Vidhi Portal 2.0 Launched : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में शुरू हुआ ‘विधि पोर्टल 2.0’, ई-कोर्ट्स इंटीग्रेशन, रियल-टाइम मॉनिटरिंग, स्मार्ट डैशबोर्ड और 20 से अधिक नई डिजिटल सुविधाओं से सरकारी मुकदमों की निगरानी होगी और अधिक प्रभावी।
Vidhi Portal 2.0 Launched : झारखंड सरकार ने ‘विधि पोर्टल 2.0’ लॉन्च कर सरकारी मुकदमों के डिजिटल प्रबंधन को नई दिशा दी है। जानिए पोर्टल की नई सुविधाएं, ई-कोर्ट्स इंटीग्रेशन, एआई आधारित भविष्य की योजनाएं और इससे शासन व्यवस्था को होने वाले फायदे।
रांची: झारखंड सरकार ने राज्य में सरकारी न्यायालयीन मामलों के प्रबंधन को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए ‘विधि पोर्टल 2.0’ का शुभारंभ किया है। यह पोर्टल सरकारी मुकदमों की निगरानी, समयबद्ध कार्रवाई और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। झारखंड उच्च न्यायालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित कार्यक्रम में महाधिवक्ता रोहिताश्य रॉय ने पोर्टल का औपचारिक उद्घाटन किया।
इस अवसर पर आईटी विभाग की सचिव पूजा सिंघल, विधि विभाग के सचिव नीरज कुमार श्रीवास्तव, वरीय अतिरिक्त महाधिवक्ता अच्युत केशव सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और सरकारी अधिवक्ता मौजूद रहे। कार्यक्रम में पोर्टल की विशेषताओं और इसके उपयोग से सरकारी न्यायिक व्यवस्था में आने वाले बदलावों पर विस्तार से चर्चा की गई।

डिजिटल सुशासन की दिशा में बड़ा कदम
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में विकसित विधि पोर्टल 2.0 को राज्य की डिजिटल गवर्नेंस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। सरकार का उद्देश्य सरकारी मुकदमों के संचालन को तकनीक आधारित, पारदर्शी, जवाबदेह और अधिक प्रभावी बनाना है।
अब तक विभिन्न विभागों के बीच मुकदमों से संबंधित जानकारी अलग-अलग स्तर पर संचालित होती थी, जिससे समन्वय में कठिनाई और मामलों के निस्तारण में देरी की संभावना बनी रहती थी। नए पोर्टल के माध्यम से इन सभी प्रक्रियाओं को एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया गया है।
एक मंच पर जुड़ेंगे सभी विभाग
विधि पोर्टल 2.0 के जरिए राज्य के विभिन्न विभागों, विधि विभाग, महाधिवक्ता कार्यालय तथा सरकारी अधिवक्ताओं को एक साझा डिजिटल मंच उपलब्ध कराया गया है। इससे सभी संबंधित पक्ष एक ही प्लेटफॉर्म पर मुकदमों की स्थिति, दस्तावेज, नोटिस और अन्य आवश्यक जानकारियों तक पहुंच सकेंगे।
इससे न केवल विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, बल्कि न्यायालय में समय पर आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने और प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने में भी सहायता मिलेगी।

रियल-टाइम मॉनिटरिंग से बढ़ेगी जवाबदेही
पोर्टल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में रियल-टाइम मॉनिटरिंग सिस्टम शामिल है। इसके माध्यम से अधिकारी किसी भी सरकारी मुकदमे की वर्तमान स्थिति पर तुरंत नजर रख सकेंगे।
इसके अलावा पोर्टल में स्वचालित अलर्ट सिस्टम भी उपलब्ध कराया गया है, जो आगामी सुनवाई, जरूरी दस्तावेजों और समयसीमा से संबंधित सूचनाएं संबंधित अधिकारियों और अधिवक्ताओं तक समय पर पहुंचाएगा। इससे मामलों में अनावश्यक देरी की संभावना कम होगी और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी।
20 से अधिक नई डिजिटल सुविधाओं से लैस
सरकार ने विधि पोर्टल 2.0 में 20 से अधिक नई सुविधाएं जोड़ी हैं, जो इसे पहले के संस्करण की तुलना में कहीं अधिक उन्नत बनाती हैं।
इन प्रमुख सुविधाओं में शामिल हैं—
- ई-कोर्ट्स प्रणाली के साथ एकीकरण
- स्मार्ट कॉज़ लिस्ट
- दैनिक एवं साप्ताहिक केस डाइजेस्ट
- एग्जीक्यूटिव डैशबोर्ड
- केंद्रीकृत नोटिस प्रबंधन
- स्मार्ट वर्कफ्लो
- रियल-टाइम केस ट्रैकिंग
- मोबाइल एप सपोर्ट
- उन्नत डेटा विश्लेषण
- स्वचालित नोटिफिकेशन एवं अलर्ट
इन सुविधाओं के माध्यम से सरकारी मुकदमों की निगरानी पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से की जा सकेगी।

