
World Economic Forum में झारखण्ड देगा सतत, सांस्कृतिक और अनुभवात्मक पर्यटन का वैश्विक आमंत्रण
World Economic Forum : प्राकृतिक सौंदर्य, आदिवासी संस्कृति, आध्यात्म, वाइल्डलाइफ और एडवेंचर टूरिज्म के संगम के साथ झारखण्ड निवेश के जरिए पर्यटन क्षेत्र में अनंत संभावनाओं के द्वार खोलने को तैयार।

World Economic Forum : निवेश के माध्यम से पर्यटन के क्षेत्र में अनंत अवसरों के द्वार खोलने को तैयार झारखण्ड
रांची।
प्रकृति प्रेमी हों या आध्यात्म की खोज में निकले यात्री, इतिहास में रुचि रखने वाले हों या रोमांच के शौकीन, सांस्कृतिक अनुभव चाहने वाले हों या सार्थक और जिम्मेदार यात्राओं की तलाश में रहने वाले पर्यटक—झारखण्ड हर वर्ग के लिए एक आत्मीय आमंत्रण लेकर वैश्विक मंच पर आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन के नेतृत्व में झारखण्ड वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के माध्यम से दुनिया को ऐसा पर्यटन अनुभव देने को तैयार है, जो निरंतरता, सहअस्तित्व और स्थायित्व की जड़ों से जुड़ा हुआ है।
युवा राज्य झारखण्ड अब केवल प्राकृतिक सौंदर्य के लिए नहीं, बल्कि निवेश-आधारित पर्यटन विकास के लिए भी देश-विदेश के निवेशकों और यात्रियों का ध्यान आकर्षित कर रहा है। 25 वर्ष का यह युवा राज्य पर्यटन को आर्थिक विकास, स्थानीय रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण का सशक्त माध्यम बनाने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
World Economic Forum : विशिष्ट पर्यटन गंतव्य के रूप में उभरता झारखण्ड
झारखण्ड का पर्यटन किसी भव्य कृत्रिम प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि भूमि, लोगों और परंपराओं के साथ गहरे और स्थायी संबंधों पर आधारित है। छोटानागपुर पठार की विशिष्ट भौगोलिक संरचना, घने जंगल, खुली घाटियां, पारंपरिक गांव और चट्टानों से बहती नदियां यहां की पहचान हैं।
हुंडरू, दशम, जोन्हा और लोध जैसे जलप्रपात न केवल पूर्वी भारत के सबसे आकर्षक प्राकृतिक स्थल हैं, बल्कि झारखण्ड को प्रकृति-आधारित पर्यटन का मजबूत केंद्र भी बनाते हैं। रांची को ‘झरनों का शहर’, नेतरहाट को ‘पहाड़ों की रानी’ और मैक्लुस्कीगंज को ‘एंग्लो-इंडियन गांव’ कहा जाना यूं ही नहीं है।
World Economic Forum : प्रकृति, संस्कृति, आध्यात्म और इतिहास का अद्भुत संगम
झारखण्ड की आत्मा उसकी आदिवासी विरासत में बसती है। यहां के आदिवासी समुदायों की भाषाएं, पर्व-त्योहार, लोककला और परंपराएं आज भी जीवंत हैं। सरहुल, करम, सोहराय, टुसू जैसे पर्व प्रकृति और सामुदायिक जीवन के गहरे संबंध को दर्शाते हैं।
सोहराय और कोहबर पेंटिंग, पैतकर कला, डोकरा शिल्प और छऊ नृत्य झारखण्ड की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर स्थापित करते हैं।
आध्यात्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से भी झारखण्ड अत्यंत समृद्ध है। देवघर का बैद्यनाथ धाम, बासुकीनाथ, रजरप्पा, देवड़ी मंदिर, पहाड़ी मंदिर जैसे पवित्र स्थल, वहीं पलामू और नवरत्नगढ़ के किले, मलूटी मंदिर समूह और मेगालिथिक धरोहरें इतिहास और आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती हैं।
World Economic Forum :वाइल्डलाइफ और एडवेंचर टूरिज्म की बढ़ती पहचान
झारखण्ड में एडवेंचर और वाइल्डलाइफ टूरिज्म तेजी से उभर रहा है। ट्रेकिंग, रॉक क्लाइम्बिंग, वॉटरफॉल रैपलिंग, ट्रेल साइक्लिंग और जंगल ट्रैकिंग जैसे रोमांचक अनुभव यहां पर्यटकों को आकर्षित कर रहे हैं।
पलामू टाइगर रिजर्व, दलमा हाथी अभयारण्य, उधवा बर्ड सेंचुरी, हजारीबाग और कोडरमा वन्य जीव अभयारण्य राज्य को वाइल्डलाइफ पर्यटन में विशिष्ट पहचान दिला रहे हैं।
स्थानीय समुदायों की भागीदारी, प्रशिक्षित गाइड और सतत पर्यटन मॉडल के साथ झारखण्ड न केवल पर्यावरण संरक्षण, बल्कि स्थानीय आजीविका सृजन का भी मजबूत उदाहरण बन रहा है। इन सभी पहलुओं का समग्र प्रभाव झारखण्ड को देश के प्रमुख और भविष्य के वैश्विक पर्यटन गंतव्यों में शामिल करता है।
