
Tablighi World Congregation : पश्चिम बंगाल में आयोजित तब्लीगी आलमी इज्तिमा में देश-विदेश से आए उलेमा और जमाती, नमाज़, तालीम और अख़लाक पर ज़ोर
Tablighi World Congregation : पश्चिम बंगाल के तब्लीगी आलमी इज्तिमा में जमात के प्रमुख मौलाना साद साहब की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष बना दिया। इज्तिमा में दीन, ईमान, अमन और इंसानियत पर तकरीरें हुईं।

Tablighi World Congregation : पश्चिम बंगाल में आयोजित तब्लीगी आलमी इज्तिमा इस बार खास तौर पर चर्चा में रहा, जब मौलाना साद ने इसमें शिरकत की। उनकी मौजूदगी से इज्तिमा का महत्व और बढ़ गया। इस बड़े धार्मिक जमावड़े में देश-विदेश से आए हजारों उलेमा, जमाती और अकीदतमंद शामिल हुए। चारों ओर इबादत, तालीम और दुआओं का माहौल देखने को मिला।
यह आलमी इज्तिमा तब्लीगी जमात के उस उद्देश्य को दर्शाता है, जिसके तहत मुसलमानों को दीन से जोड़ने, इस्लामी जीवनशैली अपनाने और अख़लाक को बेहतर बनाने पर ज़ोर दिया जाता है। इज्तिमा के दौरान लगातार तकरीरें, बयान और मजलिसें आयोजित की गईं, जिनमें दीन, ईमान, नमाज़, तालीम, अमल और सामाजिक जिम्मेदारियों पर विस्तार से रोशनी डाली गई।
मौलाना साद साहब ने अपने अहम बयान में कहा कि आज के दौर में मुसलमानों को सबसे ज़्यादा ज़रूरत अपने किरदार को संवारने की है। उन्होंने नमाज़ की पाबंदी, इल्म की अहमियत और सुन्नत पर अमल करने पर ज़ोर देते हुए कहा कि जब इंसान अपने अमल को सही करता है, तो समाज अपने आप बेहतर होने लगता है। उनका कहना था कि दीन केवल बातों का नाम नहीं, बल्कि अमल और अख़लाक का नाम है।
Tablighi World Congregation : इज्तिमा के दौरान अमन, भाईचारे और इंसानियत का पैगाम दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि इस्लाम शांति और भलाई का धर्म है और हर मुसलमान की जिम्मेदारी है कि वह अपने व्यवहार से समाज में सकारात्मक संदेश दे। देश-विदेश से आए उलेमा ने भी अलग-अलग सत्रों में अपने विचार रखे और लोगों को दीन से जुड़ने की दावत दी।
इस बड़े आयोजन को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस और स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। ट्रैफिक, स्वास्थ्य सेवाओं और साफ-सफाई के लिए विशेष प्रबंध किए गए, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था न हो। मेडिकल टीमों की तैनाती भी की गई थी, जिससे जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता मिल सके।
इज्तिमा में शामिल अकीदतमंदों ने इसे अपने लिए एक रूहानी अनुभव बताया। कई लोगों का कहना था कि ऐसे आयोजनों से दिलों को सुकून मिलता है और इंसान अपनी ज़िंदगी पर नए सिरे से सोचने को मजबूर होता है। इज्तिमा का समापन दुआओं के साथ हुआ, जिसमें देश-दुनिया में अमन, तरक्की और भाईचारे की कामना की गई।
कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल का यह तब्लीगी आलमी इज्तिमा न सिर्फ एक धार्मिक आयोजन रहा, बल्कि समाज को जोड़ने, इंसानियत का पैगाम देने और दीन की बुनियादी बातों की याद दिलाने का एक बड़ा मंच भी साबित हुआ।
