

Chatra Air Ambulance Crash : रांची से दिल्ली जा रहा एयर एम्बुलेंस विमान टेकऑफ के 17 मिनट बाद क्रैश, सभी 7 लोगों की दर्दनाक मौत, जांच में कई अहम खुलासे
Chatra Air Ambulance Crash : झारखंड के चतरा में हुए एयर एम्बुलेंस हादसे पर AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आई है। खराब मौसम, तकनीकी पहलुओं और सुरक्षा उपकरणों की कमी को लेकर जांच जारी है।

Chatra Air Ambulance Crash : झारखंड के चतरा जिले में 23 फरवरी 2026 को हुए दर्दनाक एयर एम्बुलेंस हादसे को लेकर अब एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की प्रारंभिक रिपोर्ट सामने आ गई है। इस रिपोर्ट ने हादसे से जुड़े कई अहम पहलुओं पर रोशनी डाली है, लेकिन साथ ही कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
यह हादसा सिमरिया प्रखंड के कसियातू गांव के पास हुआ, जहां रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड का बीचक्राफ्ट किंग एयर C90A (VT-AJV) विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। यह एक गैर-निर्धारित एयर एम्बुलेंस उड़ान थी, जो रांची से दिल्ली जा रही थी। विमान ने दोपहर 1:37 बजे उड़ान भरी थी, लेकिन टेकऑफ के महज 17 मिनट बाद ही यह हादसे का शिकार हो गया।
विमान में कुल 7 लोग सवार थे, जिनमें 2 पायलट, 2 मेडिकल स्टाफ, 1 मरीज और 2 अटेंडेंट शामिल थे। सभी की मौके पर ही मौत हो गई। दोनों पायलट CPL लाइसेंसधारी और अनुभवी थे, जिनका रिकॉर्ड भी साफ-सुथरा बताया गया है।

Chatra Air Ambulance Crash : खराब मौसम बना बड़ा कारण?
AAIB की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, हादसे के समय रांची एयरपोर्ट और आसपास के इलाकों में मौसम बेहद खराब था। विजिबिलिटी 3500 से 5000 मीटर के बीच थी, जबकि आसमान में क्यूम्यूलोनिंबस (CB) बादल छाए हुए थे। इसके अलावा गरज-चमक और तेज हवाएं (300°/16 नॉट्स तक) भी दर्ज की गईं।
रिपोर्ट के मुताबिक, पायलट ने उड़ान से पहले खराब मौसम को देखते हुए रूट बदलने की अनुमति मांगी थी, जिसे एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) ने मंजूरी दे दी थी। उड़ान के दौरान भी पायलट ने दिशा परिवर्तन और FL140 तक लेवल ऑफ की अनुमति ली थी। आखिरी बार 1:49 बजे विमान का संपर्क कोलकाता ATC से हुआ, इसके बाद संपर्क पूरी तरह टूट गया।
Chatra Air Ambulance Crash : तकनीकी खामियां भी जांच के दायरे में
जांच में एक बड़ा खुलासा यह भी हुआ है कि विमान में फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (FDR) और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) मौजूद नहीं थे। ये दोनों उपकरण किसी भी विमान दुर्घटना की जांच में बेहद अहम होते हैं। इनके न होने से जांच एजेंसियों को हादसे की सटीक वजह जानने में दिक्कत आ सकती है।
इसके अलावा, इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर (ELT) भी दुर्घटना के बाद सक्रिय नहीं हुआ, जिससे राहत और बचाव कार्य में भी चुनौती आई।
Chatra Air Ambulance Crash : विमान की स्थिति और जांच की दिशा
यह विमान वर्ष 1987 में निर्मित था और अब तक करीब 6613 घंटे की उड़ान पूरी कर चुका था। आखिरी निरीक्षण 20 जनवरी 2026 को किया गया था, जिसमें कोई बड़ी खराबी सामने नहीं आई थी। हादसे से पहले इसी विमान ने दिल्ली-रांची की उड़ान भी भरी थी, जो सामान्य रही थी।
फिलहाल AAIB की टीम ने दुर्घटनास्थल से साक्ष्य जुटा लिए हैं और विमान के मलबे को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। गवाहों, एयरलाइन ऑपरेटर और ATC स्टाफ से पूछताछ की जा रही है।
Chatra Air Ambulance Crash : अभी बाकी है अंतिम सच
AAIB ने साफ किया है कि यह सिर्फ प्रारंभिक रिपोर्ट है और अंतिम निष्कर्ष अभी आना बाकी है। हादसे की असली वजह खराब मौसम थी या कोई तकनीकी खराबी, यह विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।
यह हादसा एक बार फिर विमानन सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं में इस्तेमाल हो रहे विमानों की तकनीकी स्थिति पर सवाल खड़े करता है।