
पारंपरिक जनजातीय गीत-संगीत के साथ Cm Hemant Soren और विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन का गर्मजोशी से अभिनंदन
Cm Hemant Soren और विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन के लंदन आगमन पर झारखंडी स्कॉलर्स और प्रवासी समुदाय ने पारंपरिक संगीत और भावनात्मक स्वागत कर अपनी सांस्कृतिक पहचान और जुड़ाव को दर्शाया।

Cm Hemant Soren और उनकी धर्मपत्नी कल्पना मुर्मू सोरेन, जो झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति की अध्यक्ष एवं विधायक हैं, बुधवार देर रात दावोस से लंदन पहुँचे। उनके साथ झारखंड सरकार के प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्य भी मौजूद थे। लंदन पहुँचते ही झारखंड के स्कॉलर्स और प्रवासी भारतीय समुदाय (डायसपोरा) के सदस्यों ने उनका ज़ोरदार और भावनात्मक स्वागत किया।
देर रात हुए इस स्वागत कार्यक्रम के बावजूद उत्साह और अपनत्व देखते ही बन रहा था। पारंपरिक जनजातीय वाद्य यंत्रों, लोकगीतों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से झारखंड की मिट्टी की खुशबू लंदन की धरती पर बिखेर दी गई। स्वागत समारोह ने यह स्पष्ट कर दिया कि झारखंड से दूर रहकर भी प्रवासी अपने राज्य, अपनी संस्कृति और अपने नेतृत्व से गहराई से जुड़े हुए हैं।

पारंपरिक गीत-संगीत से हुआ भावनात्मक स्वागत
लंदन में झारखंडी स्कॉलर्स और डायसपोरा के सदस्यों ने Cm Hemant Soren और कल्पना मुर्मू सोरेन का पारंपरिक गीत-संगीत के साथ अभिनंदन किया। मांदर, ढोल और लोकधुनों पर आधारित स्वागत ने पूरे माहौल को भावुक और गर्वपूर्ण बना दिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर कई लोग भावनाओं से भर उठे।
Cm Hemant Soren ने स्वागत से अभिभूत होते हुए कहा,
“देर रात लंदन पहुँचने पर अपनों द्वारा हुए इस स्नेहपूर्ण स्वागत से मैं अभिभूत हूँ। आप सबका धन्यवाद, जोहार। आपके इस प्रेम और सम्मान से मैं निशब्द हूँ। लंदन में हमारे लोग जिस तरह झारखंड का नाम रोशन कर रहे हैं, वह गर्व की बात है।”
डायसपोरा से मिलकर भावुक हुए मुख्यमंत्री
Cm Hemant Soren ने कहा कि विदेशों में रहकर भी झारखंडी समाज जिस तरह अपनी भाषा, संस्कृति और पहचान को जीवित रखे हुए है, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने झारखंड के युवाओं और स्कॉलर्स के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार वैश्विक मंच पर झारखंड की भागीदारी को और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।
कल्पना मुर्मू सोरेन ने जताया आभार
कल्पना मुर्मू सोरेन ने भी झारखंडी समुदाय का धन्यवाद करते हुए कहा कि देर रात लंदन पहुँचने के बावजूद जिस आत्मीयता और सम्मान के साथ उनका स्वागत किया गया, वह अविस्मरणीय है।
उन्होंने कहा,
“झारखंड के हमारे स्कॉलर्स और डायसपोरा के अन्य सदस्यों द्वारा स्वागत के लिए हार्दिक आभार। सभी को झारखंडी जोहार।”
उन्होंने यह भी कहा कि विदेशों में रहकर झारखंड के लोग जिस तरह अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान को बनाए हुए हैं, वह पूरे राज्य के लिए गर्व का विषय है।
संस्कृति और जुड़ाव की दिखी मजबूत झलक
यह स्वागत कार्यक्रम केवल एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह झारखंड और उसके लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक बन गया। अपने मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर झारखंडी समुदाय ने जो प्रेम और सम्मान दिखाया, उसने यह संदेश दिया कि झारखंड की पहचान सीमाओं से परे भी उतनी ही जीवंत है।
