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भाजपा के षडयंत्र से अपनी सरकार को बचाने, आदिवासियों के अधिकार सहित झारखंडियों के नाम की लड़ाई भी लड़ रहे हैं सीएम हेमंत सोरेन।

रांची। हेमंत सोरेन सरकार के साढ़े तीन सालों का कार्यकाल कांटो भरी ताज से गुजरा है। यह कांटा प्रकृति के साथ भाजपा नेताओं ने देने का काम किया है। हेमंत सरकार के शुरूआती समय में प्रकृति ने जहां कोरोना महामारी के रूप में यह कांटा दिया, तो भाजपा ने पूरे साढ़े तीन साल सरकार को अस्थिर करने और विधायकों के खरीद – फरोख्त करने का षडयंत्र रचकर यह कांटा दिया। इसके बावजूद हेमंत सोरेन सरकार अपनी सरकार को भाजपा के षडयंत्र से बचा रहे हैं। इसके अलावा हेमंत सोरेन आदिवासियों के अधिकार सहित झारखंडियों के नाम की लड़ाई भी लड़ रहे हैं। आदिवासियों के हक के लिए हेमंत सरकार ‘सरना धर्म कोड’, ‘1932 का खतियान आधारित स्थानीय नीति’ की मांग की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके अलावा वे झारखंडियों के नाम की लड़ाई लड़ रहे हैं, भले विपक्ष हेमंत सरकार पर जो आरोप लगाते रहें।

बता दें कि मुख्यमंत्री पहले ही कह चुके हैं कि इस राज्य में अब सिर्फ वही काम होगा जो राज्य हित मे होगा। यहां सिर्फ आदिवासियों और झारखंडियों के हित में निर्णय लिए जाएंगे। राज्य में अब सिर्फ वही काम होगा जो जन मानस के लिए लाभदायक होगा।

झारखंडियों के नाम के पहचान के लिए हेमंत और शिबू सोरेन ने लिखा पत्र, पर केंद्र मौन।

झारखंडी नाम के पहचान के लिए ही सीएम हेमंत सोरेन की सबसे बड़ी पहल कोयला खनन परियोजनाओं का नामकरण करने में झारखंड की संस्कृति, परंपरा और इतिहास का सम्मान देने की मांग। बकायदा इसके लिए उन्होंने बीते दिनों केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी को पत्र लिखा है। पत्र में सीएम का अनुरोध है कि कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) द्वारा संचालित निजी कोयला परियोजनाओं सहित विभिन्न खनन परियोजनाओं का नाम राज्य के स्थानीय स्थान, गांव, पंचायत, ब्लॉक, महान हस्तियों और दर्शनीय स्थानों के अनुसार रखा जाए। इससे पहले झामुमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिबू सोरेन ने भी बीते 30 जून को रेल मंत्री को पत्र लिख मांग किया था कि कहा कि, राज्य सरकार से परामर्श कर वह जल्द से जल्द बंग भाषी क्षेत्रों में बांग्ला और जनजातीय भाषाओं में रेलवे स्टेशनों के नाम लिखा जाना अनिवार्य करें। दोनों नेताओं के पत्रों के बावजूद केंद्रीय मंत्री पूरी तरह से मौन हैं।

उच्च शिक्षा, हड़िया व्यवसाय से मुक्ति के लिए भी झारखंड के हस्तियों का सहारा।

झारखंडियों के नाम की पहचान रखने में हेमंत सरकार का दूसरा सबसे अहम कदम योजनाओं का नाम रखना है। बता दें कि जनजातीय समाज से आने वाले मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा, फूलो-झानो के नाम पर हेमंत सरकार दो योजनाओं चला रही है। इसमें उच्च शिक्षा के लिए मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा पारदेशीय छात्रवृत्ति योजना और हड़िया शराब बेचने वाली महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए फूलो-झानो आशीर्वाद योजना शामिल हैं। इसी तरह दलित समुदाय से आने वाली एक महिला (हालांकि वे झारखंड की नहीं है) सावित्रीबाई फुले के नाम पर किशोरी समृद्धि योजना शुरू कर हेमंत सरकार ने राज्य के किशोरियों और युवाओं का भविष्य संवारने का काम कर रही है। में सहायक हो रहा है।

शहीदों के नाम स्मारक बनाने की घोषणा कर चुके हैं सीएम हेमंत सोरेन।

झारखंड के शहीदों के नाम बनाए रखने के लिए सीएम हेमंत सोरेन एक बड़ी घोषणा कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि शहीदों की याद में उनकी सरकार द्वारा राज्य में एक भव्य शहीद स्मारक का निर्माण कराया जाएगा। इसके लिए एक बेहतर कार्य योजना बनाई जा रही है। वीर शहीदों के सम्मान के लिए उनकी सरकार कार्य करेगी।

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भाजपा के षडयंत्र से अपनी सरकार को बचाने, आदिवासियों के अधिकार सहित झारखंडियों के नाम की लड़ाई भी लड़ रहे हैं सीएम हेमंत सोरेन। 1