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Jharkhand-UK Conversation : लंदन में शिक्षा व कौशल विकास पर झारखण्ड–यूके उच्चस्तरीय संवाद, युवाओं को वैश्विक अवसरों से जोड़ने की पहल

Megha Sinha
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Jharkhand-UK Conversation : अंतरराष्ट्रीय शिक्षा, स्किलिंग और अप्रेंटिसशिप के नए द्वार खोलने पर बनी सहमति, पूर्वी भारत को वैश्विक शिक्षा मानचित्र पर लाने का आह्वान

Jharkhand-UK Conversation : लंदन में आयोजित झारखण्ड–यूके उच्चस्तरीय राउंड टेबल में शिक्षा, कौशल विकास, अप्रेंटिसशिप और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर अहम चर्चा, युवाओं के लिए वैश्विक अवसरों पर जोर।
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लंदन प्रवास के दौरान झारखण्ड सरकार के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा एवं कौशल विकास के क्षेत्र में एक नई और दूरगामी पहल करते हुए गुरुवार को एक उच्चस्तरीय राउंड टेबल संवाद का आयोजन किया। यह बैठक प्रातः 09:45 बजे से 11:30 बजे तक चली, जिसमें यूनाइटेड किंगडम के प्रमुख विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों, स्किलिंग संगठनों, अवार्डिंग बॉडीज़ और अप्रेंटिसशिप इकोसिस्टम से जुड़े प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस महत्वपूर्ण संवाद की अध्यक्षता सुदिव्य कुमार, मंत्री—पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग सह उच्च शिक्षा विभाग, झारखण्ड सरकार तथा वंदना डाडेल, आईएएस, अपर मुख्य सचिव, झारखण्ड सरकार ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य झारखण्ड के युवाओं को वैश्विक मानकों के अनुरूप शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगारोन्मुख अवसरों से जोड़ने की रणनीति पर व्यापक विचार-विमर्श करना रहा।

मंत्री सुदिव्य कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि यह संवाद उस दूरदर्शी सोच को सशक्त करता है, जिसमें शिक्षा को रोजगार से, कौशल को अवसर से और स्थानीय प्रतिभा को वैश्विक मंच से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने बताया कि माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के मार्गदर्शन में अबुआ सरकार युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु अंतरराष्ट्रीय सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जा रही है।

पूर्वी भारत के लिए समावेशी अंतरराष्ट्रीय शिक्षा की मांग

सत्र के उद्घाटन में झारखण्ड प्रतिनिधिमंडल ने राज्य को केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि वैश्विक शिक्षा और नवाचार का संभावित केंद्र बताया। प्रतिनिधिमंडल ने इस ओर ध्यान दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों की गतिविधियां अब तक पश्चिमी भारत, दिल्ली एनसीआर और दक्षिण भारत तक सीमित रही हैं, जबकि पूर्वी और मध्य भारत इस निवेश से वंचित रहे हैं। झारखण्ड ने पूर्वी भारत को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा साझेदारियों का अगला प्रमुख केंद्र बनाने का आह्वान किया।

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उच्च शिक्षा सुधार के तीन मजबूत स्तंभ

झारखण्ड सरकार ने उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधार के लिए तीन अहम कदम प्रस्तुत किए—राज्य संकाय विकास अकादमी की स्थापना, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप अनिवार्य 8-सप्ताह की इंटर्नशिप, तथा राष्ट्रीय बेंचमार्किंग पर आधारित राज्य संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क।
सरकार ने यह भी रेखांकित किया कि उच्च शिक्षा में लैंगिक समानता के मामले में झारखण्ड राष्ट्रीय औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। यूके जाने वाले छात्रों में 65 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो राज्य की बेटियों की वैश्विक शिक्षा में बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।

कौशल, अप्रेंटिसशिप और उद्योग से जुड़ी शिक्षा

राउंड टेबल में अप्रेंटिसशिप आधारित शिक्षा, उद्योग-संलग्न डिग्री कार्यक्रम, फिनिशिंग स्कूल मॉडल और आईटीआई पाठ्यक्रमों के आधुनिकीकरण पर विशेष चर्चा हुई। केयर इकॉनमी, पर्यटन एवं हॉस्पिटैलिटी, हरित कौशल, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और खनन अनुसंधान को प्राथमिक क्षेत्र बताया गया।

भारत–यूके सहयोग के नए आयाम

बैठक में कौशल एवं योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता, संयुक्त डिग्री कार्यक्रम, अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट कैंपस, छात्र-शिक्षक विनिमय और भारत–यूके हरित कौशल एजेंडा के तहत सहयोग पर सहमति बनी। साथ ही सतत पर्यटन, आदिवासी ज्ञान प्रणालियों, संस्कृति और जलवायु कार्रवाई पर भी विचार हुआ।

यूके प्रतिनिधियों ने झारखण्ड की स्पष्ट दृष्टि की सराहना करते हुए शिक्षा, अनुसंधान और व्यावसायिक प्रशिक्षण में सहयोग की मजबूत इच्छा जताई। बैठक का समापन भविष्य में ठोस साझेदारियों को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।