ई-कोर्ट्स इंटीग्रेशन से मिलेगी बड़ी सुविधा
पोर्टल को ई-कोर्ट्स प्रणाली के साथ जोड़ा गया है, जिससे अदालतों में चल रहे मामलों की अद्यतन जानकारी सीधे उपलब्ध होगी।
इस सुविधा से सरकारी अधिवक्ताओं और अधिकारियों को अलग-अलग स्रोतों से जानकारी जुटाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। मुकदमों की सुनवाई की तिथि, आदेश, प्रगति और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेंगी।
भविष्य में जुड़ेगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस
राज्य सरकार ने संकेत दिया है कि भविष्य में विधि पोर्टल 2.0 में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित कानूनी विश्लेषण की सुविधा भी जोड़ी जाएगी।
एआई तकनीक के माध्यम से मामलों के विश्लेषण, समान प्रकृति के मामलों की पहचान, कानूनी सुझाव और डेटा आधारित निर्णय लेने में सहायता मिलने की संभावना है। इससे सरकारी मुकदमों की गुणवत्ता और दक्षता दोनों में सुधार होगा।
महाधिवक्ता ने बताया महत्वपूर्ण पहल
महाधिवक्ता रोहिताश्य रॉय ने कहा कि विधि पोर्टल 2.0 राज्य सरकार के मुकदमों के बेहतर प्रबंधन और न्यायालयों में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के उपयोग से मुकदमों की निगरानी अधिक आसान होगी और संबंधित विभागों के बीच समन्वय भी बेहतर बनेगा। इससे न्यायालयीन प्रक्रियाओं में तेजी आएगी और सरकारी पक्ष को मजबूत बनाने में सहायता मिलेगी।
तकनीक आधारित पारदर्शी शासन की दिशा में पहल
आईटी विभाग की सचिव पूजा सिंघल ने इस अवसर पर कहा कि विधि पोर्टल 2.0 तकनीक आधारित पारदर्शी शासन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करना नहीं, बल्कि उसे प्रभावी ढंग से लागू करना भी है ताकि सभी विभाग इसकी सुविधाओं का पूरा लाभ उठा सकें।
अधिकारियों को दिया जाएगा प्रशिक्षण
सरकार ने पोर्टल के सफल संचालन के लिए चरणबद्ध तरीके से अधिकारियों, कर्मचारियों और उपयोगकर्ताओं को प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया है।
इस प्रशिक्षण के दौरान पोर्टल की सभी सुविधाओं, डेटा प्रबंधन, केस ट्रैकिंग, नोटिस प्रबंधन और रिपोर्टिंग प्रणाली की जानकारी दी जाएगी। इससे उपयोगकर्ता नई प्रणाली को आसानी से अपनाकर उसका अधिकतम लाभ उठा सकेंगे।
सरकारी मुकदमों में आएगी गति और पारदर्शिता
विशेषज्ञों का मानना है कि विधि पोर्टल 2.0 सरकारी मुकदमों के डिजिटल प्रबंधन में बड़ा बदलाव ला सकता है। एकीकृत प्लेटफॉर्म, रियल-टाइम डेटा, स्मार्ट मॉनिटरिंग और भविष्य में एआई आधारित विश्लेषण जैसी सुविधाएं सरकारी न्यायिक प्रणाली को अधिक आधुनिक, तेज और जवाबदेह बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाता है, तो राज्य के विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत होगा, न्यायालयों में समयबद्ध पैरवी संभव होगी और सरकारी मामलों के निस्तारण की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी एवं दक्ष बन सकेगी।
