Skip to content

Koderma News : बगड़ो पंचायत में 25 दिवसीय लाह चूड़ी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू, 20 महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर

Megha Sinha

Koderma News : मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड की विशेष घटक योजना के तहत अनुसूचित जाति की 20 महिलाओं को मिलेगा प्रशिक्षण, जयपुर में काम कर चुके मास्टर ट्रेनर सिखाएंगे लाह चूड़ी बनाने की बारीकियां।

Koderma News : कोडरमा के डोमचांच प्रखंड स्थित बगड़ो पंचायत में 25 दिवसीय लाह चूड़ी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हुआ। इसमें अनुसूचित जाति की 20 महिलाओं को चूड़ी निर्माण और आकर्षक डिजाइन बनाने का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ने की पहल की जा रही है।

Koderma News : ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और उन्हें स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। कोडरमा जिले के डोमचांच प्रखंड अंतर्गत बगड़ो गांव में 25 दिवसीय लाह चूड़ी प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से अनुसूचित जाति समुदाय की 20 महिलाओं को लाह चूड़ी बनाने की कला और आधुनिक डिजाइन तैयार करने की तकनीक सिखाई जाएगी।

यह कार्यक्रम मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड की विशेष घटक योजना के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को हुनरमंद बनाकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है, ताकि वे प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अपने स्तर पर रोजगार शुरू कर सकें और परिवार की आमदनी बढ़ाने में योगदान दे सकें।

बगड़ो पंचायत भवन में आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल होने वाली 20 महिलाओं को अगले 25 दिनों तक लाह चूड़ी निर्माण का व्यावहारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को लाह से चूड़ियां तैयार करने, उन्हें आकर्षक रूप देने और विभिन्न प्रकार के डिजाइन बनाने की जानकारी दी जाएगी।

Koderma News : बगड़ो पंचायत में 25 दिवसीय लाह चूड़ी प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू, 20 महिलाएं बनेंगी आत्मनिर्भर 1

लाह चूड़ी निर्माण एक ऐसा पारंपरिक हस्तशिल्प है, जिसमें रचनात्मकता और बारीक कारीगरी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सही तकनीक और बेहतर डिजाइन के माध्यम से इस कला को रोजगार का अच्छा माध्यम बनाया जा सकता है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए महिलाओं को इस क्षेत्र में प्रशिक्षित करने की पहल की गई है।

प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को केवल चूड़ी बनाने की प्रक्रिया ही नहीं, बल्कि बेहतर फिनिशिंग और आकर्षक डिजाइन तैयार करने के व्यावहारिक तरीके भी सिखाए जाएंगे, जिससे वे भविष्य में बाजार की मांग के अनुसार अपने उत्पाद तैयार कर सकें।

इस 25 दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर वसीम महिलाओं को प्रशिक्षण देंगे। वे जयपुर में लाह चूड़ी निर्माण के क्षेत्र में कार्य कर चुके हैं। इस दौरान अर्जित अनुभव और तकनीकी कौशल का उपयोग करते हुए वे प्रशिक्षणार्थियों को लाह चूड़ी बनाने की विभिन्न विधियों से परिचित कराएंगे।

उनके अनुभव से महिलाओं को पारंपरिक कारीगरी के साथ-साथ आकर्षक डिजाइन तैयार करने की नई तकनीकों को समझने का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षण का विशेष फोकस महिलाओं को व्यावहारिक रूप से कुशल बनाना है, ताकि वे केवल सैद्धांतिक जानकारी तक सीमित न रहें, बल्कि अपने हाथों से चूड़ियां तैयार करने में सक्षम हो सकें।

कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर पर मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड की ओर से सभी प्रशिक्षणार्थियों के बीच प्रशिक्षण से संबंधित टूलकिट का वितरण भी किया गया।

टूलकिट मिलने से महिलाओं को प्रशिक्षण के दौरान आवश्यक उपकरणों के साथ काम सीखने में मदद मिलेगी। इसके माध्यम से वे लाह चूड़ी निर्माण की प्रक्रिया को करीब से समझ सकेंगी और नियमित अभ्यास कर अपने कौशल को बेहतर बना सकेंगी।

प्रशिक्षण में व्यावहारिक अभ्यास को प्राथमिकता दिए जाने से महिलाओं को भविष्य में स्वयं का काम शुरू करने के लिए जरूरी अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी कई महिलाएं आर्थिक गतिविधियों से पूरी तरह नहीं जुड़ पाती हैं। घरेलू जिम्मेदारियों और रोजगार के सीमित अवसरों के कारण उन्हें अपनी प्रतिभा और हुनर को आगे बढ़ाने का पर्याप्त मौका नहीं मिल पाता। ऐसे में कौशल विकास से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम उनके लिए नई संभावनाओं के दरवाजे खोल सकते हैं।

बगड़ो पंचायत में शुरू किया गया यह प्रशिक्षण भी इसी दिशा में एक प्रयास है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद महिलाएं व्यक्तिगत रूप से लाह चूड़ी निर्माण का काम शुरू करने की दिशा में आगे बढ़ सकती हैं। इसके अलावा भविष्य में समूह बनाकर भी इस तरह के हस्तशिल्प कार्य को आगे बढ़ाने की संभावना बन सकती है।

यदि प्रशिक्षित महिलाओं को तैयार उत्पादों के विपणन, बाजार तक पहुंच और उचित मूल्य दिलाने के लिए भी सहयोग मिलता है, तो यह पहल उनके लिए नियमित आय का माध्यम बन सकती है।

इस तरह का कौशल विकास कार्यक्रम महिलाओं को रोजगार के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं रोजगार सृजन करने की क्षमता विकसित करने में मदद कर सकता है।