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World Malaria Day
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World Malaria Day : आईपीएच सभागार में सम्मान समारोह, जागरूकता पर दिया गया ज़ोर

Megha Sinha
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World Malaria Day : आईपीएच सभागार में आयोजित कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मियों और मुखियाओं को किया गया सम्मानित, मलेरिया उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयास पर जोर

World Malaria Day : रांची में विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मलेरिया उन्मूलन और जागरूकता को लेकर महत्वपूर्ण पहल की गई। इस दौरान बेहतर कार्य करने वाले कर्मियों और पंचायत प्रतिनिधियों को सम्मानित किया गया।
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रांची: हर वर्ष 25 अप्रैल को मनाए जाने वाले विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर शनिवार को आईपीएच सभागार में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य वेक्टर जनित रोगों, विशेषकर मलेरिया के प्रति जागरूकता फैलाना और इस दिशा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मियों को सम्मानित करना था।

कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) झारखंड के अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि झारखंड सरकार राज्य के नागरिकों के स्वास्थ्य के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी बीमारी से पीड़ित न रहे।

उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग वेक्टर जनित रोगों के उन्मूलन के लिए लगातार प्रयासरत है। पोलियो उन्मूलन का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जागरूकता और सामूहिक प्रयासों से असंभव दिखने वाले लक्ष्य भी हासिल किए जा सकते हैं। इसी तरह मलेरिया को भी जड़ से समाप्त किया जा सकता है।

श्री झा ने लोगों से अपील की कि वे अपने आसपास साफ-सफाई रखें, नालियों को जाम न होने दें और मच्छरदानी का नियमित उपयोग करें। उन्होंने यह भी कहा कि समय-समय पर छिड़काव और अन्य रोकथाम उपाय अपनाकर मलेरिया के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी दी गई कि स्वास्थ्य विभाग पूरे वर्ष विभिन्न स्वास्थ्य दिवसों के माध्यम से कुल 46 प्रकार की गतिविधियां आयोजित करता है। इन गतिविधियों का मुख्य उद्देश्य लोगों को बीमारियों से बचाव, रोकथाम और उपचार के प्रति जागरूक करना है।

श्री झा ने कहा कि कम्यूनिकेबल और नॉन-कम्यूनिकेबल दोनों प्रकार की बीमारियों के प्रति लोगों को जागरूक होना बेहद जरूरी है। उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को और अधिक प्रभावी बनाने पर बल दिया, ताकि अधिक से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग हो सके और समय रहते बीमारियों की पहचान हो सके।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि सोशल मीडिया के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी वीडियो और संदेश लोगों तक पहुंचाए जाएं, जिससे जागरूकता को और अधिक बढ़ाया जा सके।

राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ वीरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य मलेरिया के मामलों को कम करना और कालाजार जैसे गंभीर रोगों से राज्य को मुक्त करना है। उन्होंने कहा कि यह तभी संभव है जब सभी विभाग और आम जनता मिलकर काम करें।

वहीं, स्वास्थ्य निदेशक डॉ दिनेश कुमार ने भी जागरूकता पर जोर देते हुए कहा कि मलेरिया को खत्म करने के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार की जरूरत है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इस बीमारी को हल्के में न लें और समय पर जांच और इलाज कराएं।

कार्यक्रम में पीरामल फाउंडेशन के कोर टीम मेंबर विकास सिन्हा ने पीपीटी प्रस्तुति के माध्यम से मलेरिया के कारण, लक्षण और बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी।

इस अवसर पर राज्य के विभिन्न जिलों से आए 10 मुखियाओं को वेक्टर जनित रोगों के उन्मूलन में बेहतर कार्य करने के लिए सम्मानित किया गया। इनमें साहेबगंज की किरण सोरेन, धनबाद की काकुली मुखर्जी, गढ़वा के अनुज कुमार सिंह, सिमडेगा के शिशिर टोप्पो, रामगढ़ की बुलबुल कुमारी, हजारीबाग के रवि कुमार दास, लातेहार की सुनीता देवी, गुमला के जीने लकड़ा, पाकुड़ के नैका सोरेन, रांची के कृष्णा पाहन और गिरिडीह की मधु देवी शामिल हैं।

इसके अलावा जेएसएलपीएस से जुड़ी महिलाओं को भी उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। इनमें धनबाद की ब्यूटी भट्टाचार्य, सिमडेगा की शकीला खातून, गुमला की शिखा कुमारी, पाकुड़ की मलोरी देवी और लातेहार के संजय कुमार यादव शामिल हैं।

कार्यक्रम के दौरान यह भी बताया गया कि वर्ष 2025 में झारखंड में कुल 42,236 मलेरिया के मामले सामने आए। वहीं, आरडीटी किट के माध्यम से 14,69,564 जांच और स्लाइड के जरिए 55,08,928 जांच की गई।

राज्य के आठ जिलों—बोकारो, चतरा, देवघर, धनबाद, कोडरमा, पलामू, रामगढ़ और जामताड़ा—में 100 से कम मलेरिया के मामले दर्ज किए गए, जो एक सकारात्मक संकेत है।

कार्यक्रम में राज्यभर से लगभग 300 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर डॉ लाल मांझी, डॉ विजय रजक, डॉ मुकेश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में वेक्टर जनित रोगों पर आधारित एक कॉफी टेबल बुक का भी विमोचन किया गया, जो जागरूकता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।