
Jharkhand-UK Cooperation : शिक्षा, स्किल डेवलपमेंट, उत्तरदायी खनन, जलवायु परिवर्तन, संस्कृति और विरासत संरक्षण में भारत–यूके साझेदारी का विस्तार
Jharkhand-UK Cooperation : मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने लंदन में यूके की मंत्री सीमा मल्होत्रा से मुलाक़ात कर शिक्षा, स्कॉलरशिप, क्लाइमेट ट्रांज़िशन, उत्तरदायी खनन और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण में झारखण्ड–यूके सहयोग को नई दिशा दी।

झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने यूनाइटेड किंगडम सरकार की संसदीय अवर सचिव एवं समानता तथा इंडो-पैसिफ़िक मामलों की मंत्री सीमा मल्होत्रा से लंदन में महत्वपूर्ण मुलाक़ात की। इस बैठक को झारखण्ड और यूके के बीच दीर्घकालिक, व्यावहारिक और भविष्य उन्मुख सहयोग की दिशा में एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
बैठक के दौरान शिक्षा, कौशल विकास, उत्तरदायी खनन, क्लाइमेट ट्रांज़िशन, संस्कृति और विरासत संरक्षण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में साझेदारी को मज़बूत करने पर गहन चर्चा हुई। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि झारखण्ड वैश्विक सहयोग के माध्यम से सतत विकास, सामाजिक न्याय और समावेशी प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ रहा है।
यूके सरकार ने मरांग गोमके जयपाल मुंडा ओवरसीज़ स्कॉलरशिप और चेवनिंग–मरांग गोमके जयपाल मुंडा ओवरसीज़ स्कॉलरशिप की विशेष रूप से सराहना की। इन योजनाओं को भारत–यूके साझेदारी का एक सशक्त और जीवंत उदाहरण बताया गया। बीते चार वर्षों में 100 से अधिक झारखण्डी विद्यार्थियों को इन योजनाओं का लाभ मिल चुका है, जिससे राज्य के युवाओं को वैश्विक शिक्षा और नेतृत्व का अवसर प्राप्त हुआ है।

दोनों पक्षों ने सस्टेनेबिलिटी-लिंक्ड स्कॉलरशिप मॉडल पर काम करने और विदेश अध्ययन को मेंटोरशिप, इंटर्नशिप, लीडरशिप डेवलपमेंट और पब्लिक सर्विस अनुभव से जोड़ने के लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई।
शैक्षणिक सहयोग के तहत यूके के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों, स्किल्स और क्वालिफ़िकेशन संस्थानों के साथ संस्थागत साझेदारी की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इसमें खनन प्रौद्योगिकी, पर्यावरण एवं सततता, डेटा साइंस और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, गवर्नेंस और पब्लिक पॉलिसी जैसे क्षेत्रों में संयुक्त शैक्षणिक कार्यक्रम, फैकल्टी एक्सचेंज और एप्लाइड रिसर्च शामिल हैं। साथ ही टीवीईटी (TVET) और अप्रेंटिसशिप मार्गों को मज़बूत करने पर भी ज़ोर दिया गया।
आर्थिक और जलवायु सहयोग के संदर्भ में मुख्यमंत्री ने उत्तरदायी खनन में यूके की विशेषज्ञता के साथ गहन सहयोग का प्रस्ताव रखा। इसमें ESG सिस्टम, मिनरल ट्रेसबिलिटी, खदान सुरक्षा, स्वच्छ खनन प्रसंस्करण और तकनीकी नवाचार शामिल हैं। इस अवसर पर क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर एक झारखण्ड–यूके वर्किंग ट्रैक स्थापित करने पर भी विचार हुआ।

जलवायु परिवर्तन को लेकर यूके की वित्तीय और जलवायु संस्थाओं के साथ मिलकर कोयला क्षेत्रों के विविधीकरण, श्रमिकों और स्थानीय समुदायों के संरक्षण तथा ट्रांज़िशन फाइनेंस मॉडल विकसित करने पर चर्चा हुई। झारखण्ड को “जस्ट ट्रांज़िशन” कार्यक्रमों के लिए एक पायलट राज्य के रूप में विकसित करने की दिशा में सकारात्मक संकेत मिले।
संस्कृति, खेल और विरासत संरक्षण को जन-स्तर पर संपर्क बढ़ाने का प्रभावी माध्यम मानते हुए मुख्यमंत्री ने भारत–यूके विरासत संरक्षण समझौते के तहत झारखण्ड के मेगालिथ और मोनोलिथ स्थलों के संरक्षण के लिए यूके सहयोग का आग्रह किया। स्टोनहेंज जैसे वैश्विक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए दीर्घकाल में यूनेस्को मान्यता की दिशा में कार्य करने की बात कही गई।
बैठक के अंत में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने मंत्री सीमा मल्होत्रा को झारखण्ड भ्रमण का आमंत्रण दिया, जिसे उन्होंने सहर्ष स्वीकार किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने FCDO मुख्यालय का भी अवलोकन किया, वहीं मंत्री मल्होत्रा ने उन्हें यूके के ऐतिहासिक स्टोनहेंज विरासत स्थल के भ्रमण का निमंत्रण दिया।
