्वास पैदा कर दिया है।

उन्होंने कहा कि JPSC अब योग्यता आधारित चयन का प्रतीक बनने के बजाय अपारदर्शिता और अव्यवस्था का केंद्र बनता जा रहा है। आजसू का आरोप है कि आयोग की कार्यप्रणाली के कारण प्रतिभाशाली छात्र मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं।

कटऑफ और मेरिट सूची को लेकर उठे सवाल

आजसू ने भी कहा कि 103 पदों के लिए 2204 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया लेकिन कटऑफ अंक सार्वजनिक नहीं किए गए। साथ ही मेरिट सूची पर आयोग के सभी सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं होने से पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

पार्टी का कहना है कि यदि आयोग पूरी तरह पारदर्शी है तो कटऑफ, मूल्यांकन प्रक्रिया और मेरिट तैयार करने की पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि छात्रों के बीच किसी प्रकार की आशंका न रहे।

बैकलॉग परीक्षा को लेकर भी विवाद

आजसू ने बैकलॉग पीटी परीक्षा के 832 अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि इन अभ्यर्थियों से संबंधित स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण पूरी चयन प्रक्रिया संदेह के घेरे में आ गई है।

पार्टी ने आरोप लगाया कि वर्षों तक परीक्षाएं आयोजित नहीं होतीं और जब परिणाम घोषित किए जाते हैं तो वे विवादों में घिर जाते हैं। इससे प्रतियोगी छात्रों का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है।

OMR मूल्यांकन प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल

आजसू ने भी OMR मूल्यांकन प्रणाली को लेकर गंभीर आपत्तियां जताई हैं। पार्टी का कहना है कि कई अभ्यर्थियों ने मूल्यांकन में अनियमितताओं की शिकायत की है।

पार्टी के अनुसार ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जिनमें अंक वितरण को लेकर असामान्य स्थिति दिखाई देती है। आजसू का कहना है कि इन शिकायतों की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए ताकि यदि किसी स्तर पर तकनीकी या प्रशासनिक त्रुटि हुई हो तो उसे दूर किया जा सके।

आजसू की प्रमुख मांगें

आजसू ने सरकार और आयोग के सामने कई मांगें रखी हैं—

  • JPSC की हालिया पीटी परीक्षा और विवादित परिणामों की CBI जांच कराई जाए।
  • सभी परीक्षाओं का कटऑफ सार्वजनिक किया जाए।
  • मेरिट निर्धारण की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए।
  • OMR मूल्यांकन प्रणाली का विस्तृत विवरण जारी किया जाए।
  • दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कठोर कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाए।

छात्रों के भविष्य पर छिड़ी बहस

JPSC परीक्षा को झारखंड की सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी परीक्षाओं में माना जाता है। ऐसे में परिणाम को लेकर उठे विवाद ने लाखों अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ा दी है। विपक्षी दलों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना सरकार और आयोग की जिम्मेदारी है।

हालांकि, इस पूरे मामले में आयोग की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। आने वाले दिनों में आयोग या राज्य सरकार की ओर से दिए जाने वाले स्पष्टीकरण और संभावित कार्रवाई पर छात्रों तथा राजनीतिक दलों की नजर बनी रहेगी।

यदि जांच की मांग पर कोई निर्णय लिया जाता है, तो इसका प्रभाव न केवल इस परीक्षा बल्कि राज्य की भविष्य की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली पर भी पड़ सकता है।